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Bareilly News: पहले बचाव फिर प्रहार... बेटियां बन रहीं दमदार

Fri, 19 Dec 2025 02:46 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 19 Dec 2025 02:46 AM IST
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First defense then attack... daughters are becoming strong
बरेली। आज के समय में बेटियों और महिलाओं के लिए आत्मरक्षा सीखना बेहद जरूरी है। बदलते सामाजिक हालात में अभिभावक चाहते हैं कि उनकी बेटियां पढ़ाई के साथ-साथ खुद की सुरक्षा करना भी जानें। इसी सोच के चलते ताइक्वांडो, जूडो और कराटे जैसे मार्शल आर्ट्स खेलों की ओर बेटियों का रुझान तेजी से बढ़ा है। पहले बचाव, फिर प्रहार की कला सीखकर बेटियां दमदार बन रहीं हैं। अब वह पदक जीतने की ओर भी कदम बढ़ाना चाहती हैं। संवाद
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रोज एक घंटे अभ्यास से बढ़ा आत्मविश्वास


मैंने करीब एक साल पहले परिजनों के कहने पर जूडो सीखना शुरू किया था। उन्होंने कहा था कि मुझे आत्मरक्षा आनी चाहिए। शुरू में डर लगता था, लेकिन रोज एक घंटा अभ्यास करने से अब आत्मविश्वास बढ़ गया है। अब मुझे यह खेल बहुत पसंद है और मैं इसमें और अच्छा करना चाहती हूं। मेरा मानना है कि हर लड़की को यह खेल सीखना चाहिए। - पाखी
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मैंने ताइक्वांडो इसलिए शुरू किया ताकि जरूरत पड़ने पर खुद को बचा सकूं। अब मुझे इसमें रुचि हो गई है और मैं खेल में भी आगे जाना चाहती हूं। मैं घर पर भी रोज अभ्यास करती हूं। इससे शरीर मजबूत होता है और डर कम हो जाता है। हर लड़की को बेसिक सेल्फ डिफेंस की कला की जानकारी होनी चाहिए, ताकि वह अपना बचाव करने में सक्षम हो। - भावना सिंह
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हर लड़की को स्कूल में प्रशिक्षण मिलना चाहिए
मैंने अपने स्कूल में ताइक्वांडो का कैंप देखा था। वहां आत्मरक्षा के दांव-पेंच देखकर मुझे लगा कि यह खेल मुझे सीखना चाहिए। अब इससे मैं खुद को सशक्त महसूस करती हूं। मैं रोज करीब तीन घंटे अभ्यास करती हूं और आगे प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना चाहती हूं। मेरे मानना है कि हर लड़की को स्कूल स्तर से ही ऐसे खेलों में ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। - निशु ग्वाल



मेरे माता-पिता चाहते थे कि मैं ऐसा खेल सीखूं जिससे आत्मरक्षा भी हो सके। जूडो शुरू करने के बाद मुझे समझ आया कि इसमें आगे बढ़ने के अच्छे मौके हैं। अब मैं पदक भी जीत रही हूं और खुद को पहले से ज्यादा आत्मविश्वासी महसूस करती हूं। मेरा सपना है कि मैं राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी पदक जीतूं। - मीनाक्षी
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