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Bareilly News: कागजों में कवायद, ठोस पहल नदारद

Wed, 09 Aug 2023 02:49 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Wed, 09 Aug 2023 02:49 AM IST
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Exercise in papers, concrete initiative missing
बरेली। बढ़ती आबादी के सापेक्ष स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए वर्ष 2013 में तीन सौ बेड स्थापना की कवायद शुरू हुई थी। सात साल बाद वर्ष 2020 में पहली बार सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के लिए मानव संसाधन (स्टाफ) मांगा गया। तीन साल बाद अब कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। न तो सुपर स्पेशियलिटी के लिए स्टाफ मिला, न ही कैंसर इंस्टीट्यूट के प्रस्ताव पर विचार हुआ। दोनों मामले शासन में अटके हैं। जिले के अफसरों और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस पहल भी नहीं हो रही।
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कोरोना महामारी हावी होने पर संक्रमित को क्वारंटीन और एल-1 इलाज सुविधा मुहैया कराने के लिए जिलाधिकारी ने तीन सौ बेड अस्तपाल का अधिग्रहण किया था। मगर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी रही। लिहाजा, तत्कालीन सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने शासन को प्रस्ताव भेजकर 52 विशेषज्ञ डॉक्टर और तीन सौ से ज्यादा सहायक व अन्य स्टाफ की मांग की थी। वर्ष 2022 सितंबर-अक्तूबर में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने जिले का दौरा किया था। तब अस्पताल संचालन के लिए तत्कालीन कमिश्नर संयुक्ता समददार से प्रस्ताव भेजने को कहा था।
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तब वर्ष 2020 में तैयार विशेषज्ञ डॉक्टरों की मांग का प्रस्ताव ही दोबारा शासन को भेजा गया। बताते हैं कि प्रस्ताव नियुक्ति विभाग तक पहुंचा। वहां से कोई ठोस पहल अब तक नहीं हो सकी। फिर मई, 2023 में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने रूहेलखंड क्षेत्र में कैंसर इंस्टीट्यूट स्थापना के लिए तीन सौ बेड अस्पताल परिसर का प्रस्ताव भेजा। सीएमओ से रिपोर्ट मांगी गई पर अभी तक सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
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प्रस्ताव में शामिल रहे विशेषज्ञ, पैरामेडिकल अन्य स्टाफ
दो नेफ्रालॉजिस्ट, दो न्यूरो फिजिशियन, दो यूरो सर्जन, दो न्यूरो सर्जन, तीन हृदय रोग विशेषज्ञ, तीन ईएनटी सर्जन, तीन चेस्ट फिजिशियन, चार नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं सर्जन, चार बाल रोग विशेषज्ञ, चार रेडियोलॉजिस्ट, छह स्त्री रोग विशेषज्ञ की मांग की गई थी। साथ ही, 30 फार्मासिस्ट, 12 लैब टेक्नीशियन, पांच रेडियोग्राफर, तीन ईसीजी टेक्नीशियन, दो फिजियोथेरेपिस्ट, 70 वार्ड ब्वॉय, चार ईएमओ, 65 स्वीपर मांगे थे।
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आखिर क्यों...
वर्ष 2013 में बनना शुरू हुआ था अस्पताल, अब तक 90 फीसदी ही काम पूरा
10 साल में 78 करोड़ रुपये भवन निर्माण में खर्च हो चुके मगर फायदा कुछ नहीं
28 करोड़ के अत्याधुनिक उपकरण ताले में बंद हैं लेकिन इलाज में उपयोग नहीं
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