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आईटी पार्क भूल जाएं.. 100 बेड के अस्पताल की तैयारी शुरू कराएं
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केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार
- फोटो : amar ujala
आईटी पार्क भूल जाएं.. 100 बेड के अस्पताल की तैयारी शुरू कराएं
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बरेली। सीबीगंज में 15 साल से बंद पड़ी आईटीआर फैक्टरी की जमीन पर जनप्रतिनिधियों के राय-मशवरे के बगैर आईटी पार्क बनाने की अफसरों की मंशा पर पानी फिर गया है। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की इस घोषणा के साथ इसका पटाक्षेप हुआ है कि आईटीआर की जमीन पर आईटी पार्क नहीं बल्कि श्रमिकों के लिए सौ बेड का आधुनिक अस्पताल बनेगा। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से अस्पताल के लिए बजट भी मंजूर कर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री की यह टिप्पणी भी चर्चा में है कि अफसर नेतागिरी करने के बजाय विकास में मन लगाएं। स्मार्ट सिटी मिशन पर लगातार उठते सवालों के बीच उनकी इस टिप्पणी के गहरे निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।
श्रम मंत्रालय की ओर से साफ किया गया है कि सीबीगंज औद्योगिक क्षेत्र में बनने जा रहे आधुनिक सुविधाओं से लैस सौ बेड के अस्पताल का फायदा रुहेलखंड क्षेत्र के हजारों श्रमिकों को मिलेगा। मंत्रालय ने अस्पताल बनाने का प्रस्ताव पारित करा दिया है। राज्य कर्मचारी बीमा निगम बोर्ड की ओर से भी इसकी स्वीकृति अपनी 217 वीं बैठक में दी जा चुकी है। दरअसल मंत्रालय आईटीआर की जमीन पर आधुनिक अस्पताल बनाने की तैयारी दिसंबर 2019 से ही कर था। इस बीच कुछ अफसरों की ओर से यहां आईटी पार्क बनाए जाने का भी शगूफा छोड़ दिया गया। इससे नाराज केंद्रीय श्रम राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संतोष गंगवार ने कुछ दिन पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में टिप्पणी की थी कि अफसर नेतागिरी करने में नहीं बल्कि विकास में मन लगाएं।
दरअसल ज्यादातर जनप्रतिनिधि अफसरों से पहले से इसलिए नाराज हैं क्योंकि स्मार्ट सिटी मिशन में सरकार की अपेक्षाओं के मुताबिक शहर में काम नहीं हो पा रहा है। एक तरफ अफसरों की ओर से विकास की हवाई घोषणाएं की जाती हैं तो दूसरी तरफ टेंडरों और डीपीआर में गड़बड़ियों का लगातार खुलासा होता रहा है। इस सबके बावजूद स्मार्ट सिटी के तमाम प्रोजेक्ट जहां के तहां अटके हुए हैं। कुछ महीने पहले ही मुख्य सचिव की समीक्षा में भी बरेली को स्मार्ट सिटी मिशन में देश भर के सर्वाधिक फिसड्डी शहरों में शुमार किया गया था। बरेली के अफसरों पर कड़ी टिप्पणी भी की गई थी लेकिन इसके बावजूद स्मार्ट सिटी मिशन की रफ्तार में कोई बदलाव नहीं आया। केंद्रीय मंत्री की नाराजगी की भी प्रमुख वजह यही थी कि दो हजार करोड़ से ज्यादा बजट के स्मार्ट सिटी मिशन को संभालने के बजाय अफसरों की ओर से आईटीआर की खाली जमीन पर आईटी पार्क बनाने की हवाई किलेबंदी शुरू कर दी गई थी।
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अब इस जमीन पर आधुनिक अस्पताल स्वीकृत करने के साथ केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने अफसरों को इस पर तुरंत कार्रवाई शुरू करने को कहा है। कानपुर में ईएसआई क्षेत्रीय निदेशक से कहा गया कि वह प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर आईटीआर फैक्टरी में अस्पताल के लिए जमीन चिन्हित करने के साथ उस पर कब्जा लेना सुनिश्चित करें। मंत्रालय ने कहा कि बजट जारी करने का उल्लेख करते हुए जल्द ही धनराशि को संबंधित विभागों के खातों में भेजने को भी कहा है। ईएसआईसी बोर्ड से स्वीकृत बजट और अस्पताल की रूपरेखा से संबंधित सारे रिकॉर्ड भी क्षेत्रीय निदेशक को उपलब्ध कराए गए हैं।
