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बरेली कॉलेज- प्रशासन का रुख पलटने से पूर्णिमा आहत, आज कमिश्नर से मिलेंगी
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बरेली। अखबारों के जरिये अपने प्रत्यावेदन को कमिश्नर के स्तर पर खारिज कर दिए जाने जैसी खबरों से बरेली कॉलेज में प्राचार्य पद की दावेदार डॉ. पूर्णिमा अनिल आहत हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक कमिश्नर की ओर से अपने प्रत्यावेदन का कोई जवाब नहीं मिला है। अब वह बुधवार को कमिश्नर से मिलकर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करेंगी।
बरेली कॉलेज की प्रबंध समिति के सचिव देवमूर्ति के आदेश पर पिछले महीने डॉ. अनुराग मोहन को नया प्राचार्य बनाए जाने के बाद डॉ. पूर्णिमा अनिल ने इस फैसले को चुनौती दी थी। डॉ. पूर्णिमा ने डॉ. अनुराग को प्राचार्य पद का चार्ज सौंपने वाले पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा के बाद खुद को सबसे वरिष्ठ बताते हुए प्राचार्य पद पर दावा किया था। उन्होंने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश, कमिश्नर एवं बोर्ड ऑफ कंट्रोल के पदेन अध्यक्ष रणवीर प्रसाद, तत्कालीन डीएम और प्रबंध समिति के पदेन अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह के साथ कुलपति डॉ. अनिल शुक्ल को प्रत्यावेदन दिया था।
तत्कालीन डीएम ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को इस प्रकरण की जांच सौंपी थी और फिर उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन की नियुक्ति को अवैध बताते हुए अपनी रिपोर्ट कमिश्नर को भेज दी थी। कमिश्नर की ओर से भी डॉ. अनुराग मोहन की नियुक्ति को विधिक रूप से शून्य करार देते हुए आदेश जारी किया था और इसकी प्रति कुलपति को भी भेज दी गई थी। साथ ही डीएम को इस मामले में प्रबंध समिति की बैठक बुलाकर नए प्राचार्य की नियुक्ति करने का भी निर्देश दे दिया था। इसी बीच जिले में डीएम बदल गए।
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नए डीएम ने दोबारा प्रकरण की जांच कराने के बाद निर्णय लेने के लिए बोर्ड ऑफ कंट्रोल को सक्षम माना और दोबारा यह मामला कमिश्नर को भेज दिया। इसके बाद यह प्रकरण जहां के तहां थम गया। अब कमिश्नर ने साफ कर दिया है कि इस मामले में उनके स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अचानक बदले घटनाक्रम से प्राचार्य पद की दावेदार डॉ. पूर्णिमा अनिल हतप्रभ हैं। उनका कहना है कि उनके प्रत्यावेदन का विधिक रूप से अब तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। बुधवार को वह खुद कमिश्नर से मिलकर इस बारे में स्थिति स्पष्ट करेंगी।
कमिश्नर ने कहा- शासन को लिख चुके हैं कंट्रोलर तैनात करने के लिए
कमिश्नर रणवीर प्रसाद का कहना है कि बरेली कॉलेज में प्रबंध समिति के विवादित होने के बाद शासन को वहां कंट्रोलर तैनात करने के लिए लिखा जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रबंध समिति में नए सदस्यों की अवैध नियुक्ति की गई है। इससे पहले बाईलॉज में संशोधन किया जाना था और इसकी पूर्व सूचना शासन को भी भेजी जानी थी मगर ऐसा नहीं किया गया। अब इस मामले में हाईकोर्ट का स्थगनादेश है। उन्होंने कहा कि जहां तक बोर्ड ऑफ कंट्रोल की बैठक न बुलाए जाने का सवाल है, इस संबंध में सदस्य कोई शिकायत करेंगे तो उस पर निर्णय लिया जाएगा।
उच्च शिक्षा अधिकारी को बनाया गया था अंतरिम सचिव, स्टे से लटका मामला
