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न्यूट्रिनो में ढूंढेंगे ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्य
बरेली
Updated Mon, 02 Mar 2015 12:44 AM IST
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देश में जल्द ही न्यूट्रिनो कणों की खोज और अध्ययन का काम शुरू होगा। इसके लिए तमिलनाडु में भूमिगत प्रयोगशाला बनाई जा रही है। परमाणु ऊर्जा विभाग और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग वाली इस परियोजना में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) समेत देश के कई संस्थान, विश्वविद्यालय और आईआईटी शामिल हैं। माना जा रहा है कि न्यूट्रिनो कणों के अध्ययन से ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्य उजागर करने में मदद मिलेगी।
बरेली कॉलेज में प्रदर्शनी लगाने आए बार्क के पब्लिक अवेयरनेस सेक्शन के हेड आरके सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो कणों के अध्ययन और शोध के लिए तमिलनाडु के पोट्टीपुरम में 12 सौ मीटर ऊंचे चट्टानी पहाड़ों के नीचे विश्वस्तरीय प्रयोगशाला बनाई जाएगी। इसमें एक बड़ी और कई छोटी गुफाएं होंगी। इसमें 1900 मीटर लंबी और साढ़े सात मीटर चौड़ी सुरंग होगी और उसमें 50 किलो टन की मैग्नेट लगाकर न्यूट्रिनो का पता लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि न्यूट्रिनो पर मूलभूत अनुसंधान के लिए बनी 1500 करोड़ रुपये लागत की इस परियोजना को भारत सरकार ने अनुमति दे दी है। इसमें देश के 60 संस्थानों-विश्वविद्यालयों के लगभग साढ़े तीन सौ वैज्ञानिक काम करेंगे। उन्होंने बताया कि भाभा के वैज्ञानिकों ने लंबे शोध के बाद पाया है कि उत्पत्ति के समय न्यूट्रिनो कण मौजूद थे। इन कणों के गहन अध्ययन से ब्रह्मांड का रहस्य पता लगने की संभावना है।
इंसेट...
क्या है न्यूट्रिनो
यह आवेशरहित नया कण है इसका पता सबसे पहले 1930 में लगा था और इसका प्रथम सैद्धांतिक आधार 1934 में सामने आया। 1952 में लगाए गए अनुमान में इसका भार इलेक्ट्रान के भार के 0.05 प्रतिशत से भी कम पाया गया।
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थोरियम से बनाएंगे यूरेनियम
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बरेली कॉलेज में प्रदर्शनी लगाने आए बार्क के पब्लिक अवेयरनेस सेक्शन के हेड आरके सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो कणों के अध्ययन और शोध के लिए तमिलनाडु के पोट्टीपुरम में 12 सौ मीटर ऊंचे चट्टानी पहाड़ों के नीचे विश्वस्तरीय प्रयोगशाला बनाई जाएगी। इसमें एक बड़ी और कई छोटी गुफाएं होंगी। इसमें 1900 मीटर लंबी और साढ़े सात मीटर चौड़ी सुरंग होगी और उसमें 50 किलो टन की मैग्नेट लगाकर न्यूट्रिनो का पता लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि न्यूट्रिनो पर मूलभूत अनुसंधान के लिए बनी 1500 करोड़ रुपये लागत की इस परियोजना को भारत सरकार ने अनुमति दे दी है। इसमें देश के 60 संस्थानों-विश्वविद्यालयों के लगभग साढ़े तीन सौ वैज्ञानिक काम करेंगे। उन्होंने बताया कि भाभा के वैज्ञानिकों ने लंबे शोध के बाद पाया है कि उत्पत्ति के समय न्यूट्रिनो कण मौजूद थे। इन कणों के गहन अध्ययन से ब्रह्मांड का रहस्य पता लगने की संभावना है।
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क्या है न्यूट्रिनो
यह आवेशरहित नया कण है इसका पता सबसे पहले 1930 में लगा था और इसका प्रथम सैद्धांतिक आधार 1934 में सामने आया। 1952 में लगाए गए अनुमान में इसका भार इलेक्ट्रान के भार के 0.05 प्रतिशत से भी कम पाया गया।
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थोरियम से बनाएंगे यूरेनियम
केरल और उड़ीसा जैसे राज्यों में समुद्रों के किनारे पाई जाने वाली बालू से थोरियम हासिल करके भाभा उसको यूरेनियम में बदलने पर काम कर रहा है। आरके सिंह ने बताया कि भारत को यूरेनियम का आयात फ्रांस और रूस से करना होता है इसलिए थोरियम से यूरेनियम बनने के बाद भविष्य में दूसरे देशों पर निर्भरता भी खत्म होगी और जरूरत के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा एनर्जी बनाई जा सकेगी।