जंगल में तब्दील हो चुका है
श्रम मंत्रालय की ओर से साफ किया गया है कि सीबीगंज औद्योगिक क्षेत्र में बनने जा रहे आधुनिक सुविधाओं से लैस सौ बेड के अस्पताल का फायदा रुहेलखंड क्षेत्र के हजारों श्रमिकों को मिलेगा। मंत्रालय ने अस्पताल बनाने का प्रस्ताव पारित करा दिया है। राज्य कर्मचारी बीमा निगम बोर्ड की ओर से भी इसकी स्वीकृति अपनी 217 वीं बैठक में दी जा चुकी है। दरअसल मंत्रालय आईटीआर की जमीन पर आधुनिक अस्पताल बनाने की तैयारी दिसंबर 2019 से ही कर था। इस बीच कुछ अफसरों की ओर से यहां आईटी पार्क बनाए जाने का भी शगूफा छोड़ दिया गया। इससे नाराज केंद्रीय श्रम राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संतोष गंगवार ने कुछ दिन पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में टिप्पणी की थी कि अफसर नेतागिरी करने में नहीं बल्कि विकास में मन लगाएं।
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दरअसल ज्यादातर जनप्रतिनिधि अफसरों से पहले से इसलिए नाराज हैं क्योंकि स्मार्ट सिटी मिशन में सरकार की अपेक्षाओं के मुताबिक शहर में काम नहीं हो पा रहा है। एक तरफ अफसरों की ओर से विकास की हवाई घोषणाएं की जाती हैं तो दूसरी तरफ टेंडरों और डीपीआर में गड़बड़ियों का लगातार खुलासा होता रहा है। इस सबके बावजूद स्मार्ट सिटी के तमाम प्रोजेक्ट जहां के तहां अटके हुए हैं। कुछ महीने पहले ही मुख्य सचिव की समीक्षा में भी बरेली को स्मार्ट सिटी मिशन में देश भर के सर्वाधिक फिसड्डी शहरों में शुमार किया गया था। बरेली के अफसरों पर कड़ी टिप्पणी भी की गई थी लेकिन इसके बावजूद स्मार्ट सिटी मिशन की रफ्तार में कोई बदलाव नहीं आया। केंद्रीय मंत्री की नाराजगी की भी प्रमुख वजह यही थी कि दो हजार करोड़ से ज्यादा बजट के स्मार्ट सिटी मिशन को संभालने के बजाय अफसरों की ओर से आईटीआर की खाली जमीन पर आईटी पार्क बनाने की हवाई किलेबंदी शुरू कर दी गई थी।
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अब इस जमीन पर आधुनिक अस्पताल स्वीकृत करने के साथ केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने अफसरों को इस पर तुरंत कार्रवाई शुरू करने को कहा है। कानपुर में ईएसआई क्षेत्रीय निदेशक से कहा गया कि वह प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर आईटीआर फैक्टरी में अस्पताल के लिए जमीन चिन्हित करने के साथ उस पर कब्जा लेना सुनिश्चित करें। मंत्रालय ने कहा कि बजट जारी करने का उल्लेख करते हुए जल्द ही धनराशि को संबंधित विभागों के खातों में भेजने को भी कहा है। ईएसआईसी बोर्ड से स्वीकृत बजट और अस्पताल की रूपरेखा से संबंधित सारे रिकॉर्ड भी क्षेत्रीय निदेशक को उपलब्ध कराए गए हैं।
रुहेलखंड में ईएसआई का पहला अस्पताल करीब डेढ़ लाख श्रमिकों को मिलेगा लाभ
