{"_id":"68377a785f1b6b6663032aa9","slug":"fraud-most-ration-scams-happened-in-urban-areas-bareilly-news-c-4-lko1064-650669-2025-05-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जीवाड़ा : शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा हुआ राशन का बंदरबांट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जीवाड़ा : शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा हुआ राशन का बंदरबांट
विज्ञापन
बरेली। जिले में वर्ष 2015-2018 के बीच हुआ खाद्यान्न घोटाला की सीआईडी जांच के बाद परतें खुलाना शुरू हो गई हैं। बरेली में सदर तहसील के सीबीगंज, कोतवाली, बारादरी, प्रेमनगर में सबसे ज्यादा घोटाले सामने आए। यहां एक कार्ड पर 65 से 90 अपात्रों को राशन बांटने का खेल हुआ। आधार कार्ड की फीडिंग के जरिए अधिकारियों की मिलीभगत से कंप्यूटर ऑपरेटर ने जमकर फर्जीवाडा किया और गरीबों के राशन का बंदरबांट किया गया।
सात साल पहले बरेली समेत कई जिलों में खाद्यान्न घोटाला हुआ। गरीबों का राशन हड़पने के लिए पूर्ति विभाग के तत्कालीन अधिकारियों व कंप्यूटर ऑपरेटर, कोटेदारों ने प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन में आधार कार्ड फीड कराने के नाम पर फर्जीवाड़ा किया। एक आधार नंबर पर 65 से लेकर 90 लोगों को राशन वितरण दिखाया गया। बताते हैं कि 2015 के बाद पीओएस मशीन चलन में आई। मशीन में आधार कार्ड फीड कराने का काम जिले के कोटेदारों पर था।
इसी दौरान गरीबों के राशन का बंदरबांट करने के लिए योजना बनाकर एक आधार पर कई लोगों को राशन कागजों में बांटा गया। अतिरिक्त राशन को ब्लैक में बेचकर अवैध रूप से कमाई की गई। मामला पकड़ में आने के बाद पहले जिला स्तर पर इसकी जांच की गई, लेकिन बाद में जिसके बाद करीब नौ कोटेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। कई साल मामले की जांच चली, लेकिन मुकदमों के प्रगति न होने देख 2024 में जांच सीआईडी को दे दी गई। जिसके बाद सीआईडी ने मामले में रिपोर्ट जारी की गई हैं। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
सात साल पहले बरेली समेत कई जिलों में खाद्यान्न घोटाला हुआ। गरीबों का राशन हड़पने के लिए पूर्ति विभाग के तत्कालीन अधिकारियों व कंप्यूटर ऑपरेटर, कोटेदारों ने प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन में आधार कार्ड फीड कराने के नाम पर फर्जीवाड़ा किया। एक आधार नंबर पर 65 से लेकर 90 लोगों को राशन वितरण दिखाया गया। बताते हैं कि 2015 के बाद पीओएस मशीन चलन में आई। मशीन में आधार कार्ड फीड कराने का काम जिले के कोटेदारों पर था।
विज्ञापन
इसी दौरान गरीबों के राशन का बंदरबांट करने के लिए योजना बनाकर एक आधार पर कई लोगों को राशन कागजों में बांटा गया। अतिरिक्त राशन को ब्लैक में बेचकर अवैध रूप से कमाई की गई। मामला पकड़ में आने के बाद पहले जिला स्तर पर इसकी जांच की गई, लेकिन बाद में जिसके बाद करीब नौ कोटेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। कई साल मामले की जांच चली, लेकिन मुकदमों के प्रगति न होने देख 2024 में जांच सीआईडी को दे दी गई। जिसके बाद सीआईडी ने मामले में रिपोर्ट जारी की गई हैं। संवाद
विज्ञापन