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Bareilly News: अभियान के बाद भी बंद नहीं हुई अनफिट व अनधिकृत ऑटो, ई-रिक्शा की दौड़
Tue, 15 Apr 2025 01:59 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 15 Apr 2025 01:59 AM IST
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बरेली। मुख्यमंत्री के आदेश पर परिवहन विभाग अनधिकृत ऑटो व ई-रिक्शा के खिलाफ अभियान चला रहा है, पर हकीकत यह है कि इन पर नकेल नहीं कस पा रही है। अनधिकृत और अनफिट ऑटो, ई-रिक्शा भी सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। शहर में सात हजार से ज्यादा ई-रिक्शा पंजीकरण के बिना ही सवारियां ढो रहे हैं। काफी ऐसे ई-रिक्शा भी दौड़ रहे हैं जो खटारा हो चुके हैं। दस दिनों के अभियान में परिवहन विभाग महज 120 अनधिकृत ई-रिक्शा को सीज कर सका है। 280 से ज्यादा का चालान किया गया है।
अनधिकृत ऑटो और ई-रिक्शा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए चुनौती साबित हो रहे हैं। मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक जाम का सबसे बड़ा कारण यही हैं। चालक गली-कूंचों, चौराहों, तिराहों कहीं पर भी ई-रिक्शा को रोककर सवारियों को बैठाने-उतारने लगते हैं। इससे हादसों का खतरा भी बना रहता है। शहर में दौड़ रहे 35 फीसदी से ज्यादा ऑटो, ई-रिक्शा की फिटनेस खत्म हो चुकी है। इससे परिवहन विभाग को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
स्टैंड बनाए, लेकिन किसी काम न आए
शहर में ऑटो, ई-रिक्शा के अस्थायी ठहराव के लिए 48 स्थानों पर स्टैंड भी बनाए गए हैं, लेकिन ये किसी काम नहीं आ रहे हैं। जिन स्थानों पर स्टैंड बनाए गए थे, वहां ठेले-खोमचे लगते हैं। ऑटो, ई-रिक्शा सड़कों पर बेरोकटोक सवारियां बैठाते-उतारते हैं।
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परमिट की जरूरत नहीं, मामूली पंजीकरण शुल्क से बढ़ रही संख्या
पेट्रोल और सीएनजी ऑटो के मुकाबले ई-रिक्शा की बिक्री कई गुना हो रही है। ऑटो बनाने वाली कई नामी कंपनियों ने भी ई-रिक्शा, ई-ऑटो बाजार में उतार दिए हैं। दरअसल, ई-वाहनों के पंजीकरण का शुल्क मामूली है। इसके लिए किसी परमिट की जरूरत नहीं होती और टैक्स भी न के बराबर है। साथ ही, सब्सिडी भी मिलती है। ऐसे में ई-रिक्शा की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
वर्जन
अनधिकृत और अनफिट ऑटो, ई-रिक्शा के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। तीन दिन अवकाश के कारण अभियान की गति कुछ धीमी हुई है। मंगलवार से अभियान फिर से गति पकड़ेगा।- दिनेश कुमार सिंह, आरटीओ प्रशासन
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अनधिकृत ऑटो और ई-रिक्शा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए चुनौती साबित हो रहे हैं। मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक जाम का सबसे बड़ा कारण यही हैं। चालक गली-कूंचों, चौराहों, तिराहों कहीं पर भी ई-रिक्शा को रोककर सवारियों को बैठाने-उतारने लगते हैं। इससे हादसों का खतरा भी बना रहता है। शहर में दौड़ रहे 35 फीसदी से ज्यादा ऑटो, ई-रिक्शा की फिटनेस खत्म हो चुकी है। इससे परिवहन विभाग को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
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स्टैंड बनाए, लेकिन किसी काम न आए
शहर में ऑटो, ई-रिक्शा के अस्थायी ठहराव के लिए 48 स्थानों पर स्टैंड भी बनाए गए हैं, लेकिन ये किसी काम नहीं आ रहे हैं। जिन स्थानों पर स्टैंड बनाए गए थे, वहां ठेले-खोमचे लगते हैं। ऑटो, ई-रिक्शा सड़कों पर बेरोकटोक सवारियां बैठाते-उतारते हैं।
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परमिट की जरूरत नहीं, मामूली पंजीकरण शुल्क से बढ़ रही संख्या
पेट्रोल और सीएनजी ऑटो के मुकाबले ई-रिक्शा की बिक्री कई गुना हो रही है। ऑटो बनाने वाली कई नामी कंपनियों ने भी ई-रिक्शा, ई-ऑटो बाजार में उतार दिए हैं। दरअसल, ई-वाहनों के पंजीकरण का शुल्क मामूली है। इसके लिए किसी परमिट की जरूरत नहीं होती और टैक्स भी न के बराबर है। साथ ही, सब्सिडी भी मिलती है। ऐसे में ई-रिक्शा की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
वर्जन
अनधिकृत और अनफिट ऑटो, ई-रिक्शा के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। तीन दिन अवकाश के कारण अभियान की गति कुछ धीमी हुई है। मंगलवार से अभियान फिर से गति पकड़ेगा।- दिनेश कुमार सिंह, आरटीओ प्रशासन