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आईएमए के डॉक्टरों ने चार घंटे ठप रखा कामकाज
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Thu, 17 Nov 2016 01:22 AM IST
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Four doctors of IMA Working hours had stalled
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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पुरानी करेंसी बदलवाने और नकदी की समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए बुधवार के चार घंटे दिक्कत भरे रहे। निजी अस्पतालाें और नर्सिंग होम में कोई इलाज नहीं किया गया। ओपीडी बंद रही। हालांकि भर्ती मरीजाें पर कोई संकट नहीं था। चिकित्सकों ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन भी दिया।
दोपहर दो बजे तक कुछ अस्पतालों में मरीज तो आए, लेकिन उनका इलाज नहीं किया गया। दो बजे के बाद डॉक्टर ओपीडी में बैठे। इस दौरान भीड़ भी अधिक रही। आईएमए की ओर से कोई सख्ती नहीं की गई थी, इसलिए कुछ डॉक्टर अपनी क्लीनिक खोलकर बैठे हुए थे। आईएमए परिसर में अध्यक्ष डॉ. जेके भाटिया ने सत्याग्रह का आह्वान किया। उन्होंने यहां आए डॉक्टराें से कहा कि सरकार की ओर से मेडिकल कानून परेशानी का सबब बन रहे हैं। चाहे कन्या भ्रूण हत्या रोकने को पीसीपीएनडीटी एक्ट हो या फिर क्लीनिक इस्टेबलिशमेंट एक्ट। इनमें बदलाव की जरूरत है क्योंकि इससे डॉक्टरों का शोषण हो रहा है। उन्हाेंने कहा कि अस्पतालाें में मारपीट और तोड़फोड़ को लेकर सेंट्रल एक्ट बनाया जाए। डॉक्टराें के धरने में मेयर डॉ. आईएस तोमर, सांसद धर्मेंद्र कश्यप, विधायक डॉ. अरुण कुमार, राजेश अग्रवाल, पूर्व सांसद वीरपाल यादव ने भी अपनी बात रखी। एक बजे सभी डॉक्टर कलक्ट्रेट पहुंचे। यहां सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार से मिले। इस दौरान डॉ. राजेश कक्कड़, डॉ. विनोद पागरानी, डॉ. सत्येंद्र सिंह, डॉ. रवीश अग्रवाल, डॉ. गिरीश अग्रवाल, डॉ. रवि मेहरा, डॉ. अंशु अग्रवाल, डॉ. अनीस बेग, डॉ. अनूप आर्या, डॉ. सुधांशु, डॉ अतुल व लतिका के साथ अन्य कई शामिल रहे।
जिला अस्पताल में सामान्य रही भीड़
जिला अस्पताल में निजी डॉक्टराें की हड़ताल का कोई असर नहीं दिखा। रोजाना की तरह ही 1500 नए मरीज ओपीडी में आए। सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता ने बताया कि स्थिति सामान्य रही।
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दोपहर दो बजे तक कुछ अस्पतालों में मरीज तो आए, लेकिन उनका इलाज नहीं किया गया। दो बजे के बाद डॉक्टर ओपीडी में बैठे। इस दौरान भीड़ भी अधिक रही। आईएमए की ओर से कोई सख्ती नहीं की गई थी, इसलिए कुछ डॉक्टर अपनी क्लीनिक खोलकर बैठे हुए थे। आईएमए परिसर में अध्यक्ष डॉ. जेके भाटिया ने सत्याग्रह का आह्वान किया। उन्होंने यहां आए डॉक्टराें से कहा कि सरकार की ओर से मेडिकल कानून परेशानी का सबब बन रहे हैं। चाहे कन्या भ्रूण हत्या रोकने को पीसीपीएनडीटी एक्ट हो या फिर क्लीनिक इस्टेबलिशमेंट एक्ट। इनमें बदलाव की जरूरत है क्योंकि इससे डॉक्टरों का शोषण हो रहा है। उन्हाेंने कहा कि अस्पतालाें में मारपीट और तोड़फोड़ को लेकर सेंट्रल एक्ट बनाया जाए। डॉक्टराें के धरने में मेयर डॉ. आईएस तोमर, सांसद धर्मेंद्र कश्यप, विधायक डॉ. अरुण कुमार, राजेश अग्रवाल, पूर्व सांसद वीरपाल यादव ने भी अपनी बात रखी। एक बजे सभी डॉक्टर कलक्ट्रेट पहुंचे। यहां सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार से मिले। इस दौरान डॉ. राजेश कक्कड़, डॉ. विनोद पागरानी, डॉ. सत्येंद्र सिंह, डॉ. रवीश अग्रवाल, डॉ. गिरीश अग्रवाल, डॉ. रवि मेहरा, डॉ. अंशु अग्रवाल, डॉ. अनीस बेग, डॉ. अनूप आर्या, डॉ. सुधांशु, डॉ अतुल व लतिका के साथ अन्य कई शामिल रहे।
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जिला अस्पताल में सामान्य रही भीड़
जिला अस्पताल में निजी डॉक्टराें की हड़ताल का कोई असर नहीं दिखा। रोजाना की तरह ही 1500 नए मरीज ओपीडी में आए। सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता ने बताया कि स्थिति सामान्य रही।
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