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चार अप्रैल तक मांगा जर्जर सड़कों का एस्टीमेट
बरेली।
Updated Fri, 31 Mar 2017 01:16 AM IST
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Estimates of shabby roads sought till April 4
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के 15 जून तक हर सड़क गड्ढामुक्त करने के फरमान पर अमल शुरू हो गया है। शासन ने पीडब्ल्यूडी से चार अप्रैल तक जर्जर मार्गों का एस्टीमेट मांगा है। शासनादेश मिलते ही हरकत में आए पीडब्ल्यूडी एक्सईएन ने 3077 किलोमीटर ग्रामीण संपर्क मार्गोँ की सूची तैयार कर एई और जेई से चार दिन में सर्वे पूरा कर तीन अप्रैल तक एस्टीमेट बनाकर प्रस्तुत करने को कहा है। एई और जेई को एस्टीमेट बनाने के लिए शासन से निर्धारित प्रोफार्मा भी बांट दिया गया है।
पीडब्ल्यूडी से शासन ने पूछा है कि बरेली में कितनी सड़कें जर्जर और गड्ढायुक्त हैं। इनकी मरम्मत और नवीनीकरण के लिए कितने बजट की जरूरत होगी। यहां एक स्टेट हाइवे बरेली-बदायूं मार्ग है जो पिछली सपा सरकार में ही बनकर पूर्ण हो चुका है। तीन प्रमुख जिला मार्ग बलिया-शीशगढ़, भमौरा, आंवला-रामनगर मार्ग और बरेली-बीसलपुर मार्ग भी सपा सरकार में ही बन चुके हैं। ये मार्ग गड्ढामुक्त हैं। सबसे ज्यादा खस्ता हालत ग्रामीण संपर्क मार्गोँ की है। 3077 किलोमीटर लंबाई के ग्रामीण संपर्क मार्ग हैं। इनमें 40 फीसदी से ज्यादा जर्जर और गड्ढायुक्त हैं। सर्वाधिक खराब स्थित नवाबगंज, बहेड़ी, शीशगढ़, मीरगंज, आंवला, फरीदपुर के ग्रामीण संपर्क मार्गों की है। पीडब्ल्यूडी के प्रोफार्मा में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए जर्जर मार्गों को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में सामान्य मरम्मत, दूसरी श्रेणी में सुदृढ़ीकरण और तीसरे श्रेणी में विशेष मरम्मत वाले मार्ग रखे गए हैं। उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को जोड़ने वाला बहेड़ी-रुद्रपुर मार्ग, बहेड़ी-बजरिया मार्ग और बहेड़ी-मुड़िया नबी बख्श मार्गों को विशेष मरम्मत की श्रेणी में रखज्ञ ग्रूज्ञ है। इसके लिए सामान्य मरम्मत से अधिक बजट की जरूरत होगी।
ये विभाग भी देंगे एस्टीमेट
पीडब्ल्यूडी के अलावा पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड भवन, मंडी परिषद, आरईएस, गन्ना विकास परिषद, जिला पंचायत, बरेली विकास प्राधिकरण, नगर निगम, सिंचाई, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को भी अपनी जर्जर सड़कों का एस्टीमेट चार अप्रैल से पहले पीडब्ल्यूडी को देना होगा। पीडब्ल्यूडी को इन विभागों का नोडल बनाया गया है।
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प्रत्येक सड़क को 15 जून तक गड्ढामुक्त करने के लिए चार अप्रैल तक एस्टीमेट मांगा गया है। एई और जेई को खराब सड़कों का सर्वे कर तीन अप्रैल तक एस्टीमेट सौंपने को कहा गया है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले काम में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संजीव भारद्वाज, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड
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पीडब्ल्यूडी से शासन ने पूछा है कि बरेली में कितनी सड़कें जर्जर और गड्ढायुक्त हैं। इनकी मरम्मत और नवीनीकरण के लिए कितने बजट की जरूरत होगी। यहां एक स्टेट हाइवे बरेली-बदायूं मार्ग है जो पिछली सपा सरकार में ही बनकर पूर्ण हो चुका है। तीन प्रमुख जिला मार्ग बलिया-शीशगढ़, भमौरा, आंवला-रामनगर मार्ग और बरेली-बीसलपुर मार्ग भी सपा सरकार में ही बन चुके हैं। ये मार्ग गड्ढामुक्त हैं। सबसे ज्यादा खस्ता हालत ग्रामीण संपर्क मार्गोँ की है। 3077 किलोमीटर लंबाई के ग्रामीण संपर्क मार्ग हैं। इनमें 40 फीसदी से ज्यादा जर्जर और गड्ढायुक्त हैं। सर्वाधिक खराब स्थित नवाबगंज, बहेड़ी, शीशगढ़, मीरगंज, आंवला, फरीदपुर के ग्रामीण संपर्क मार्गों की है। पीडब्ल्यूडी के प्रोफार्मा में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए जर्जर मार्गों को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में सामान्य मरम्मत, दूसरी श्रेणी में सुदृढ़ीकरण और तीसरे श्रेणी में विशेष मरम्मत वाले मार्ग रखे गए हैं। उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को जोड़ने वाला बहेड़ी-रुद्रपुर मार्ग, बहेड़ी-बजरिया मार्ग और बहेड़ी-मुड़िया नबी बख्श मार्गों को विशेष मरम्मत की श्रेणी में रखज्ञ ग्रूज्ञ है। इसके लिए सामान्य मरम्मत से अधिक बजट की जरूरत होगी।
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ये विभाग भी देंगे एस्टीमेट
पीडब्ल्यूडी के अलावा पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड भवन, मंडी परिषद, आरईएस, गन्ना विकास परिषद, जिला पंचायत, बरेली विकास प्राधिकरण, नगर निगम, सिंचाई, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को भी अपनी जर्जर सड़कों का एस्टीमेट चार अप्रैल से पहले पीडब्ल्यूडी को देना होगा। पीडब्ल्यूडी को इन विभागों का नोडल बनाया गया है।
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प्रत्येक सड़क को 15 जून तक गड्ढामुक्त करने के लिए चार अप्रैल तक एस्टीमेट मांगा गया है। एई और जेई को खराब सड़कों का सर्वे कर तीन अप्रैल तक एस्टीमेट सौंपने को कहा गया है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले काम में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संजीव भारद्वाज, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड