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Bareilly News: साइबर ठगों को खाता मुहैया कराने वाले चार धंधेबाज भेजे जेल
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बरेली। साइबर थाना पुलिस ने साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। चारों को जेल भेज दिया गया।
साइबर थाना प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि साइबर ठगी की कई घटनाओं में ऐसे गिरोह के शामिल होने का पता लग रहा था जो शहर में ही सक्रिय हैं। काफी समय से साइबर थाने की टीम इनकी तलाश में थी। बुधवार को दरोगा अमित कुमार व उनकी टीम ने चारों को गिरफ्तार कर लिया।
इनमें भोजीपुरा थाने के गांव मेमोर गौटिया निवासी पंकज गंगवार, शेरगढ़ थाने के गांव नगरिया कलां निवासी हरेंद्र कुमार, राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव धरवारी निवासी वीरेंद्र सिंह व मैनपुरी के थाना बेवर के गांव हरदुआ निवासी अजय कुमार शामिल हैं।
इनके पास से कई पासबुक, कई चेक, पैनकार्ड, आधार कार्ड व बैंकों की मुहर बरामद हुई हैं। एसआई अमित कुमार ने पूछताछ की तो पता लगा कि ये लोग टेलीग्राम व फेसबुक पर चल रहे ग्रुप के जरिये लोगों की जानकारी जुटाने का काम करते थे। साथ ही साइबर अपराधियों के लिए खातों का इंतजाम व दूसरे व्यक्ति की आईडी पर सिम का जुगाड़ करते थे। इस काम के लिए खाताधारक को ठगी की रकम में से दो या तीन फीसदी देने का लालच भी देते थे। खाते खुलवाकर उनके डेबिट कार्ड आदि पास रख लेते थे। बरेली की कुछ घटनाएं भी इनके जरिये खोलने का रास्ता साफ हुआ है।
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साइबर थाना प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि साइबर ठगी की कई घटनाओं में ऐसे गिरोह के शामिल होने का पता लग रहा था जो शहर में ही सक्रिय हैं। काफी समय से साइबर थाने की टीम इनकी तलाश में थी। बुधवार को दरोगा अमित कुमार व उनकी टीम ने चारों को गिरफ्तार कर लिया।
इनमें भोजीपुरा थाने के गांव मेमोर गौटिया निवासी पंकज गंगवार, शेरगढ़ थाने के गांव नगरिया कलां निवासी हरेंद्र कुमार, राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव धरवारी निवासी वीरेंद्र सिंह व मैनपुरी के थाना बेवर के गांव हरदुआ निवासी अजय कुमार शामिल हैं।
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इनके पास से कई पासबुक, कई चेक, पैनकार्ड, आधार कार्ड व बैंकों की मुहर बरामद हुई हैं। एसआई अमित कुमार ने पूछताछ की तो पता लगा कि ये लोग टेलीग्राम व फेसबुक पर चल रहे ग्रुप के जरिये लोगों की जानकारी जुटाने का काम करते थे। साथ ही साइबर अपराधियों के लिए खातों का इंतजाम व दूसरे व्यक्ति की आईडी पर सिम का जुगाड़ करते थे। इस काम के लिए खाताधारक को ठगी की रकम में से दो या तीन फीसदी देने का लालच भी देते थे। खाते खुलवाकर उनके डेबिट कार्ड आदि पास रख लेते थे। बरेली की कुछ घटनाएं भी इनके जरिये खोलने का रास्ता साफ हुआ है।
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