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Bareilly News: पांच गुना महंगा टेंडर, फिर भी नहीं पकड़े जा रहे बंदर
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बरेली। बंदरों को पकड़ने के लिए नगर निगम खूब कागजी उछलकूद मचा रहा है। पांच गुना महंगी दरों पर टेंडर कर दिए, पर बंदर आजाद घूम रहे हैं। अपने ही घर में शहरवासी कैद होकर रह गए हैं। वे छत पर जाने से डरते हैं, क्योंकि बंदरों का झुंड उन पर हमला कर देता है। आलमगिरीगंज निवासी सेवानिवृत शिक्षक ऊषा सिंघल पर बंदरों का हमला महज एक बानगी है। ऐसे मामले सालभर सामने आते रहते हैं। रेलवे कॉलोनी और सुभाषनगर में लोगों का आना-जाना तक दुश्वार हो गया है।
28 सितंबर तक 157 रुपये की दर से बंदर पकड़े जा रहे थे। निजी फर्म ने इसमें रुचि नहीं दिखाई तो नगर निगम ने पांच गुना महंगी दरों पर दूसरी फर्म को टेंडर दे दिया। अब 779 रुपये की दर से बंदर पकड़े जा रहे हैं। इस साल अप्रैल से 28 सितंबर तक 414 और उसके बाद अब तक कुल 2287 बंदर पकड़े गए। इस पर 15.24 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, पर शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात नहीं मिल सकी है। कारण, नगर निगम की यह सारी कवायद कागजी है।
रामपुर गार्डन, सुभाषनगर, डीडीपुरम, राजेंद्रनगर, शास्त्रीनगर, रामपुर गार्डन, आमलगिरीगंज, सन सिटी, स्टेडियम रोड, कुर्मांचलनगर, पवन विहार, मढ़ीनाथ, साहूकारा में बंदरों के झुंड सड़क से लेकर छत तक पर कब्जा जमाए रहते हैं। वहीं, नगर निगम का बंदर पकड़ने का अभियान बीते सात दिनों से ठप है। अभियान सोमवार से फिर शुरू होगा।
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बंदरों का कोई आंकड़ा नहीं
बंदरोंं की संख्या पर शहर में कोई सर्वे नहीं हुआ है, लेकिन पार्षदों का आकलन है कि शहर में दस हजार से ज्यादा बंदर हैं। नगर निगम की कार्यकारिणी व बोर्ड बैठकों में यह मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। बंदर पकड़ने का अभियान कागजी होने के आरोप लगे तो शेड्यूल बना और पार्षदों से भी बंदर पकड़े जाने पर हस्ताक्षर कराए जाने की व्यवस्था लागू की गई, लेकिन जब शनिवार को आलमगिरीगंज के पार्षद मुकेश सिंघल से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि अभियान पूरी तरह कागजी है। टीम पिंजरा लगाने की खानापूरी करके चली जाती है। रेलवे कॉलोनी निवासी मुन्नी देवी कहती हैं कि नजर चूकते ही बंदर घरों में घुस जाते हैं। एक साल से इन्हें पकड़ने कोई नहीं आया।
रात भर सो न सकीं सेवानिवृत्त शिक्षक
आलमगिरीगंज निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक ऊषा सिंघल शुक्रवार को पूरी रात सो न सकीं। दर्द निवारक की खुराक बढ़ाई तो सुबह आराम मिला। ऊषा ने बताया कि शुक्रवार दोपहर बंदरों ने उन्हें चौतरफा घेर लिया था। बचने के लिए दौड़ीं तो छत पर गिर गईं। इससे बायां हाथ टूटा है। आलमगिरीगंज में एक साल पहले भी एक व्यक्ति पर बंदरों ने हमला किया था। तब 70-72 बंदर पकड़े गए थे। उसके बाद से अब तक बंदर नहीं पकड़े गए।
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छत और आम रास्तों पर किया कब्जा
घरों की छत और आम रास्तोंं पर बंदरों का कब्जा है। रेलवे कॉलोनी में डंडा हाथ में लेकर निकलना पड़ता है। नामालूम, ये बंदर कब पकड़े जाएंगे? - शायरा बानो, रेलवे कॉलोनी
