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प्राचार्य जी! जालसाजों पर आप इतने रहमदिल तभी तो उत्तर भारतीयों पर सवाल उठ रहे हैं
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बरेली। उत्तर भारतीयों को अयोग्य करार देने पर हल्ला तो मचा हुआ है लेकिन शिक्षण संस्थानों का हाल फिर भी कोई देखने को तैयार नहीं है। बरेली कॉलेज में एलएलबी में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के जरिये खुद को दिव्यांग बताकर एडमिशन लेने वाले छात्रों की जालसाजी खुलने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। 15 दिन पहले सीएमओ की रिपोर्ट आने के बाद यह मामला कई दिन तक प्राचार्य और मुख्य प्रवेश नियंत्रक के बीच फुटबाल बना रहा। अब सोमवार को इस प्रकरण में फैसला लेने के लिए बैठक बुलाई गई तो ऐन मौके पर प्राचार्य छुट्टी चले गए।
आसपास के तमाम जिलों के सबसे बड़े और नामचीन बरेली कॉलेज में इस तरह फर्जीवाड़े अब कोई नई बात नहीं रह गए हैं। एलएलबी में तो एडमिशन और मेरिट तय होने से लेकर परीक्षाओं तक में गड़बड़ी के तमाम मामले सामने आ चुके हैं। अब पिछले दिनों एलएलबी की ही प्रवेश प्रक्रिया के दौरान फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट लगाकर एडमिशन ले लेने का मामला चर्चा में है। यह जालसाजी करने वाले छात्रों ने खुद को दिव्यांग साबित कर भारांक हासिल करने के लिए अपने दाखिले के आवेदन के साथ मेडिकल सर्टिफिकेट लगाए थे। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया तो कॉलेज प्रशासन ने 30 छात्रों के मेडिकल सर्टिफिकेट जांच के लिए सीएमओ को भेज दिए। इस जांच में नौ छात्रों के मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। सीएमओ की जांच रिपोर्ट भी करीब 15 दिन पहले बरेली कॉलेज पहुंच गई।
प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा ने सीएमओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य प्रवेश नियंत्रक डॉ. अनुराग मोहन को जांच कर प्रवेश निरस्त करने का निर्देश दिया। डॉ. अनुराग मोहन की जांच में पाया कि एलएलबी में तीन छात्रों ने फर्जी सर्टिफिकेट से भारांक हासिल करके एडमिशन लिया है। बाकी छह छात्र भारांक मिलने के बावजूद मेरिट लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने इसकी रिपोर्ट प्राचार्य को सौंप दी। एडमिशन निरस्त करने की बात आई तो प्राचार्य और मुख्य प्रवेश नियंत्रक के बीच इसे एक-दूसरे का कार्यक्षेत्र साबित करने की होड़ शुरू हो गई। न मुख्य प्रवेश नियंत्रक कार्रवाई करने को तैयार हुए न प्राचार्य, लिहाजा एडमिशन निरस्त नहीं हुए हैं। आखिरकार इस प्रकरण पर निर्णय लेने लिए सोमवार को बैठक बुलाई गई लेकिन सोमवार को ही प्राचार्य 19 सितंबर तक के लिए अवकाश पर चले गए।
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एलएलबी के छात्रों के आगे हमेशा बैकफुट
बरेली कॉलेज एलएलबी के छात्रों पर खास मेहरबान है। 2018 के छात्रों ने नकल के विरोध पर अग्रसेन डिग्री कॉलेज में जमकर उत्पात मचाया था। इस पर विश्वविद्यालय की टीम को वहां बैठकर परीक्षा करानी पड़ी। वर्ष 2019 की परीक्षा में इनका परीक्षा केंद्र बरेली कॉलेज में ही बना दिया गया। इस दौरान नकलची तो पकड़े गए लेकिन उनमें बरेली कॉलेज का कोई भी छात्र नहीं था।
वरिष्ठता के विवाद पर भी कोई फैसला नहीं
बरेली कॉलेज में शिक्षकों की वरिष्ठता पर भी गोलमाल चल रहा है। यहां जुलाई 2017 और जुलाई 2018 में तैयार की गई शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में बड़ा अंतर है। जुलाई 2017 की सूची में जो शिक्षक ऊपरी पायदान पर हैं, वे जुलाई 2018 की सूची में नीचे खिसक गए हैं। ऐसे में जब जुलाई 2018 की वरिष्ठता सूची लागू की जाएगी तो तीन-चार विभागाध्यक्षों को हटना पड़ेगा। इसको लेकर हाईकोर्ट तक मामला पहुंच गया है लेकिन प्राचार्य अब तक इसे लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा सके हैं।
