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Bareilly News: महंत कमलनयन दास की हत्या में एफआर निरस्त, दोबारा विवेचना का आदेश
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बरेली। किला थाना क्षेत्र स्थित तुलसी मठ के महंत कमलनयन दास की हत्या के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अलका पांडेय ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट (एफआर) निरस्त करते हुए दोबारा विवेचना का आदेश दिया है। एफआर का महंत कमलनयन दास के शिष्य और मुकदमा वादी दिनेश्वर दास ने विरोध करते हुए प्रोटेस्ट दाखिल किया था। कोर्ट ने प्रभारी निरीक्षक किला को 22 जून को रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।
दिनेश्वर दास ने गुरु महंत कमलनयन दास की हत्या का आरोप मठ से जुड़े नीरज मिश्रा, अंबा दत्त पचैरी, विष्णु दत्त पचैरी, कमला पांडेय, महेश चंद्र पांडेय, पंकज पांडेय, पूनम पंत, सुमन, जितेंद्र कुमार पांडेय, शिव अवतार मिश्रा, ब्रह्म स्वरूप, मुनीश, कृष्ण मुरारी पाठक और जम्मू-कश्मीर में तैनात भारतीय सेना में धर्मगुरु दुर्गेंद्र चतुर्वेदी पर लगाया था। उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल कर इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की थी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। विवेचना के बाद पुलिस ने एफआर लगा दी थी।
वादी ने इसका विरोध करते हुए कोर्ट में तर्क दिया कि मठ की परंपरा के अनुसार, महंत का देहावसान होने पर उनको दफनाया जाता है, लेकिन कमलनयन दास का शव जलाया गया। विवेचक को उनके शव और अवशेषों की फॉरेंसिक जांच करानी चाहिए थी, ताकि मौत का कारण साफ हो सके। संदिग्ध वसीयत की भी जांच नहीं की गई। इस आधार पर एफआर निरस्त किए जाने की मांग की थी। संवाद
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तीन करोड़ रुपये का हुआ था गबन
शिष्य दिनेश्वर दास ने आरोप लगाया था कि तुलसी मठ स्थल की जमीन व अन्य स्रोतों से होने वाली आय के तीन करोड़ रुपये का उस समय गबन किया गया था। महंत कमल नयन दास ने इसका विरोध किया था। इस वजह से मठ से जुड़े लोग उनकी हत्या की साजिश रचने लगे। इलाज के नाम पर उन्हें ऐसी दवाएं दीं, जिससे वह रोगग्रस्त हो गए। 25 मई 2022 की रात उन्हें जहर दे दिया गया। महंत ने उन्हें बुलाया और बताया कि आरोपियों ने दवा के नाम पर जहर दे दिया है। वह उन्हें इलाज के लिए ले जाने लगे तो आरोपियों ने उन्हें रोक दिया। मारपीट करते हुए हत्या की धमकी देकर कमरे में बंद कर दिया। अगले दिन शाम पांच बजे महंत की मृत्यु हो गई। उनका शव फ्रीजर में रखकर फूलों से ढक दिया, ताकि जहर के लक्षण दिखाई न दें।
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दिनेश्वर दास ने गुरु महंत कमलनयन दास की हत्या का आरोप मठ से जुड़े नीरज मिश्रा, अंबा दत्त पचैरी, विष्णु दत्त पचैरी, कमला पांडेय, महेश चंद्र पांडेय, पंकज पांडेय, पूनम पंत, सुमन, जितेंद्र कुमार पांडेय, शिव अवतार मिश्रा, ब्रह्म स्वरूप, मुनीश, कृष्ण मुरारी पाठक और जम्मू-कश्मीर में तैनात भारतीय सेना में धर्मगुरु दुर्गेंद्र चतुर्वेदी पर लगाया था। उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल कर इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की थी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। विवेचना के बाद पुलिस ने एफआर लगा दी थी।
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वादी ने इसका विरोध करते हुए कोर्ट में तर्क दिया कि मठ की परंपरा के अनुसार, महंत का देहावसान होने पर उनको दफनाया जाता है, लेकिन कमलनयन दास का शव जलाया गया। विवेचक को उनके शव और अवशेषों की फॉरेंसिक जांच करानी चाहिए थी, ताकि मौत का कारण साफ हो सके। संदिग्ध वसीयत की भी जांच नहीं की गई। इस आधार पर एफआर निरस्त किए जाने की मांग की थी। संवाद
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तीन करोड़ रुपये का हुआ था गबन
शिष्य दिनेश्वर दास ने आरोप लगाया था कि तुलसी मठ स्थल की जमीन व अन्य स्रोतों से होने वाली आय के तीन करोड़ रुपये का उस समय गबन किया गया था। महंत कमल नयन दास ने इसका विरोध किया था। इस वजह से मठ से जुड़े लोग उनकी हत्या की साजिश रचने लगे। इलाज के नाम पर उन्हें ऐसी दवाएं दीं, जिससे वह रोगग्रस्त हो गए। 25 मई 2022 की रात उन्हें जहर दे दिया गया। महंत ने उन्हें बुलाया और बताया कि आरोपियों ने दवा के नाम पर जहर दे दिया है। वह उन्हें इलाज के लिए ले जाने लगे तो आरोपियों ने उन्हें रोक दिया। मारपीट करते हुए हत्या की धमकी देकर कमरे में बंद कर दिया। अगले दिन शाम पांच बजे महंत की मृत्यु हो गई। उनका शव फ्रीजर में रखकर फूलों से ढक दिया, ताकि जहर के लक्षण दिखाई न दें।