ठेकेदार की कुछ समस्याएं थीं, उनका समाधान हो गया है। स्टेडियम रोड पर सोमवार को फिर अभियान शुरू होगा। आलमगिरीगंज, सन सिटी, कूर्मांचलनगर में भी बंदर पकड़े जाएंगे। - संचित शर्मा, उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
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28 सितंबर तक 157 रुपये की दर से बंदर पकड़े जा रहे थे। निजी फर्म ने इसमें रुचि नहीं दिखाई तो नगर निगम ने पांच गुना महंगी दरों पर दूसरी फर्म को टेंडर दे दिया। अब 779 रुपये की दर से बंदर पकड़े जा रहे हैं। इस साल अप्रैल से 28 सितंबर तक 414 और उसके बाद अब तक कुल 2287 बंदर पकड़े गए। इस पर 15.24 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, पर शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात नहीं मिल सकी है। कारण, नगर निगम की यह सारी कवायद कागजी है।
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रामपुर गार्डन, सुभाषनगर, डीडीपुरम, राजेंद्रनगर, शास्त्रीनगर, रामपुर गार्डन, आमलगिरीगंज, सन सिटी, स्टेडियम रोड, कुर्मांचलनगर, पवन विहार, मढ़ीनाथ, साहूकारा में बंदरों के झुंड सड़क से लेकर छत तक पर कब्जा जमाए रहते हैं। वहीं, नगर निगम का बंदर पकड़ने का अभियान बीते सात दिनों से ठप है। अभियान सोमवार से फिर शुरू होगा।
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बंदरों का कोई आंकड़ा नहीं
बंदरोंं की संख्या पर शहर में कोई सर्वे नहीं हुआ है, लेकिन पार्षदों का आकलन है कि शहर में दस हजार से ज्यादा बंदर हैं। नगर निगम की कार्यकारिणी व बोर्ड बैठकों में यह मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। बंदर पकड़ने का अभियान कागजी होने के आरोप लगे तो शेड्यूल बना और पार्षदों से भी बंदर पकड़े जाने पर हस्ताक्षर कराए जाने की व्यवस्था लागू की गई, लेकिन जब शनिवार को आलमगिरीगंज के पार्षद मुकेश सिंघल से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि अभियान पूरी तरह कागजी है। टीम पिंजरा लगाने की खानापूरी करके चली जाती है। रेलवे कॉलोनी निवासी मुन्नी देवी कहती हैं कि नजर चूकते ही बंदर घरों में घुस जाते हैं। एक साल से इन्हें पकड़ने कोई नहीं आया।
रात भर सो न सकीं सेवानिवृत्त शिक्षक
आलमगिरीगंज निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक ऊषा सिंघल शुक्रवार को पूरी रात सो न सकीं। दर्द निवारक की खुराक बढ़ाई तो सुबह आराम मिला। ऊषा ने बताया कि शुक्रवार दोपहर बंदरों ने उन्हें चौतरफा घेर लिया था। बचने के लिए दौड़ीं तो छत पर गिर गईं। इससे बायां हाथ टूटा है। आलमगिरीगंज में एक साल पहले भी एक व्यक्ति पर बंदरों ने हमला किया था। तब 70-72 बंदर पकड़े गए थे। उसके बाद से अब तक बंदर नहीं पकड़े गए।
छत और आम रास्तों पर किया कब्जा
घरों की छत और आम रास्तोंं पर बंदरों का कब्जा है। रेलवे कॉलोनी में डंडा हाथ में लेकर निकलना पड़ता है। नामालूम, ये बंदर कब पकड़े जाएंगे? - शायरा बानो, रेलवे कॉलोनी
ठेकेदार की कुछ समस्याएं थीं, उनका समाधान हो गया है। स्टेडियम रोड पर सोमवार को फिर अभियान शुरू होगा। आलमगिरीगंज, सन सिटी, कूर्मांचलनगर में भी बंदर पकड़े जाएंगे। - संचित शर्मा, उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो