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बच्चे दीवार गंदी करते हैं तो करने दो
बरेली
Updated Tue, 24 Mar 2015 01:30 AM IST
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दीवार खराब करने वाले बच्चे आगे चलकर क्या बनेंगे, इसका अंदाजा मां बाप को नहीं हो सकता। लेकिन यह सच है कि ये बच्चे अपने जीवन में सफल जरूर होंगे। इसलिए अगर बच्चे दीवार गंदी करते हैं तो करने दो। उन्हें अपनी जिज्ञासा को उड़ेलने दें। मां बाप का दायित्व है कि इस जिज्ञासा को शांत करे। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के कुलपति प्रो. रविकांत ने एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के चौथे दीक्षांत समारोह में यह बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चे में जितनी जिज्ञासा होगी उतने ही नए विचार और अविष्कार हाेंगे। प्रो. रविकांत ने खेल, योग और मरीज-डॉक्टर रिश्ताें के बारे में भी बताया।
प्रो. रविकांत ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आप अकेले काम नहीं कर रहे हैं। इसमें पूरा समाज शामिल है। इसलिए जरूरी है कि चिकित्सक और मरीज का रिश्ता अच्छा हो। मेडिकल छात्राें को उन्होंने बताया कि वे ‘ध्यान और योगा’ पर केंद्रित रहें। अपना मार्निंग एजेंडा बनाए और उसका पालन करें। छात्राें से कहा कि हर काम की अपनी प्रतिष्ठा होती है। उसमें सफलता तभी मिलती है कठोर परिश्रम किया जाए। गांधी जी भी सफाई से सिलाई का सारा काम खुद करते थे। उन्होंने बताया कि क्षमा, उपकार और धन्यवाद ऐसे शब्द है जिसे हर छात्र को अपनाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि रूहेलखंड विवि के कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन ने मेडिकल छात्राें को गांव में काम करने को प्रेरित किया। उन्हाेंने नैनो तकनीक से आने वाले समय में इलाज के बारे में बताया। रिसर्च के छात्राें को अपने यहां आमंत्रित करते हुए प्रो. हुसैन यह कहना नहीं भूले कि युवा चिकित्सकाें को मरीजाें से अदब से बात करना बहुत जरूरी है। एसआरएमएस के चेयरमैन देव मूर्ति ने भावी चिकित्सकों को बधाई दी और चिकित्सा क्षेत्र में मन लगाकर काम करने की सीख भी दी।
छात्राओं का जलवा
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प्रो. रविकांत ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आप अकेले काम नहीं कर रहे हैं। इसमें पूरा समाज शामिल है। इसलिए जरूरी है कि चिकित्सक और मरीज का रिश्ता अच्छा हो। मेडिकल छात्राें को उन्होंने बताया कि वे ‘ध्यान और योगा’ पर केंद्रित रहें। अपना मार्निंग एजेंडा बनाए और उसका पालन करें। छात्राें से कहा कि हर काम की अपनी प्रतिष्ठा होती है। उसमें सफलता तभी मिलती है कठोर परिश्रम किया जाए। गांधी जी भी सफाई से सिलाई का सारा काम खुद करते थे। उन्होंने बताया कि क्षमा, उपकार और धन्यवाद ऐसे शब्द है जिसे हर छात्र को अपनाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि रूहेलखंड विवि के कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन ने मेडिकल छात्राें को गांव में काम करने को प्रेरित किया। उन्हाेंने नैनो तकनीक से आने वाले समय में इलाज के बारे में बताया। रिसर्च के छात्राें को अपने यहां आमंत्रित करते हुए प्रो. हुसैन यह कहना नहीं भूले कि युवा चिकित्सकाें को मरीजाें से अदब से बात करना बहुत जरूरी है। एसआरएमएस के चेयरमैन देव मूर्ति ने भावी चिकित्सकों को बधाई दी और चिकित्सा क्षेत्र में मन लगाकर काम करने की सीख भी दी।
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छात्राओं का जलवा
दीक्षांत समारोह में 64 एमबीबीएस और 25 पीजी छात्राें को डिग्री दी गई। 2009 बैच की एमबीबीएस की डॉ. शुभि अग्रवाल को गोल्ड मेडल और नगद धनराशि से सम्मानित किया गया। एमबीबीएस की श्रुति कुमारी और श्वेतिमा चौधरी को स्वर्ण पदक और पूर्णिमा खनोटिया को रजत पदक मिला। लुबना जरीन को बेस्ट आलराउंडर समेत दो अन्य पदक भी मिले। छात्राें को केजीएमयू कुलपति प्रो. रविकांत, रूहेलखंड विवि कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन, चेयरमैन देव मूर्ति ने सम्मानित कि या। इस दौरान आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, रिचा मूर्ति, श्यामल गुप्ता, सुभाष मेहरा के साथ फैकल्टी, छात्र व अभिभावक उपस्थित रहे।
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