{"_id":"6508b94705cc1f94fd05b277","slug":"farmers-hopes-dashed-along-with-paddy-and-sugarcane-bareilly-news-c-4-1-bly1032-250040-2023-09-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: धान-गन्ने के साथ किसानों की उम्मीदें भी धराशायी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: धान-गन्ने के साथ किसानों की उम्मीदें भी धराशायी
Tue, 19 Sep 2023 02:25 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 19 Sep 2023 02:25 AM IST
विज्ञापन
मीरगंज। बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार-रविवार को हुई बारिश से ग्रामीण क्षेत्र में कई जगह धान की फसल बिछ गई। पानी भरने से किसानों को फसल सड़ने का डर है। किसानों का कहना है कि आने वाले दिनों में अगर अत्याधिक बारिश होती है या सितंबर के अंत तक जारी रहती है, तो नुकसान का दायरा और व्यापक होगा।
जुलाई और अगस्त में इस बार अच्छी बारिश हुई। इसका फायदा धान के साथ मूंगफली, बाजरा, मक्का और कपास जैसी फसलों को मिला। ज्यादातर हिस्सों में धान की फसल अच्छी हुई है, मगर शनिवार और रविवार को तेज हवा के साथ हुई बारिश की वजह से अगेती फसल खेतों में बिछ गई। अत्याधिक बारिश होने की वजह से पानी भी खेतों में भरा हुआ है। ऐसे में जिस फसल में बालियां निकल आईं हैं वहां दाना काला पड़ने की आशंका है। गिरने की वजह से गन्ने की बढ़वार भी प्रभावित होगी।
मनकरा गांव के किसान त्रिवेनी लाल ने बताया कि उन्होंने चार बीघा में धान की रोपाई की थी। फसल गिरने की वजह से दाना काना पड़ जाएगा। ऐसे में बाजार में इसकी ब्रिकी में कठिनाई आएगी। इसी गांव के ऐवरन गंगवार ने बताया कि 10 बीघे में लगाई गई फसल प्रभावित हुई है। आने वाले दिनों में अगर फिर से बारिश होती है तो नुकसान का दायरा और बढ़ेगा।
विज्ञापन
-- -- -
बातचीत:
दो एकड़ में धान की फसल लगाई थी। बारिश में पूरी फसल खेत में बिछ गई। अब उत्पादन घटने की आशंका है। - जीवन लाल, बसई
पांच बीघा में धान और तीन बीघा में गन्ना बोया था। बारिश में पूरी फसल खेतों में बिछ गई। धान का दाना काला पड़ने से उसकी ब्रिकी में कठिनाई आएगी। गन्ने की बढ़वार भी प्रभावित होगी। - कैशोराम, बसई
पेठा की फसल लगाई थी। रविवार को हुई बारिश से लाक जमीन पर गिर गया। पानी भरने से यह सड़ने लगी है। लागत निकलना तक मुश्किल है। - बुंदन बेग, शेखापुर
धान की शरबती किस्म की रोपाई की थी। करीब 30 बीघा में धान लगा हुआ था। तेज हवा के साथ पानी बरसने की वजह से पूरी फसल खेत में बिछ गई। - राजेंद्र प्रसाद, खतौला
नुकसान से बचने के लिए करें जलनिकासी
आईवीआरआई स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक भारी बारिश से खेतों में जलभराव है। लिहाजा, गन्ना गिरने की आशंका है। किसानों को तत्काल गिरी हुई फसल खड़ा कर बांध देना चाहिए। अगेती धान, तिल की फसल में अब अंकुर निकलने लगे हैं, इसलिए पानी से बाली में दाना कम भरेगा। जिन खेत में बाली निकलने लगी हैं वहां फसल गिरने की संभावना ज्यादा है। हालांकि, चरी, मक्का, लोबिया को फायदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा सब्जियों की पत्तेदार फसल, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, बंद गोभी को भी नुकसान संभव है। इनमें फफूंदी जनित रोग ब्लाइट, एंथ्रिक्नोज, डंडीगलन, पत्ती धब्बा हो सकते हैं। नुकसान से बचने के लिए किसानों को जलनिकासी के इंतजाम करने चाहिए।
विज्ञापन
जुलाई और अगस्त में इस बार अच्छी बारिश हुई। इसका फायदा धान के साथ मूंगफली, बाजरा, मक्का और कपास जैसी फसलों को मिला। ज्यादातर हिस्सों में धान की फसल अच्छी हुई है, मगर शनिवार और रविवार को तेज हवा के साथ हुई बारिश की वजह से अगेती फसल खेतों में बिछ गई। अत्याधिक बारिश होने की वजह से पानी भी खेतों में भरा हुआ है। ऐसे में जिस फसल में बालियां निकल आईं हैं वहां दाना काला पड़ने की आशंका है। गिरने की वजह से गन्ने की बढ़वार भी प्रभावित होगी।
विज्ञापन
मनकरा गांव के किसान त्रिवेनी लाल ने बताया कि उन्होंने चार बीघा में धान की रोपाई की थी। फसल गिरने की वजह से दाना काना पड़ जाएगा। ऐसे में बाजार में इसकी ब्रिकी में कठिनाई आएगी। इसी गांव के ऐवरन गंगवार ने बताया कि 10 बीघे में लगाई गई फसल प्रभावित हुई है। आने वाले दिनों में अगर फिर से बारिश होती है तो नुकसान का दायरा और बढ़ेगा।
विज्ञापन
बातचीत:
दो एकड़ में धान की फसल लगाई थी। बारिश में पूरी फसल खेत में बिछ गई। अब उत्पादन घटने की आशंका है। - जीवन लाल, बसई
पांच बीघा में धान और तीन बीघा में गन्ना बोया था। बारिश में पूरी फसल खेतों में बिछ गई। धान का दाना काला पड़ने से उसकी ब्रिकी में कठिनाई आएगी। गन्ने की बढ़वार भी प्रभावित होगी। - कैशोराम, बसई
पेठा की फसल लगाई थी। रविवार को हुई बारिश से लाक जमीन पर गिर गया। पानी भरने से यह सड़ने लगी है। लागत निकलना तक मुश्किल है। - बुंदन बेग, शेखापुर
धान की शरबती किस्म की रोपाई की थी। करीब 30 बीघा में धान लगा हुआ था। तेज हवा के साथ पानी बरसने की वजह से पूरी फसल खेत में बिछ गई। - राजेंद्र प्रसाद, खतौला
नुकसान से बचने के लिए करें जलनिकासी
आईवीआरआई स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक भारी बारिश से खेतों में जलभराव है। लिहाजा, गन्ना गिरने की आशंका है। किसानों को तत्काल गिरी हुई फसल खड़ा कर बांध देना चाहिए। अगेती धान, तिल की फसल में अब अंकुर निकलने लगे हैं, इसलिए पानी से बाली में दाना कम भरेगा। जिन खेत में बाली निकलने लगी हैं वहां फसल गिरने की संभावना ज्यादा है। हालांकि, चरी, मक्का, लोबिया को फायदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा सब्जियों की पत्तेदार फसल, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, बंद गोभी को भी नुकसान संभव है। इनमें फफूंदी जनित रोग ब्लाइट, एंथ्रिक्नोज, डंडीगलन, पत्ती धब्बा हो सकते हैं। नुकसान से बचने के लिए किसानों को जलनिकासी के इंतजाम करने चाहिए।