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Bareilly News: समुद्र की गहराइयों से लेकर आसमान की ऊंचाइयों तक लहरा रहे परचम

Thu, 21 Aug 2025 02:58 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 21 Aug 2025 02:58 AM IST
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Flags fluttering from the depths of the sea to the heights of the sky
पारंपरिक खेलों से हटकर युवाओं ने चुनीं चुनौतियां, पदक और उपलब्धियों से चमकाया भविष्य
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बरेली। तकनीकी प्रगति और बदलते दौर के साथ खेलों की परिभाषा भी बदल रही है। जहां कभी पारंपरिक खेलों जैसे क्रिकेट, हॉकी या फुटबॉल को ही भविष्य और पहचान का माध्यम माना जाता था, वहीं अब युवा पीढ़ी रोमांचक खेलों की ओर भी कदम बढ़ा रही है। एडवेंचर स्पोर्ट्स यानी पैराग्लाइडिंग, स्कूबा डाइविंग, नौकायान, अंडरवाॅटर स्विमिंग जैसे खेलों ने युवाओं के सपनों को एक नया आयाम दिया है। रोमांच, जोखिम और साहस से जुड़े ये खेल नई पीढ़ी के लिए आकर्षण का केंद्र बनने के साथ-साथ उनके भविष्य को भी एक नई उड़ान दे रहे हैं। इनमें सफलता हासिल कर युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे हैं और पदक जीतकर भारत का तिरंगा लहरा रहे हैं। संवाद

नौकायन के जुनून ने पहुंचाया अंतरराष्ट्रीय स्तर तक
आंवला के रहने वाले 24 वर्षीय उज्ज्वल मुंबई में भारतीय सेना में हवलदार के पद पर नियुक्त हैं। वह बताते हैं कि जब वह 18 साल के थे, तब उनका चयन भारतीय सेना में हो गया था। ट्रेनिंग के दौरान उनका नौकायन से परिचय हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने इसे अपनाया और पुणे में पेशेवर ट्रेनिंग शुरू कर दी। वर्ष 2025 में उन्होंने तस्मानिया (ऑस्ट्रेलिया) में हुई इंटरनेशनल ऑस्ट्रेलियन रोइंग चैंपियनशिप में देश के लिए दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में ओलंपिक क्वालिफायर में तीसरे स्थान पर आने से उनका चयन नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अब वह वियतनाम में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे हैं।
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समुद्र में लहराया तिरंगा झंडा
सिविल लाइंस निवासी 29 वर्षीय शुभम बागची का सपना हमेशा मर्चेंट नेवी से जुड़ने का रहा। पानी के प्रति लगाव ने उन्हें अंडरवाटर स्विमिंग जैसे रोमांचक खेल की ओर आकर्षित किया। नियमित अभ्यास के साथ, उन्होंने बाली (इंडोनेशिया) में समुद्र की 250 से 300 फीट गहराई में जाकर भारत का तिरंगा फहराया। वह बताते हैं कि समुद्र की गहराई में अंधेरे के साथ ही ऑक्सीजन का दबाव और तेज लहरों का सामना करना बेहद कठिन था। लेकिन भारत का नाम रोशन करने की भावना ने उन्हें यह शक्ति दी। शुभम मुंबई में टीवी सीरियल और फिल्मों में भी काम कर चुके हैं। अब वह पर्वतों की ऊंचाइयों पर भी तिरंगा लहराने का सपना देख रहे हैं।
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उम्र से नहीं, जज्बे से शुरू होता है सफर
मॉडल टाउन निवासी 49 वर्षीय सचिन अरोरा इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि खेलों में उम्र कभी बाधा नहीं बनती। युवावस्था में वह बॉक्सिंग के खिलाड़ी रहे, लेकिन 40 वर्ष की आयु में उन्होंने एडवेंचर स्पोर्ट्स में कदम रखने का फैसला किया। उनकी शुरुआत पैराग्लाइडिंग से हुई। इसके बाद, उन्होंने माउंटेन क्लाइंबिंग और कयाकिंग का कोर्स किया और पेशेवर ट्रेनिंग भी हासिल की। वह बंजी जंपिंग, स्कूबा डाइविंग, फ्लाई बोर्डिंग और रिवर राफ्टिंग भी कर चुके हैं। वर्तमान में वह मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग ले रहे हैं और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की तैयारी में हैं। सचिन अपनी सभी उपलब्धियों का श्रेय पत्नी श्वेता को देते हैं।
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