एलएलबी में फर्जी सर्टिफिकेट से एडमिशन को लेकर होने वाली किसी बैठक की मुझे जानकारी नहीं है। फिलहाल प्राचार्य अवकाश पर हैं, लौटकर वही इस पर निर्णय लेंगे। - डॉ. पूर्णिमा अनिल, कार्यवाहक प्राचार्य
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आसपास के तमाम जिलों के सबसे बड़े और नामचीन बरेली कॉलेज में इस तरह फर्जीवाड़े अब कोई नई बात नहीं रह गए हैं। एलएलबी में तो एडमिशन और मेरिट तय होने से लेकर परीक्षाओं तक में गड़बड़ी के तमाम मामले सामने आ चुके हैं। अब पिछले दिनों एलएलबी की ही प्रवेश प्रक्रिया के दौरान फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट लगाकर एडमिशन ले लेने का मामला चर्चा में है। यह जालसाजी करने वाले छात्रों ने खुद को दिव्यांग साबित कर भारांक हासिल करने के लिए अपने दाखिले के आवेदन के साथ मेडिकल सर्टिफिकेट लगाए थे। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया तो कॉलेज प्रशासन ने 30 छात्रों के मेडिकल सर्टिफिकेट जांच के लिए सीएमओ को भेज दिए। इस जांच में नौ छात्रों के मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। सीएमओ की जांच रिपोर्ट भी करीब 15 दिन पहले बरेली कॉलेज पहुंच गई।
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प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा ने सीएमओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य प्रवेश नियंत्रक डॉ. अनुराग मोहन को जांच कर प्रवेश निरस्त करने का निर्देश दिया। डॉ. अनुराग मोहन की जांच में पाया कि एलएलबी में तीन छात्रों ने फर्जी सर्टिफिकेट से भारांक हासिल करके एडमिशन लिया है। बाकी छह छात्र भारांक मिलने के बावजूद मेरिट लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने इसकी रिपोर्ट प्राचार्य को सौंप दी। एडमिशन निरस्त करने की बात आई तो प्राचार्य और मुख्य प्रवेश नियंत्रक के बीच इसे एक-दूसरे का कार्यक्षेत्र साबित करने की होड़ शुरू हो गई। न मुख्य प्रवेश नियंत्रक कार्रवाई करने को तैयार हुए न प्राचार्य, लिहाजा एडमिशन निरस्त नहीं हुए हैं। आखिरकार इस प्रकरण पर निर्णय लेने लिए सोमवार को बैठक बुलाई गई लेकिन सोमवार को ही प्राचार्य 19 सितंबर तक के लिए अवकाश पर चले गए।
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एलएलबी के छात्रों के आगे हमेशा बैकफुट
बरेली कॉलेज एलएलबी के छात्रों पर खास मेहरबान है। 2018 के छात्रों ने नकल के विरोध पर अग्रसेन डिग्री कॉलेज में जमकर उत्पात मचाया था। इस पर विश्वविद्यालय की टीम को वहां बैठकर परीक्षा करानी पड़ी। वर्ष 2019 की परीक्षा में इनका परीक्षा केंद्र बरेली कॉलेज में ही बना दिया गया। इस दौरान नकलची तो पकड़े गए लेकिन उनमें बरेली कॉलेज का कोई भी छात्र नहीं था।
वरिष्ठता के विवाद पर भी कोई फैसला नहीं
बरेली कॉलेज में शिक्षकों की वरिष्ठता पर भी गोलमाल चल रहा है। यहां जुलाई 2017 और जुलाई 2018 में तैयार की गई शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में बड़ा अंतर है। जुलाई 2017 की सूची में जो शिक्षक ऊपरी पायदान पर हैं, वे जुलाई 2018 की सूची में नीचे खिसक गए हैं। ऐसे में जब जुलाई 2018 की वरिष्ठता सूची लागू की जाएगी तो तीन-चार विभागाध्यक्षों को हटना पड़ेगा। इसको लेकर हाईकोर्ट तक मामला पहुंच गया है लेकिन प्राचार्य अब तक इसे लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा सके हैं।
एलएलबी में फर्जी सर्टिफिकेट से एडमिशन को लेकर होने वाली किसी बैठक की मुझे जानकारी नहीं है। फिलहाल प्राचार्य अवकाश पर हैं, लौटकर वही इस पर निर्णय लेंगे। - डॉ. पूर्णिमा अनिल, कार्यवाहक प्राचार्य