Stray Dogs: बरेली में स्कूल के बाहर चार छात्रों को कुत्ते ने किया काटा, एक बच्चे की हालत गंभीर
बरेली में आवारा कुत्तों का आतंक थम नहीं रहा है। शनिवार को एक स्कूल के बाहर कुत्ते ने चार बच्चों पर हमला कर दिया। जिससे चारों घायल हो गए। घटना के बाद स्कूल के छात्रों में दहशत है।
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बरेली में अब स्कूल से निकलने वाले बच्चे भी आवारा कुत्तों के हमले से सुरक्षित नहीं हैं। शनिवार को नैनीताल रोड स्थित जीआरएम स्कूल में अवकाश के बाद बाहर निकले चार बच्चों पर कुत्तों ने हमला कर जख्मी कर दिया। एक छात्र को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
रामवाटिका निवासी कारोबारी ध्रुव ने बताया कि अवकाश के बाद बच्चे स्कूल से बाहर निकले तो वहां घूम रहे कुत्तों ने भौंकना शुरू कर दिया। पीछे रहे चार बच्चों में से दो के हाथ, एक के घुटने और एक की जांघ पर कुत्तों ने काट लिया। बताया कि कक्षा पांच में पढ़ रहे बेटे ध्रुव की जांघ पर गहरा जख्म हो गया है।
डॉक्टर ने किया ऑपरेशन
उसे सिविल लाइंस स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अब वह कुत्तों के डर से स्कूल जाने से इनकार कर रहा है। बच्चे का इलाज कर रहे डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी ने बताया कि बच्ची की जांघ पर काफी मांस निकलने से ऑपरेशन करना पड़ा। निगरानी के लिए बच्चे को भर्ती किया गया है। प्लास्टिक सर्जरी होगी। बच्ची की हालत खतरे से बाहर है।
मासूम बच्ची को कुत्ते ने काटा
नानी के घर रह रही पांच साल की बच्ची लक्ष्मी को कुत्ते ने शनिवार शाम बुरी तरह काटकर घायल कर दिया। बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बीडीए कॉलोनी टीबरीनाथ निवासी खुशबू ने बताया कि वह अपनी मां पूनम नागिया के साथ उन्हीं के घर रहती हैं।
उनकी पांच साल की बेटी लक्ष्मी शनिवार शाम करीब सात बजे जीने से नीचे उतरकर पड़ोस के घर में ट्यूशन पढ़ने जा रही थी। इस दौरान कुत्ते ने लक्ष्मी को कई जगह काट लिया। उसकी चीख सुनकर आसपास के लोग आ गए। तब कुत्ते को पीटकर भगाया गया। लक्ष्मी को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नैन सिंह ने बताया कि कुत्तों को पकड़ने का अभियान जारी है। आने वाले दिनों में परसाखेड़ा में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर शुरू होने से राहत मिलेगी। वहां 200 कुत्तों को पकड़कर रखा जा सकेगी।
शहर में 45 हजार से अधिक कुत्ते हैं, पर इस साल अब तक सिर्फ 2800 की नसबंदी हुई है। इस पर 25.67 लाख रुपये खर्च हो गए, पर कुत्तों का आतंक बरकरार है। आए दिन कुत्ते शहरवासियों को जख्म दे रहे हैं। लोगों पर रैबीज का खतरा मंडरा रहा है।
नगर निगम की ओर से कुत्तों को पकड़ने के लिए किए गए इंतजाम नाकाफी हैं। 80 वार्ड के शहर में सिफ एक टीम लगाई गई है। कभी टीम के कर्मचारी छुट्टी पर चले जाते हैं तो उनके स्थान पर दूसरा नहीं लगाया जाता।
पार्षद गौरव सक्सेना ने बताया कि नगर निगम को सूचित करें तो कोई जरूरी नहीं है कि उसी दिन टीम आए। पार्षद शशि सक्सेना बताती हैं कि राजेंद्रनगर में सुबह-शाम टहलना मुश्किल है। कई लोग कुत्तों के काटने से घायल हो चुके हैं।
कुत्तों को नसंबदी के वक्त एंटी रैबीज वैक्सीन भी लगाई जाती है। ताकि रैबीज का खतरा न रहे। यह वैक्सीन एक साल तक प्रभावी होती है। इस हिसाब से अगर किसी कुत्ते को जनवरी 2024 में वैक्सीन लगी है तो उसे जनवरी 2025 में दोबारा वैक्सीन लगनी चाहिए। किस कुत्ते को कब वैक्सीन लगी, निगम के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए आपको खुद सतर्क रहना होगा।