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प्रभारी मंत्री के निर्देश पर भी ब्लैकलिस्ट नहीं हुई फर्म
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बरेली। परिषदीय स्कूलों में बच्चे ठंड से ठिठुर रहे हैं लेकिन अब तक नगर संसाधन केेंद्र पर छात्र संख्या के सापेक्ष स्वेटर की सप्लाई नहीं हो सकी है। अफसर स्वेटर वितरण में हो रही लेटलतीफी का जिम्मेदार सप्लाई फर्म को मान रहे हैं लेकिन फर्म को बचाने में भी जुटे हैं। वह भी तब जब प्रमुख सचिव नवनीत सहगल संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट कर नए टेंडर करने का निर्देश दे चुके हैं।
स्वेटर वितरण का बजट जारी होने के करीब दो माह बाद भी कानपुर की शुभम हैंडलूम फर्म स्वेटर की सप्लाई नहीं कर सकी है। वितरण की आखिरी तिथि 30 नवंबर तक शत प्रतिशत स्वेटर सप्लाई न करने पर प्रमुख सचिव ने नाराजगी जताते हुए फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए थे। आखिरी तिथि गुजरने के दो दिन बाद शुभम हैंडलूम ने 35 हजार स्वेटर की पहली खेप नगर संसाधन केंद्र पर भेजी। प्रमुख सचिव के निर्देर्शों के तहत फर्म को ब्लैकलिस्ट किया जाना था लेकिन अफसर उसे बचाते रहे। कंपनी ने जो स्वेटर भेजे हैं वे भी घटिया किस्म के हैं। इसमें अलग-अलग साइज, रंग और पांच विभिन्न कंपनियों के नामों के स्वेटर हैं। शिक्षकों का आरोप है कि स्वेटर बेहद घटिया हैं लेकिन सीडीओ ने महज 25 फीसदी भुगतान रोकने की कार्रवाई ही की है। मंगलवार को यह मामला विभाग में चर्चा का विषय बना रहा। बताया जाता है कि फर्म को 26 जिलों में स्वेटर सप्लाई का टेंडर मिला है। चर्चा है कि फर्म ने मोटी रकम खर्च कर टेंडर हासिल किया है, हालांकि अफसर इस पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। मामले में जानकारी के लिए बीएसए को कॉल की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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स्वेटर वितरण का बजट जारी होने के करीब दो माह बाद भी कानपुर की शुभम हैंडलूम फर्म स्वेटर की सप्लाई नहीं कर सकी है। वितरण की आखिरी तिथि 30 नवंबर तक शत प्रतिशत स्वेटर सप्लाई न करने पर प्रमुख सचिव ने नाराजगी जताते हुए फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए थे। आखिरी तिथि गुजरने के दो दिन बाद शुभम हैंडलूम ने 35 हजार स्वेटर की पहली खेप नगर संसाधन केंद्र पर भेजी। प्रमुख सचिव के निर्देर्शों के तहत फर्म को ब्लैकलिस्ट किया जाना था लेकिन अफसर उसे बचाते रहे। कंपनी ने जो स्वेटर भेजे हैं वे भी घटिया किस्म के हैं। इसमें अलग-अलग साइज, रंग और पांच विभिन्न कंपनियों के नामों के स्वेटर हैं। शिक्षकों का आरोप है कि स्वेटर बेहद घटिया हैं लेकिन सीडीओ ने महज 25 फीसदी भुगतान रोकने की कार्रवाई ही की है। मंगलवार को यह मामला विभाग में चर्चा का विषय बना रहा। बताया जाता है कि फर्म को 26 जिलों में स्वेटर सप्लाई का टेंडर मिला है। चर्चा है कि फर्म ने मोटी रकम खर्च कर टेंडर हासिल किया है, हालांकि अफसर इस पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। मामले में जानकारी के लिए बीएसए को कॉल की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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