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Bareilly News: किच्छा नदी में बाढ़ से संपर्क मार्ग कटा
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शेरगढ़। किच्छा नदी में आई बाढ़ के पानी ने फिर फसलों और भूमि का कटान शुरू कर दिया। शनिवार को नगरिया कलां-कमालपुर-लखीमपुर संपर्क मार्ग को नदी के तेज बहाव ने काट दिया। इससे चौपहिया वाहनों का आवागमन ठप हो गया है।
किसानों ने बताया कि बारिश का पानी आन के चलते नदी में बाढ़ से उनकी फसलें चौपट हो रही है। उफनाई नदी का पानी लगभग 800 बीघा फसलों में घुस गया है। किच्छा नदी किनारे किसान तारा चंद, अशोक, विजयपाल, छतरपाल आदि ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी गन्ने की फसल भूमि कटान के चलते नदी में समा रही है। इससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। किच्छा नदी किनारे बसे गांव नगरिया कलां, धर्मपुरा, कमालपुर, लखीमपुर, रजपुरा आदि गांवों के किसान परेशान रहे। किसानों ने बताया कि हरा चारा जलमग्न होने से पशुओं का निवाला भी छीन गया है।
उधर, सांसद निधि से नगरिया कलां में बनी श्मशान भूमि के चारों तरफ पानी भर गया। नदी का पानी घटने से नगरिया कलां, कमालपुर संपर्क, लखीमपुर का संपर्क मार्ग कट गया है। हालांकि इस पर केवल दो पहिया वाहन निकल रहे हैं। इससे कमालपुर, लखीमपुर, ढकिया, मल्साखेड़ा, बूंची जाफरपुर, सहोड़ा, भुड़ासी आदि गांवों के लोगों ब्लॉक मुख्यालय आने के लिए दुनका होकर या कस्वापुर होकर आवागमन कर रहे हैं। इससे लोगों को करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। संवाद
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बहगुल नदी की धार से शाही-मिर्जापुर मार्ग को खतरा
शाही। कस्बे के पश्चिम दिशा में बह रही बहगुल नदी में बृहस्पतिवार की रात से बाढ़ का और ज्यादा पानी आने से सैकड़ों किसानो की जमीन नदी में समा गई है। वहीं, नदी की धार के बदले हुए रुख से शाही-मिर्जापुर मार्ग को खतरा पैदा हो गया है। नदी की धार पुल से करीब तीन सौ मीटर आगे की ओर बहती हुई चल रही है, जो मिर्जापुर मार्ग को स्पर्श कर रही है।
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन भगत सिंह सैनी, जेई पूजा वर्मा, एसडीएम मीरगंज और सीओ ने शाही-मिर्जापुर रोड को स्पर्श कर रही नदी की धार को देखकर यहां थाना अध्यक्ष अमित कुमार बालियान को पुलिसकर्मियों के ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए। सड़क पर कुछ जगह लगाए गए रेत के कट्टे भी धंस चुके हैं।
सड़क कई जगह साइड से खाली हो चुकी है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया कि पुल के नजदीक नगर पंचायत के द्वारा खोदे गए नाले से सड़क को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने नगर पंचायत से नाला को ठीक से व्यवस्था करने के लिए कहा है। प्रशासन ने इस मार्ग से निकालने वालों के लिए धीमी गति एवं सावधानी पूर्वक आने जाने की सलाह दी है। संवाद
लोगों को सुरक्षित स्थान को भेजा
तहसीलदार बहेड़ी भानु प्रताप ने बताया कि राहत के लिए जरूरी काम शुरू कर दिए गए हैं। नदी किनारे बसे गांव के लोगों को सुरक्षित स्थान भेजवा दिया है। राजस्वकर्मी लगातार नजर बनाए हुए हैं। गौला बैराज से पानी छोड़ने के बाद नदी में बाढ़ आ गई है। संवाद
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गोशाला में घुसा पानी, गोवंशों को निजी भवन में पहुंचाया
नवाबगंज। बारिश के चलते लाइखेड़ा गांव में बनी गोशाला में पनघैली और सिंघइया नदी का पानी घुस गया। जानकारी होने पर शनिवार को प्रशासन के कर्मियों ने गोवंशों को निजी भवन में पहुंचाया।
लाइखेड़ा गांव में गोशाला निचली भूमि पर बनी है। गांव के पास बहने वाली पनघैली और सिंघइया नदी में भी जलस्तर बढ़ गया है। शनिवार को इन नदियों का पानी गोशाला में भर गया। गोशाला का संचालन करने वाले ग्रामप्रधान अफजल खां और सचिव नरेश राठौर ने अधिकारियों को सूचना दी। सूचना पर एसडीएम नवाबगंज उदित पवार, तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह समेत सरकारी अमला मौके पर पहुंच गए। उन्होंने गोवंशों को वहां से निकाल एक ग्रामीण के खाली पड़े मकान में सभी को भेजा।
