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भावनाओं का प्रबंधन और सामाजिक कौशल विद्यार्थियों के लिए आवश्यक : तिवारी
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आईसीएआर-आईवीआरआई में वैल्यू एडेड कोर्स ज्ञानशाला का शुभारंभ हुआ
बरेली। आत्म-जागरूकता, भावनाओं का प्रबंधन, आत्म-प्रेरणा, सहानुभूति और सामाजिक कौशल छात्र-छात्राओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन्हें केवल सैद्धांतिक न मानकर व्यावहारिक जीवन और कार्यस्थल पर सफलता के प्रभावी उपकरण के रूप में लें। ये बातें संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. रूपसी तिवारी ने इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईवीआरआई) में सॉफ्ट स्किल्स फॉर पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषय पर वैल्यू एडेड कोर्स ज्ञानशाला के शुभारंभ के दौरान मंगलवार को कहीं।
डॉ. तिवारी ने छात्र-छात्राओं को अपने भावनात्मक व्यवहार और प्रतिक्रियाओं पर चिंतन करने हेतु प्रेरित किया ताकि मानसिक दृढ़ता, आत्म-प्रबंधन, सामाजिक जागरूकता और संबंध प्रबंधन में दक्ष बना जा सके। उन्होंने कहा कि इन कौशलों का विकास न केवल पेशेवर सफलता बल्कि संतुलित जीवन के लिए भी आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार किसी व्यक्ति की नौकरी में सफलता का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा उसके सॉफ्ट स्किल्स और व्यावहारिक कौशल पर निर्भर करता है। मात्र 15 प्रतिशत हिस्सा तकनीकी ज्ञान पर आधारित होता है। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में छात्र-छात्राओं के लिए आइस-ब्रेकिंग एक्टिविटीज जैसे फिश एंड फिशरमैन और तत्परता पर आधारित एक खेल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का समन्वयन वैज्ञानिक डॉ. श्रुति ने किया। एसीटीओ वीर सिंह और वरिष्ठ तकनीकी सहायक सूरज ने सहयोग किया। ब्यूरो
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बरेली। आत्म-जागरूकता, भावनाओं का प्रबंधन, आत्म-प्रेरणा, सहानुभूति और सामाजिक कौशल छात्र-छात्राओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन्हें केवल सैद्धांतिक न मानकर व्यावहारिक जीवन और कार्यस्थल पर सफलता के प्रभावी उपकरण के रूप में लें। ये बातें संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. रूपसी तिवारी ने इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईवीआरआई) में सॉफ्ट स्किल्स फॉर पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषय पर वैल्यू एडेड कोर्स ज्ञानशाला के शुभारंभ के दौरान मंगलवार को कहीं।
डॉ. तिवारी ने छात्र-छात्राओं को अपने भावनात्मक व्यवहार और प्रतिक्रियाओं पर चिंतन करने हेतु प्रेरित किया ताकि मानसिक दृढ़ता, आत्म-प्रबंधन, सामाजिक जागरूकता और संबंध प्रबंधन में दक्ष बना जा सके। उन्होंने कहा कि इन कौशलों का विकास न केवल पेशेवर सफलता बल्कि संतुलित जीवन के लिए भी आवश्यक है।
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उन्होंने बताया कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार किसी व्यक्ति की नौकरी में सफलता का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा उसके सॉफ्ट स्किल्स और व्यावहारिक कौशल पर निर्भर करता है। मात्र 15 प्रतिशत हिस्सा तकनीकी ज्ञान पर आधारित होता है। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में छात्र-छात्राओं के लिए आइस-ब्रेकिंग एक्टिविटीज जैसे फिश एंड फिशरमैन और तत्परता पर आधारित एक खेल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का समन्वयन वैज्ञानिक डॉ. श्रुति ने किया। एसीटीओ वीर सिंह और वरिष्ठ तकनीकी सहायक सूरज ने सहयोग किया। ब्यूरो
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