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विश्वविद्यालय में नंबर घोटाला सालों से परीक्षा विभाग में जमे कर्मचारी अब आएंगे लपेटे में
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बरेली। मूल्यांकन में धांधली के मामले में एक-एक करते परतें उधड़ती जा रही हैं। जांच कमेटी ने अवार्ड शीट और मूल्यांकन चार्ट के मिलान की बात कही तो विश्वविद्यालय में सेटिंग कर सालों से परीक्षा और गोपनीय विभाग में जमे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। कहा जा रहा है कि इस मिलान से बड़ी गड़बड़ी सामने आने की आशंका है ऐसे में इस आदेश को रुकवाने के लिए जोर लगाया जा रहा है।
पिछले दिनों विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय में हंगामा कर तीन कर्मचारियों पर मूल्यांकन में धांधली के आरोप लगाए थे। कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए प्रो. एके जैतली की निगरानी में कमेटी बना दी। जांच में सामने आया कि बीएससी के करीब तीन दर्जन छात्र-छात्राओं को 40-46 तक अंक दिए गए हैं, जबकि उन्होंने सिर्फ 2-5 अंक मिलने भर को लिखा था। अब इन सभी को औसत अंक देने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही एजेंसी अवार्ड शीट और मूल्यांकन चार्ट का मिलान करने की तैयारी कर रही है कि अन्य कितने छात्रों के नंबर में गड़बड़ी की गई है। हालांकि जांच कमेटी ने अभी अवार्ड शीट और मूल्यांकन चार्ट की मांग नहीं की है, लेकिन इसको लेकर विश्वविद्यालय कर्मियों में हड़कंप है। बताया जाता है कि परीक्षा और गोपनीय विभाग में कुछ कर्मचारी करीब 20 साल से जमे हैं। अगर यह जांच हो गई तो उनमें से कुछ फंस सकते हैं, जिसके चलते वे इस कोशिश में लगे हैं कि अवार्ड शीट और मूल्यांकन चार्ट के मिलान का आदेश न हो।
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पिछले दिनों विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय में हंगामा कर तीन कर्मचारियों पर मूल्यांकन में धांधली के आरोप लगाए थे। कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए प्रो. एके जैतली की निगरानी में कमेटी बना दी। जांच में सामने आया कि बीएससी के करीब तीन दर्जन छात्र-छात्राओं को 40-46 तक अंक दिए गए हैं, जबकि उन्होंने सिर्फ 2-5 अंक मिलने भर को लिखा था। अब इन सभी को औसत अंक देने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही एजेंसी अवार्ड शीट और मूल्यांकन चार्ट का मिलान करने की तैयारी कर रही है कि अन्य कितने छात्रों के नंबर में गड़बड़ी की गई है। हालांकि जांच कमेटी ने अभी अवार्ड शीट और मूल्यांकन चार्ट की मांग नहीं की है, लेकिन इसको लेकर विश्वविद्यालय कर्मियों में हड़कंप है। बताया जाता है कि परीक्षा और गोपनीय विभाग में कुछ कर्मचारी करीब 20 साल से जमे हैं। अगर यह जांच हो गई तो उनमें से कुछ फंस सकते हैं, जिसके चलते वे इस कोशिश में लगे हैं कि अवार्ड शीट और मूल्यांकन चार्ट के मिलान का आदेश न हो।
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