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Bareilly News: निर्माण विभाग के अधिकारियों के पास घूमती रही फाइल, हस्ताक्षर के बाद पकड़ में आई मिलीभगत
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बरेली। निर्माण विभाग में इंजीनियरों के पास फाइल घूमती रही। छोटे से लेकर बड़े अभियंताओं ने फाइल पर हस्ताक्षर करके उसे आगे बढ़ा दिया। अकाउंट विभाग में फाइल के पहुंचते ही दोनों फर्माें की चोरी पकड़ ली गई। अब इस मामले में इंजीनियरों के साथ दोनों फर्मों की भी मिलीभगत सामने आ रही है। फर्माें की ओर से लगाए गए कागजात ही उनके खिलाफ साक्ष्य बन रहे हैं।
सूफी टोला निवासी जावेद सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री से की गई शिकायत में आरोप लगाया था कि वार्ड 54 में 20.94 लाख की लागत से नाली और सीसी सड़क की मरम्मत के लिए टेंडर निकाला गया था। इसमें माधवी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने प्रतिभाग किया था और काम आदर्श ठेकेदार को दे दिया गया। दोनों फर्माें ने मिलकर टेंडर को मैनेज करने का प्रयास किया। अब इस मामले में पता चला है कि कई अभियंताओं ने फाइल पर हस्ताक्षर करके अपनी स्वीकृति दे दी थी। इसमें प्रभारी मुख्य अभियंता से लेकर एई, जेई तक ने हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद फाइल अकाउंट विभाग को भेज दी गई। इसी दौरान मुख्यमंत्री से की गई शिकायत की जानकारी होने पर महापौर ने फाइल को तलब कर कागजों में की गई गड़बड़ी को पकड़ लिया। महापौर ने दोनों फर्माें को ब्लैक लिस्ट करने के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिखा है।
निर्माण विभाग के इंजीनियरों के खिलाफ भी होगी जांच
इस मामले ने निर्माण विभाग के इंजीनियरों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। बड़ा सवाल यह है कि फाइल में लगे कागजात और टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग करने वाली फर्माें की जांच किए बिना ही कैसे फाइल को हस्ताक्षर करके आगे बढ़ा दिया गया। महापौर ने नगर आयुक्त से इस प्रकरण में अभियंताओं व अधिकारियों की संलिप्तता की जांच करने के लिए कहा है।संवाद
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शिकायत का संज्ञान लेकर फाइल को तलब किया तो खामियां पकड़ी जा सकीं। निर्माण विभाग के अधिकारियों ने इसको आगे कैसे बढ़ा दिया, यह जांच का विषय है। निश्चित तौर पर इनके खिलाफ जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री को भी इस मिलीभगत से अवगत कराया गया है। - उमेश गौतम, महापौर
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सूफी टोला निवासी जावेद सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री से की गई शिकायत में आरोप लगाया था कि वार्ड 54 में 20.94 लाख की लागत से नाली और सीसी सड़क की मरम्मत के लिए टेंडर निकाला गया था। इसमें माधवी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने प्रतिभाग किया था और काम आदर्श ठेकेदार को दे दिया गया। दोनों फर्माें ने मिलकर टेंडर को मैनेज करने का प्रयास किया। अब इस मामले में पता चला है कि कई अभियंताओं ने फाइल पर हस्ताक्षर करके अपनी स्वीकृति दे दी थी। इसमें प्रभारी मुख्य अभियंता से लेकर एई, जेई तक ने हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद फाइल अकाउंट विभाग को भेज दी गई। इसी दौरान मुख्यमंत्री से की गई शिकायत की जानकारी होने पर महापौर ने फाइल को तलब कर कागजों में की गई गड़बड़ी को पकड़ लिया। महापौर ने दोनों फर्माें को ब्लैक लिस्ट करने के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिखा है।
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निर्माण विभाग के इंजीनियरों के खिलाफ भी होगी जांच
इस मामले ने निर्माण विभाग के इंजीनियरों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। बड़ा सवाल यह है कि फाइल में लगे कागजात और टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग करने वाली फर्माें की जांच किए बिना ही कैसे फाइल को हस्ताक्षर करके आगे बढ़ा दिया गया। महापौर ने नगर आयुक्त से इस प्रकरण में अभियंताओं व अधिकारियों की संलिप्तता की जांच करने के लिए कहा है।संवाद
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शिकायत का संज्ञान लेकर फाइल को तलब किया तो खामियां पकड़ी जा सकीं। निर्माण विभाग के अधिकारियों ने इसको आगे कैसे बढ़ा दिया, यह जांच का विषय है। निश्चित तौर पर इनके खिलाफ जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री को भी इस मिलीभगत से अवगत कराया गया है। - उमेश गौतम, महापौर