बरेली कॉलेज में प्रबंध समिति को लेकर विवाद होने के बाद प्रशासन के अफसरों ने उसे भंग मानते हुए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को अंतरिम सचिव बना दिया था लेकिन सचिव देवमूर्ति इसके बाद हाईकोर्ट चले गए और वहां से स्थिति को जस का तस रखने का आदेश जारी कर दिया गया। इस प्रकरण में पिछले महीने तारीख पड़ी थी लेकिन सुनवाई नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक सुनवाई की अगली तारीख भी अभी नियत नहीं हुई है।
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बरेली कॉलेज की प्रबंध समिति के सचिव देवमूर्ति के आदेश पर पिछले महीने डॉ. अनुराग मोहन को नया प्राचार्य बनाए जाने के बाद डॉ. पूर्णिमा अनिल ने इस फैसले को चुनौती दी थी। डॉ. पूर्णिमा ने डॉ. अनुराग को प्राचार्य पद का चार्ज सौंपने वाले पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा के बाद खुद को सबसे वरिष्ठ बताते हुए प्राचार्य पद पर दावा किया था। उन्होंने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश, कमिश्नर एवं बोर्ड ऑफ कंट्रोल के पदेन अध्यक्ष रणवीर प्रसाद, तत्कालीन डीएम और प्रबंध समिति के पदेन अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह के साथ कुलपति डॉ. अनिल शुक्ल को प्रत्यावेदन दिया था।
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तत्कालीन डीएम ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को इस प्रकरण की जांच सौंपी थी और फिर उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन की नियुक्ति को अवैध बताते हुए अपनी रिपोर्ट कमिश्नर को भेज दी थी। कमिश्नर की ओर से भी डॉ. अनुराग मोहन की नियुक्ति को विधिक रूप से शून्य करार देते हुए आदेश जारी किया था और इसकी प्रति कुलपति को भी भेज दी गई थी। साथ ही डीएम को इस मामले में प्रबंध समिति की बैठक बुलाकर नए प्राचार्य की नियुक्ति करने का भी निर्देश दे दिया था। इसी बीच जिले में डीएम बदल गए।
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नए डीएम ने दोबारा प्रकरण की जांच कराने के बाद निर्णय लेने के लिए बोर्ड ऑफ कंट्रोल को सक्षम माना और दोबारा यह मामला कमिश्नर को भेज दिया। इसके बाद यह प्रकरण जहां के तहां थम गया। अब कमिश्नर ने साफ कर दिया है कि इस मामले में उनके स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अचानक बदले घटनाक्रम से प्राचार्य पद की दावेदार डॉ. पूर्णिमा अनिल हतप्रभ हैं। उनका कहना है कि उनके प्रत्यावेदन का विधिक रूप से अब तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। बुधवार को वह खुद कमिश्नर से मिलकर इस बारे में स्थिति स्पष्ट करेंगी।
कमिश्नर ने कहा- शासन को लिख चुके हैं कंट्रोलर तैनात करने के लिए
कमिश्नर रणवीर प्रसाद का कहना है कि बरेली कॉलेज में प्रबंध समिति के विवादित होने के बाद शासन को वहां कंट्रोलर तैनात करने के लिए लिखा जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रबंध समिति में नए सदस्यों की अवैध नियुक्ति की गई है। इससे पहले बाईलॉज में संशोधन किया जाना था और इसकी पूर्व सूचना शासन को भी भेजी जानी थी मगर ऐसा नहीं किया गया। अब इस मामले में हाईकोर्ट का स्थगनादेश है। उन्होंने कहा कि जहां तक बोर्ड ऑफ कंट्रोल की बैठक न बुलाए जाने का सवाल है, इस संबंध में सदस्य कोई शिकायत करेंगे तो उस पर निर्णय लिया जाएगा।
उच्च शिक्षा अधिकारी को बनाया गया था अंतरिम सचिव, स्टे से लटका मामला
बरेली कॉलेज में प्रबंध समिति को लेकर विवाद होने के बाद प्रशासन के अफसरों ने उसे भंग मानते हुए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को अंतरिम सचिव बना दिया था लेकिन सचिव देवमूर्ति इसके बाद हाईकोर्ट चले गए और वहां से स्थिति को जस का तस रखने का आदेश जारी कर दिया गया। इस प्रकरण में पिछले महीने तारीख पड़ी थी लेकिन सुनवाई नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक सुनवाई की अगली तारीख भी अभी नियत नहीं हुई है।