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अब क्राइम ब्रांच करेगी सेना भर्ती में फर्जीवाड़े की जांच
बरेली
Updated Tue, 13 Jan 2015 01:35 AM IST
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सेना में फर्जी निवास और शैक्षिक प्रमाण पत्रों से भर्ती होने के मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना कैंट थाने से हटा दी गई है। अब यह जांच क्राइम ब्रांच की जघन्य अपराध शाखा (एचसीयू) को सौंपी गई है।
अगस्त में हुई सेना भर्ती में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ युवकों ने लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं और बरेली जिलों से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवा लिए थे। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें ट्रेनिंग पर भेजे जाने की तैयारी चल रही थी। सेना भर्ती बोर्ड के निदेशक कर्नल राजीव दीक्षित ने 29 दिसंबर की रात 11 युवकों को पकड़कर कैंट पुलिस के हवाले कर दिया था। इन पर फर्जी निवास और शैक्षिक प्रमाण पत्रों से सेना में भर्ती होने का आरोप था। 12 के खिलाफ कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पकड़े गए युवकों को तो पुलिस ने जेल भेज दिया था। एक की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पाई है। अमर उजाला ने फर्जी भर्ती कराने वाले मेरठ के आदेश गूजर गैंग का खुलासा भी कर दिया, लेकिन कैंट पुलिस ने गिरोह के सरगना को पकड़ने और केस की विवेचना करने से हाथ खड़े कर दिए थे। इंस्पेक्टर कैंट रामवीर सिंह यादव के अनुरोध पर एसएसपी ने इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच की जघंन्य अपराध शाखा को ट्रांसफर कर दी है।
एचसीयू में पेडिंग हैं 72 विवेचनाएं
क्राइम ब्रांच की जिस जघन्य अपराध शाखा में सेना में फर्जी भर्ती मामले की जांच ट्रांसफर की गई है। उसमें पहले से ही 19 मर्डर, एक मुठभेड़, 17 आईटी एक्ट और 35 धोखाधड़ी के मुकदमों की विवेचनाएं लंबित हैं। इनकी विवेचना के लिए नौ इंस्पेक्टर और छह सब इंस्पेक्टर लगे हुए हैं।
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कोट
विवेचना का आदेश हमारी यूनिट पर आ गया है। अब केस डायरी मंगाकर उसका अवलोकन किया जाएगा। इसके बाद टीम युवकों के दिए गए नाम पते तस्दीक करने भेजी जाएगी।
-इंस्पेक्टर राजीव शर्मा, प्रभारी, जघन्य अपराध शाखा
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अगस्त में हुई सेना भर्ती में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ युवकों ने लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं और बरेली जिलों से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवा लिए थे। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें ट्रेनिंग पर भेजे जाने की तैयारी चल रही थी। सेना भर्ती बोर्ड के निदेशक कर्नल राजीव दीक्षित ने 29 दिसंबर की रात 11 युवकों को पकड़कर कैंट पुलिस के हवाले कर दिया था। इन पर फर्जी निवास और शैक्षिक प्रमाण पत्रों से सेना में भर्ती होने का आरोप था। 12 के खिलाफ कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पकड़े गए युवकों को तो पुलिस ने जेल भेज दिया था। एक की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पाई है। अमर उजाला ने फर्जी भर्ती कराने वाले मेरठ के आदेश गूजर गैंग का खुलासा भी कर दिया, लेकिन कैंट पुलिस ने गिरोह के सरगना को पकड़ने और केस की विवेचना करने से हाथ खड़े कर दिए थे। इंस्पेक्टर कैंट रामवीर सिंह यादव के अनुरोध पर एसएसपी ने इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच की जघंन्य अपराध शाखा को ट्रांसफर कर दी है।
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एचसीयू में पेडिंग हैं 72 विवेचनाएं
क्राइम ब्रांच की जिस जघन्य अपराध शाखा में सेना में फर्जी भर्ती मामले की जांच ट्रांसफर की गई है। उसमें पहले से ही 19 मर्डर, एक मुठभेड़, 17 आईटी एक्ट और 35 धोखाधड़ी के मुकदमों की विवेचनाएं लंबित हैं। इनकी विवेचना के लिए नौ इंस्पेक्टर और छह सब इंस्पेक्टर लगे हुए हैं।
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विवेचना का आदेश हमारी यूनिट पर आ गया है। अब केस डायरी मंगाकर उसका अवलोकन किया जाएगा। इसके बाद टीम युवकों के दिए गए नाम पते तस्दीक करने भेजी जाएगी।
-इंस्पेक्टर राजीव शर्मा, प्रभारी, जघन्य अपराध शाखा