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शहर की फिजा में पटाखों ने खूब जहर घोला

Tue, 01 Nov 2016 01:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Tue, 01 Nov 2016 01:40 AM IST
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Fiza poison mixes plenty of fireworks in the city
रोशनी - फोटो : बरेली, अमर उजाला
सामान्य दिनों में ही शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण क्षमता से ज्यादा रहता है लेकिन रविवार को दिवाली की शाम को पटाखों की गूंज और आतिशबाजी के धुएं ने शहर की फिजा में पांच गुना ज्यादा जहर घोल दिया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मॉनीटरिंग सेंटर के मुताबिक वायु और ध्वनि प्रदूषण हद से परे तक बढ़ गया। दिवाली के उल्लास में आशितबाजी की मस्ती शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हुई है।
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बरेली कालेज स्थित पॉल्यूशन मानीटरिंग सेंटर की ओर दिवाली पर शहर में छह स्थानों सिस्टम लगाकर मानीटरिंग कराई गई। मॉडल टाउन, कुतुबखाना, शहामतगंज, आईवीआरआई रोड, प्रभा सिनेमा के सामने और सिटी स्टेशन के पास सिस्टम लगाकर इन इलाकों में दिवाली वाली रात वायु और ध्वनि प्रदूषण को चेक किया गया।  शहर में वायु प्रदूषण सामान्य दिनों में 160 से 200 आरएसपीएम पाया जाता है लेकिन दिवाली पर यह बढ़कर 600 से 1200 तक हो गया। इसी तरह से सामान्य दिनों में वायु प्रदूषण 45 से 55 डेसीबल रिकार्ड किया जाता है, वह दीवाली पर 130 से 180 डेसीबल तक मिला है। सेंटर कोआर्डिनेटर डॉ. डीके सक्सेना ने बताया कि बताया कि दीवाली पर पटाखों और आतिशबाजी से वातावरण में सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड और कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए काफी हद तक नुकसानदायक होती है। इन हानिकारक तत्वों से खास तौर पर हृदय रोगियों और सांस रोगियों को काफी दिक्कत होती है। सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड के हानिकारक तत्व सांस के जरिए व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर कैंसर, दमा और टीबी जैसे रोगों के कारण भी बन रहे हैं।
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चौपुला और किला भी बेहद प्रदूषित
नेशनल एयर मानीटरिंग प्रोग्राम के तहत पिछले दिनों शहर में की गई वायु प्रदूषण की जांच में चौपुला और किला का इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में पाया गया। यहां आरएसपीएम (रिसपेरिबुल सस्पेक्ट पार्टिकुलेट मैटर) 342 तक पाए गए। पहले शहर में छह इलाके वायु प्रदूषण के लिहाज से खतरनाक जोन थे। इनमें आईवीआरआई रोड, कुतुबखाना चौराहा, चौपुला चौराहा, अयूब खां चौराहा, चौकी चौराहा और शाहमतगंज चौराहा हैं लेकिन किला का स्वालेनगर इलाका भी जुड़ गया। मानव के सहने की क्षमता 80 से 100 आरएसपीएम (रिसपेरिबुल सस्पेक्ट पार्टिकुलेट मैटर) तक होती है लेकिन शहर के छह व्यस्ततम इलाकों में यह 250 से 350 तक पहुंच चुके हैं। यह आंकड़े सामान्य दिनों के हैं। दिवाली पर प्रदूषण पांच गुना बढ़ने की स्थिति में इन इलाकों में प्रदूषण के आंकड़ों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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