{"_id":"5dcdaed28ebc3e54fd32dc1c","slug":"education-bareilly-news-bly384040235","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘वरिष्ठतम शिक्षक नहीं डॉ. अनुराग, नियुक्ति विधिक रूप से शून्य’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘वरिष्ठतम शिक्षक नहीं डॉ. अनुराग, नियुक्ति विधिक रूप से शून्य’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- विश्वविद्यालय पहुंचा कमिश्नर का पत्र, प्राचार्य के तौर पर किए पत्राचार पर भी उठे सवाल
विज्ञापन
- डीएम ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को बुलाकर समझा मामला, परीक्षण के दिए निर्देश
बरेली। बरेली कॉलेज में प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन की तैनाती के संबंध में कमिश्नर एवं बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद का पत्र रुहेलखंड विश्वविद्यालय भी पहुंच चुका है, जिसमें कहा गया है कि प्राचार्य पद पर वरिष्ठतम शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है, यह विधिक रूप से शून्य प्रतीत होती है। वहीं डीएम नितीश कुमार ने बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश को बुलाकर बरेली कॉलेज प्रकरण में जांच की और दोनों पक्षों के दस्तावेज उन्हें सौंपते हुए मामले का परीक्षण करने को कहा।
बरेली कॉलेज में डॉ. पूर्णिमा अनिल ने खुद को वरिष्ठ बताते हुए प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन की तैनाती को चुनौती दी है। तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की जांच के बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने मामले का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट मौजूदा डीएम नितीश कुमार को भेजी, जिसमें कहा गया कि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी की आख्या के मुताबिक विश्वविद्यालय परिनियमावली के अनुसार प्रबंध समिति स्थापन्न प्राचार्य की नियुक्ति कर सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि प्राचार्य के सेवानिवृत्त होने पर किसी वरिष्ठतम शिक्षक की प्राचार्य पद पर विधिवत नियुक्ति नहीं की गई है। चार अक्तूबर को जारी सचिव के पत्र से नियुक्ति विधिक रूप से शून्य प्रतीत होती है।
विज्ञापन
कमिश्नर के इस पत्र की कॉपी विश्वविद्यालय को भेजी गई है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन असमंजस की स्थिति में है। क्योंकि इसमें डॉ. अनुराग मोहन की तैनाती को ही शून्य बता दिया गया है कि विश्वविद्यालय से सभी पत्राचार वही कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर डीएम नितीश कुमार ने डॉ. पूर्णिमा अनिल और देवमूर्ति का प्रत्यावेदन देखने के बाद बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश को बुलाकर बरेली कॉलेज प्रकरण पर चर्चा की। बताया जाता है कि डीएम दोनों ही पक्षों की बात को लेकर संतुष्ट नहीं हैं इसलिए उन्होंने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से इसका परीक्षण करने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कमिश्नर का पत्र मिला है, जिसमें बरेली कॉलेज में प्राचार्य की तैनाती शून्य प्रतीत होने की बात कही गई है। बरेली कॉलेज में प्राचार्य का निर्णय बोर्ड ऑफ कंट्रोल लेगा, वही निर्णय विश्वविद्यालय में भी मान्य होगा।
- प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति
दोनों पक्षों से जो प्रत्यावेदन मिला है, उसमें उन्होंने अपने-अपने पक्ष की बातें कही हैं। तथ्यों में भिन्नता है इसलिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से दोनों प्रत्यावेदन और तथ्यों का परीक्षण करने को कहा गया है। - नितीश कुमार, डीएम
विज्ञापन
- डीएम ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को बुलाकर समझा मामला, परीक्षण के दिए निर्देश बरेली। बरेली कॉलेज में प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन की तैनाती के संबंध में कमिश्नर एवं बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद का पत्र रुहेलखंड विश्वविद्यालय भी पहुंच चुका है, जिसमें कहा गया है कि प्राचार्य पद पर वरिष्ठतम शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है, यह विधिक रूप से शून्य प्रतीत होती है। वहीं डीएम नितीश कुमार ने बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश को बुलाकर बरेली कॉलेज प्रकरण में जांच की और दोनों पक्षों के दस्तावेज उन्हें सौंपते हुए मामले का परीक्षण करने को कहा।
बरेली कॉलेज में डॉ. पूर्णिमा अनिल ने खुद को वरिष्ठ बताते हुए प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन की तैनाती को चुनौती दी है। तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की जांच के बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने मामले का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट मौजूदा डीएम नितीश कुमार को भेजी, जिसमें कहा गया कि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी की आख्या के मुताबिक विश्वविद्यालय परिनियमावली के अनुसार प्रबंध समिति स्थापन्न प्राचार्य की नियुक्ति कर सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि प्राचार्य के सेवानिवृत्त होने पर किसी वरिष्ठतम शिक्षक की प्राचार्य पद पर विधिवत नियुक्ति नहीं की गई है। चार अक्तूबर को जारी सचिव के पत्र से नियुक्ति विधिक रूप से शून्य प्रतीत होती है।
विज्ञापन
कमिश्नर के इस पत्र की कॉपी विश्वविद्यालय को भेजी गई है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन असमंजस की स्थिति में है। क्योंकि इसमें डॉ. अनुराग मोहन की तैनाती को ही शून्य बता दिया गया है कि विश्वविद्यालय से सभी पत्राचार वही कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर डीएम नितीश कुमार ने डॉ. पूर्णिमा अनिल और देवमूर्ति का प्रत्यावेदन देखने के बाद बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश को बुलाकर बरेली कॉलेज प्रकरण पर चर्चा की। बताया जाता है कि डीएम दोनों ही पक्षों की बात को लेकर संतुष्ट नहीं हैं इसलिए उन्होंने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से इसका परीक्षण करने को कहा है।
विज्ञापन
कमिश्नर का पत्र मिला है, जिसमें बरेली कॉलेज में प्राचार्य की तैनाती शून्य प्रतीत होने की बात कही गई है। बरेली कॉलेज में प्राचार्य का निर्णय बोर्ड ऑफ कंट्रोल लेगा, वही निर्णय विश्वविद्यालय में भी मान्य होगा।
- प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति
दोनों पक्षों से जो प्रत्यावेदन मिला है, उसमें उन्होंने अपने-अपने पक्ष की बातें कही हैं। तथ्यों में भिन्नता है इसलिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से दोनों प्रत्यावेदन और तथ्यों का परीक्षण करने को कहा गया है। - नितीश कुमार, डीएम