ग्रामीणों का आरोप है कि गोशाला में गोवंशों की हालत खराब है। जिम्मेदारों को गोशाला में पानी भरने की जानकारी थी। बावजूद इसके उनकी सुरक्षा में कोई कदम नही उठाया गया।
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किसानों ने बताया कि बारिश का पानी आन के चलते नदी में बाढ़ से उनकी फसलें चौपट हो रही है। उफनाई नदी का पानी लगभग 800 बीघा फसलों में घुस गया है। किच्छा नदी किनारे किसान तारा चंद, अशोक, विजयपाल, छतरपाल आदि ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी गन्ने की फसल भूमि कटान के चलते नदी में समा रही है। इससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। किच्छा नदी किनारे बसे गांव नगरिया कलां, धर्मपुरा, कमालपुर, लखीमपुर, रजपुरा आदि गांवों के किसान परेशान रहे। किसानों ने बताया कि हरा चारा जलमग्न होने से पशुओं का निवाला भी छीन गया है।
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उधर, सांसद निधि से नगरिया कलां में बनी श्मशान भूमि के चारों तरफ पानी भर गया। नदी का पानी घटने से नगरिया कलां, कमालपुर संपर्क, लखीमपुर का संपर्क मार्ग कट गया है। हालांकि इस पर केवल दो पहिया वाहन निकल रहे हैं। इससे कमालपुर, लखीमपुर, ढकिया, मल्साखेड़ा, बूंची जाफरपुर, सहोड़ा, भुड़ासी आदि गांवों के लोगों ब्लॉक मुख्यालय आने के लिए दुनका होकर या कस्वापुर होकर आवागमन कर रहे हैं। इससे लोगों को करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। संवाद
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बहगुल नदी की धार से शाही-मिर्जापुर मार्ग को खतरा
शाही। कस्बे के पश्चिम दिशा में बह रही बहगुल नदी में बृहस्पतिवार की रात से बाढ़ का और ज्यादा पानी आने से सैकड़ों किसानो की जमीन नदी में समा गई है। वहीं, नदी की धार के बदले हुए रुख से शाही-मिर्जापुर मार्ग को खतरा पैदा हो गया है। नदी की धार पुल से करीब तीन सौ मीटर आगे की ओर बहती हुई चल रही है, जो मिर्जापुर मार्ग को स्पर्श कर रही है।
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन भगत सिंह सैनी, जेई पूजा वर्मा, एसडीएम मीरगंज और सीओ ने शाही-मिर्जापुर रोड को स्पर्श कर रही नदी की धार को देखकर यहां थाना अध्यक्ष अमित कुमार बालियान को पुलिसकर्मियों के ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए। सड़क पर कुछ जगह लगाए गए रेत के कट्टे भी धंस चुके हैं।
सड़क कई जगह साइड से खाली हो चुकी है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया कि पुल के नजदीक नगर पंचायत के द्वारा खोदे गए नाले से सड़क को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने नगर पंचायत से नाला को ठीक से व्यवस्था करने के लिए कहा है। प्रशासन ने इस मार्ग से निकालने वालों के लिए धीमी गति एवं सावधानी पूर्वक आने जाने की सलाह दी है। संवाद
लोगों को सुरक्षित स्थान को भेजा
तहसीलदार बहेड़ी भानु प्रताप ने बताया कि राहत के लिए जरूरी काम शुरू कर दिए गए हैं। नदी किनारे बसे गांव के लोगों को सुरक्षित स्थान भेजवा दिया है। राजस्वकर्मी लगातार नजर बनाए हुए हैं। गौला बैराज से पानी छोड़ने के बाद नदी में बाढ़ आ गई है। संवाद
गोशाला में घुसा पानी, गोवंशों को निजी भवन में पहुंचाया
नवाबगंज। बारिश के चलते लाइखेड़ा गांव में बनी गोशाला में पनघैली और सिंघइया नदी का पानी घुस गया। जानकारी होने पर शनिवार को प्रशासन के कर्मियों ने गोवंशों को निजी भवन में पहुंचाया।
लाइखेड़ा गांव में गोशाला निचली भूमि पर बनी है। गांव के पास बहने वाली पनघैली और सिंघइया नदी में भी जलस्तर बढ़ गया है। शनिवार को इन नदियों का पानी गोशाला में भर गया। गोशाला का संचालन करने वाले ग्रामप्रधान अफजल खां और सचिव नरेश राठौर ने अधिकारियों को सूचना दी। सूचना पर एसडीएम नवाबगंज उदित पवार, तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह समेत सरकारी अमला मौके पर पहुंच गए। उन्होंने गोवंशों को वहां से निकाल एक ग्रामीण के खाली पड़े मकान में सभी को भेजा।
ग्रामीणों का आरोप है कि गोशाला में गोवंशों की हालत खराब है। जिम्मेदारों को गोशाला में पानी भरने की जानकारी थी। बावजूद इसके उनकी सुरक्षा में कोई कदम नही उठाया गया।