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Bareilly News: संघटक महाविद्यालयों से मांगा गया चार वर्षों का वित्तीय हिसाब

Tue, 03 Nov 2026 03:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 03 Nov 2026 03:07 AM IST
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Four-year financial accounts sought from constituent colleges
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय (रुविवि) से जुड़े राजकीय संघटक महाविद्यालयों की एक बैठक सोमवार को बुलाई गई। इसमें विवि परिक्षेत्र में आने वाले राजकीय संघटक महाविद्यालय रिछा, पीलीभीत, बदायूं, नवाबगंज के प्राचार्य के साथ ही पूरे स्टाफ को बुलाया गया। बीते पांच वर्षों में महाविद्यालयों के खातों से किए गए खर्च का ब्योरा मांगा गया।
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बैठक कुलपति अनिल कुमार राय की अध्यक्षता में हुई। इसमें महाविद्यालयों के प्राचार्यों व स्टाफ ने अपनी समस्याएं भी रखीं। शिक्षकों ने बताया कि महाविद्यालय के पास दो खाते हैं। ये खाते पूर्व कुलपति ने खुलवाए। इनका संचालन पुराने एफओ की अनुमति से होता रहा है।
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कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार राय ने बताया कि सभी संघटक महाविद्यालयों के विकास पर काम भी किया जाएगा। बैठक की चर्चा का मुख्य बिंदु संघटक महाविद्यालयों द्वारा संचालित खातों के बारे में रहा। अब तक ये खाते कांट्रेक्चुअल रूप से कार्यरत प्राचार्य स्वतंत्र रूप से संचालित कर रहे थे। अब इसमें वित्त अधिकारी का भी दखल होगा।
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सभी संघटक महाविद्यालयों के दो खाते हैं। एक खाता विश्वविद्यालय की आरे से दिए जाने वाले परीक्षा के खर्च के लिए है। दूसरे खाते में विद्यार्थियों की फीस जमा हो रही थी।
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मुरादाबाद व शाहजहांपुर के विद्यालयों के खर्च का वहन नहीं करेगा विवि
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की वित्त अधिकारी महिमा चंद ने बताया कि मुरादाबाद में गुरुजंभेश्वर यूनिवर्सिटी बनने के बाद भी रुविवि ने करीब दो सालों तक बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद के संघटक महाविद्यालयों के स्टाफ का वेतन अपने खाते से जारी किया। ये महाविद्यालय रुविवि की सीमा से बाहर थे, यानी जो पैसा इन संघटक महाविद्यालयों के पास आ रहा था, वह रुविवि को नहीं मिल रहा था। शाहजहांपुर विश्वविद्यालय के परिक्षेत्र में आने वाले संघटक महाविद्यालय की भी यही स्थिति रही। अब इन संघटक महाविद्यालयों का खर्च अब रुविवि वहन नहीं करेगा।
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मांगे पूरी न होने पर शिक्षकों ने जताया विरोध
बरेली। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों ने पुरानी पेंशन बहाली सहित 30 मांगों को उठाते हुए आंदोलन शुरू कर दिया है। फुपुक्टा (फेडरेशन ऑफ यूपी यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन) के आह्वान पर सोमवार से पांच नवंबर तक चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गई है। इसी क्रम में बरेली कॉलेज के शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर काम करके विरोध जताया।
फुपुक्टा के संगठन मंत्री व बरेली कॉलेज में गणित विभाग प्रभारी टीएस चौहान ने बताया कि 30 मांगें शासन और निदेशालय स्तर पर वर्षों से लंबित हैं। महासंघ ने कई बार सकारात्मक बातचीत का प्रस्ताव रखा लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। प्रयागराज में हुई फुपुक्टा कार्यकारिणी की बैठक में निर्णय किया गया कि दो, तीन और चार नवंबर को विरोध जताया जाएगा। बरेली कॉलेज की कार्यकारिणी ने इसका समर्थन किया।
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रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने पर मंथन
बरेली। रुविवि के चार राजकीय महाविद्यालयों में सीसी कैमरे, वाई-फाई युक्त कैंपस और प्रयोगशालाएं विकसित होंगी। कंप्यूटर लैब और पुस्तकालय में सभी विषयों की किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी।
कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने कहा कि कॉलेजों की आय बढ़ाने के लिए विद्यार्थियों की संख्या बढ़ानी होगी। महाविद्यालयों में बीबीए व बीसीए जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने पर मंथन हुआ। इसके अलावा डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और कौशल विकास के कोर्सेज की उपयोगिता का सर्वे कर रिपोर्ट मांगी है। जिनमें एमएससी और बीएससी होम साइंस नहीं है, उन कॉलेजों में यह शुरू होगा।


इस दौरान प्रो. एसके पांडेय, डीन सीडीसी और डीन एकेडमिक्स ने पढ़ाई का स्तर बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कक्षाओं में विद्यार्थियों की उपस्थिति और कोर्स कंटेंट की गुणवत्ता बढ़ाने पर के लिए कहा। इस दौरान कुलसचिव महेंद्र कुमार ने महाविद्यालयों की आर्थिकी की समीक्षा की। संवाद
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