केंद्र सरकार की ओर से आईटीआर की जमीन पर घोषित अस्पताल रुहेलखंड क्षेत्र में ईएसआई का पहला अस्पताल होगा। बरेली और मुरादाबाद के कारखानों और विभिन्न प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिक/कर्मचारी ईएसई सदस्यों को यहां आधुनिक चिकित्सा सेवाएं मुहैया होंगी। दोनों मंडलों में करीब डेढ़ लाख कर्मचारी भविष्य निधि सदस्य हैं। अभी तक सीबीगंज के ईएसआई अस्पताल में उन्हें सीमित चिकित्सा सुविधाएं ही मिल रही थीं। नया अस्पताल बनने के बाद उसमें कई आधुनिक सुविधाएं भी मिलनी शुरू होंगी और श्रमिकों को चिकित्सा के लिए दिल्ली-लखनऊ नहीं भागना पड़ेगा।जमीन की कीमत तय करने में फंसाया पेच तो दोबारा हुई ईएसआईसी बोर्ड की बैठक
आईटीआर की जमीन पर पर चार दिसंबर 2019 को ही ईएसआई अस्पताल बनना तय हो गया था। बता दें कि कमिश्नर आईटीआर कंपनी के अध्यक्ष हैं। केंद्रीय मंत्रालय के प्रस्ताव पर आईटीआर अध्यक्ष के कार्यालय ने जमीन की कीमत के तौर पर 56.67 करोड़ रुपये की धनराशि जमा कराने को कहा था। यह धनराशि स्वीकृत हुई तो इसमें नया पेच फंसा दिया गया। दस प्रतिशत अतिरिक्त धनराशि की मांग यह कहते हुए की गई कि चिन्हित भूमि के दोनों ओर सड़क है। इधर श्रम मंत्रालय में इस पर दोबारा कार्रवाई शुरू हुई तो उधर आईटीआर की जमीन पर आईटी हब बनने का प्रचार शुरू कर दिया गया। पिछले दिनों श्रम मंत्रालय ने ईएसआईसी बोर्ड की बैठक में दस प्रतिशत अतिरिक्त धनराशि के आवंटन पर भी मुहर लगा दी। इसके बाद जमीन की कीमत बढ़कर करीब 63 करोड़ रुपये हो गई।आईटीआर फैक्टरी की जमीन पर आ चुके हैं कई प्रोजेक्ट
चार अक्टूबर 2004 को बंद हुई आईटीआर फैक्टरी की खाली जमीन का एक हिस्सा सुपीरियर डिस्टिलरी को बेचा चुका है। इसके साथ बीडीए ने भी यहां आवासीय और कॉमर्शियल उपयोग के लिए बड़े-बड़े बंगले और खाली जमीन खरीदी थी। यहां आवासीय कॉलोनी विकसित हो चुकी है। एक बिजलीघर भी बना है। आम्रपाली रियल एस्टेट फर्म ने मॉल, सिनेप्लेक्स और होटल भी बनाए थे। अब बाकी जमीन पर आईटी हब बनाने का हवाई किला खड़ा किया जा रहा था। इस बीच ईएसआई अस्पताल स्वीकृत भी हो गया।जंगल में तब्दील हो चुका है
फैक्टरी का प्रशासनिक भवन
एक समय था जब भी कोई हाईवे पर सीबीगंज से गुजरता था, कैंफर और आईटीआर फैक्टरी से उड़ने वाली सुगंध करीब एक किलोमीटर तक उसके दिमाग को तरोताजा कर देती थी। इस क्षेत्र में तापमान भी करीब दो डिग्री सेल्सियस कम रहता था। आईटीआर का प्रशासनिक भवन भी अपनी वास्तुकला पर इतराता था लेकिन अब यहां हर तरफ जंगल ही जंगल है। हमेशा अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने वाले इस भव्य भवन पर ही बड़े-बड़े पेड़ उग आएं हैं। उसके आसपास जाना भी मुश्किल है, हालांकि प्रवेश द्वार पर लगे बोर्ड अब भी याद दिलाते हैं कि कभी यह फैक्टरी हजारों लोगों को रोजी-रोटी देती थी।उत्तराखंड से लीसा की सप्लाई की बदौलत चल रही थी फैक्टरी
आईटीआर में बनने वाले विभिन्न उत्पादों के लिए कुमाऊं और आसपास के पर्वतीय इलाकों से कच्चे माल के तौर पर लीसा की बड़े पैमाने पर आपूर्ति होती थी। काठगोदाम समेत कई स्थानों पर लीसा के बड़े-बड़े डिपो भी थे। लीसा पहाड़ों पर पाए जाने पर चीड़ के पेड़ों से निकाला जाता था। 15 साल पहले सपा के शासन में फैक्टरी बंद होने के बाद बरेली के कमिश्नर को इसका अध्यक्ष नामित कर दिया गया था।आईटीआर फैक्टरी की जमीन पर करीब 63 करोड़ रुपये की लागत से सौ बेड का आधुनिक ईएसआई अस्पताल स्वीकृत किया गया है। इसका बजट जारी हो गया है। अफसरों को तुरंत राज्य सरकार से समन्वय कर जमीन चिह्नित करने और उस पर कब्जा लेने के साथ बाकी सभी औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश दे दिया गया है। यह अस्पताल श्रमिकों को आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराएगा। - संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री