बरेली: यूपी चुनाव से पहले भाजपा को झटका, पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने किया पार्टी छोड़ने का एलान
फेसबुक पर टाटा बाय बाय लिखने वाले आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने का एलान किया है। हालांकि अभी उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि समर्थकों की बैठक के बाद अगला कदम तय होगा। देवचरा में बड़ी रैली की तैयारी के संकेत दिए।
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बरेली में भाजपा छोड़ने का एलान करने के बाद आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने बुधवार को अपने समर्थकों और क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति पर मंथन किया। बैठक में बिथरी चैनपुर और आंवला क्षेत्र के कई ग्राम प्रधान और अन्य लोग मौजूद रहे। बातचीत में कश्यप ने बार-बार कहा कि जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। पहले समर्थकों और कार्यकर्ताओं से राय ली जाएगी, इसके बाद अगला कदम तय होगा।
बैठक में मौजूद लोगों का परिचय कराते हुए कश्यप ने चांदपुर नवदिया, चकरपुर, चंदौआ, मिलक, कटका भरत और खजुआरी समेत कई गांवों के प्रधानों के नाम गिनाए। उन्होंने कहा कि उनके साथ विभिन्न वर्गों के लोग जुड़े हैं और आगे की रणनीति सामूहिक चर्चा के बाद तय होगी।
'भाजपा में चापलूस कार्यकर्ताओं की बाढ़'
धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा में अपनी नाराजगी का कारण बताते हुए कहा कि जिन लोगों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हराने का काम किया, वे आज पार्टी में आगे की पंक्ति में बैठे हैं, जबकि मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की पूछ नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में चापलूस कार्यकर्ताओं की बाढ़ आ गई है और ऐसे लोगों को बड़े पद दिए गए हैं, जिनका क्षेत्र में प्रभाव सीमित है।
देवचरा में करेंगे बड़ी रैली
उन्होंने कहा कि नेता अकेले निर्णय नहीं लेता, कार्यकर्ता और समर्थक उसकी ताकत होते हैं। इसलिए आगे का फैसला भी उनसे विचार-विमर्श के बाद ही होगा। कश्यप ने समर्थकों की एक बड़ी रैली देवचरा में आयोजित करने की इच्छा भी जताई।
बैठक में 2027 के विधानसभा चुनाव के साथ लोकसभा क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा हुई। लोधी समाज समेत विभिन्न वर्गों के लोगों की मौजूदगी को लेकर भी बातचीत हुई। कश्यप ने कहा कि उनके समर्थक केवल वोट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर तरह से उनके साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होने से पहले भी उन्होंने समर्थकों से राय ली थी और बड़ी रैली की थी। अब आगे की राह भी बातचीत के बाद तय होगी। फिलहाल कश्यप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस राजनीतिक दल का रुख करेंगे।
कश्यप के निशाने पर भाजपा संगठन
कश्यप ने आरोप लगाया कि 2024 में उनके खिलाफ काम करने वालों को पार्टी में पद दिए गए, जबकि मेहनती कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हुई। उन्होंने कहा कि इसी असंतोष के कारण उन्होंने भाजपा से अलग होने का फैसला लिया।
बोले- नेता नहीं, कार्यकर्ता ताकत
कश्यप ने कहा कि नेता अपने समर्थकों की राय से अलग होकर राजनीति नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी के बजाय विचार-विमर्श जरूरी है और सभी वर्गों के लोगों से बातचीत के बाद ही आगे की रणनीति सामने आएगी।