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Bareilly News: सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ीं, निजी पर निर्भरता ज्यादा

Sat, 29 Mar 2025 02:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 29 Mar 2025 02:31 AM IST
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Facilities increased in government hospitals, dependence on private hospitals increased
बरेली। इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सेवाओं के बाबत छह देशों में किए गए अध्ययन में दावा किया गया है कि भारत में सरकारी सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन निजी अस्पतालों पर मरीज निर्भर हैं, क्योंकि सरकारी स्तर पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल कम हैं। चिकित्सा संबंधी जागरूकता की कमी से ज्यादातर मरीज निजी एंबुलेंस या दलालों के भरोसे रहते हैं। जबकि छह देशों के सापेक्ष स्वास्थ्य क्षेत्र पर भारत में सबसे ज्यादा बजट खर्च होने का पता चला।
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ये अध्ययन भारत, जापान, फिलिपिंस, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम देश में इमरजेंसी और ट्राॅमा सेवा पर किया गया है। प्रत्येक देश के तीन-तीन विशेषज्ञ शामिल रहे। भारत से एम्स नई दिल्ली, एम्स जोधपुर, एमआरएमएस मेडिकल कॉलेज, बरेली से एक-एक विशेषज्ञ शामिल रहे। अध्ययन में शामिल रहे एसआरएमएस के इमरजेंसी मेडिसन, ट्रॉमा विशेषज्ञ डॉ. हर्षित अग्रवाल, देश के पहले एमसीएच ट्रॉमा सर्जन हैं।
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डॉ. हर्षित के मुताबिक विषय के तहत सरकारी, निजी अस्पतालों में अस्पताल पहुंचने से पहले (प्री) और डिस्चार्ज के बाद (पोस्ट) हॉस्पिटल केयर को आंका। दोनों में ही भारत अन्य देशों के मुकाबले पीछे रहा। इसकी वजह थी कि दुर्घटनाग्रस्त या अचानक तबीयत बिगड़ने पर मरीज को शुरुआती घंटे में बेहतर स्वास्थ्य सेवा नहीं मिलती। सड़क दुर्घटना के मामले में लोग पुलिस को भी सूचना देने से बचते हैं। फर्स्ट रिस्पॉन्डर अगर सक्रिय हो तो घायल के जान का संकट कम हो जाए।
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ऋषिकेश एम्स में ही हेलीकॉप्टर एंबुलेंस सर्विस
डॉ. हर्षित के मुताबिक गोल्डन ऑवर के आकलन में भारत में सिर्फ उत्तराखंड के ऋषिकेश एम्स में दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर एंबुलेंस सर्विस है। अन्य किसी राज्य में ये सुविधा नहीं है। हालांकि, ये भी करीब डेढ़ सौ किमी दूरी तक सीमित है। जापान में एयरलिफ्ट, हेलीकॉप्टर एंबुलेंस की सुविधा होने से दुर्घटना होने के 20 मिनट में मरीज अस्पताल पहुंच जाता है।




मरीजों के पोस्ट रिहैबिलिटेशन पर भी प्रश्नचिह्न
अध्ययन के अनुसार भारत में पोस्ट रिहैबिलिटेशन के प्रति लोगों में जागरूकता कम है। डॉ. हर्षित के मुताबिक कई बार घायल की जान बचाने के लिए प्रभावित अंग हटाए जाते हैं। इससे मानसिक तनाव होता है। वहीं, डिस्चार्ज के बाद मरीजों को एक्सरसाइज, दवा सेवन समेत अन्य परामर्श दिए जाते हैं। इनके अनुपालन में भी अनदेखी होती है। सरकारी स्तर पर रिहैबिलिटेशन की सुविधा कुछ ही अस्पतालों में है। ब्यूरो

इन बिंदुओं पर ध्यान देने की जरूरत
- गुड समारिटन, पोस्ट रिहैबिलिटेशन के प्रति जनजागरूकता।
- बेहतर चिकित्सा संबंधी जानकारी, सीपीआर प्रशिक्षण मिले।
- बतौर फर्स्ट रिस्पॉन्डर घायल को अस्पताल तक पहुंचाएं।
- निजी एंबुलेंस और झोलाछापों का प्रभावी निगरानी तंत्र बने।
- मानसिक तनाव से निजात के लिए प्रभावी काउंसलिंग हो।
- जनसंख्या नियंत्रण, परिवार नियोजन में जन भागीदारी व अन्य।
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