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अब महिला अस्पताल स्टाफ की संवेदनहीनता की शिकार हुई मासूम
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बरेली। महिला अस्पताल में डॉक्टरों ने अधूरा इलाज करके दुष्कर्म की शिकार तीन साल की मासूम से पीछा छुड़ा लिया। मजबूरी में खेती-किसानी करने वाला उसका परिवार उसे एक प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचा तो वहां भी उसे पांच दिन भर्ती रखकर 40 हजार रुपये तो झटक लिए गए, लेकिन बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। अस्पताल का बिल भरने के लिए परिवार की 15 बीघा जमीन भी गिरवी चली गई। अब एक तरफ यह परिवार दो जून की रोटी के लिए मोहताज हो गया है तो दूसरी तरफ बच्ची की हालत बिगड़ती जा रही है। बुधवार को बच्ची की मां उसे अपनी गोद में लेकर मदद की आस में जिला प्रोबेशन अधिकारी के पास पहुंची तो उन्होंने फोन पर महिला अस्पताल की सीएमएस से बात कर बच्ची को दोबारा भर्ती करने का अनुरोध किया है।
तीन साल की मासूम से 12 मई को अपने ही ताऊ की हैवानियत का शिकार हुई थी। लहूलुहान बच्ची को गंभीर हालत में महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्ची की मां के मुताबिक महिला अस्पताल में उनकी बेटी 12 से 23 मई तक यानी दस दिन भर्ती रही। बच्ची के पूरी तरह ठीक होने से पहले ही अस्पताल स्टाफ ने उसे घर ले जाने को कह दिया। कुछ ही दिन बाद बच्ची की हालत फिर बिगड़ने लगी। 20 जून को उसकी हालत ज्यादा खराब हुई तो उसे बरेली लाकर सतीपुर चौराहे के पास एक अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस अस्पताल में पांच दिन इलाज के बाद डॉक्टरों ने उनके पति को 40 हजार रुपये का बिल थमा दिया और बच्ची को भी ले जाने को कह दिया।
बच्ची की मां ने प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवार को बताया उनके पति के पास इतना पैसा नहीं था, इसलिए मजबूरी में उन्हें अपनी 15 बीघा जमीन गिरवी रखनी पड़ी। तब कहीं अस्पताल का बिल चुकाया और बच्ची को दोबारा घर ले गए। दो-तीन दिन पहले बच्ची की हालत फिर बिगड़ने लगी। अब उसके इलाज के लिए पैसा भी नहीं था। इसी वजह से बच्ची की मां उसे कंधे पर लेकर बुधवार को कलक्ट्रेट में जिला प्रोबेशन अधिकारी के पास पहुंची और उन्हें आपबीती बताई। मां की गोद में यूरिनल बैग लगाए बच्ची दर्द से कराह रही थी। बच्ची की हालत देख प्रोबेशन अधिकारी ने महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा से बात कर उनसे बच्ची को एडमिट करने का आग्रह किया। बाद में इसके लिए लिखित पत्र भी महिला अस्पताल भिजवा दिया।
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सीएमएस बोलीं- घरवालों की गलती से हुआ होगा इन्फेक्शन
दुष्कर्म पीड़ित बच्ची के ठीक न हो पाने के लिए महिला सीएमएस डॉ. अलका शर्मा उसके घरवालों की ही गलती बता रही हैं। उनका कहना है कि इस बच्ची की ठीकठाक देखभाल हुई थी। उसे ब्लड चढ़ाने के साथ जरूरी दवाएं भी दी गईं थीं। हो सकता है कि बच्ची के घरवालों ने दवा का ठीक इस्तेमाल न किया हो। उन्होंने बताया कि प्रोबेशन अधिकारी से सूचना मिलने के बाद बच्ची को फिर एडमिट कर उसका इलाज किया जाएगा।
मैंने इस संबंध में महिला अस्पताल की सीएमएस से बात की है। पीड़ित बच्ची को उसकी मां लेकर दफ्तर आई थी। बच्ची का समुचित इलाज कराया जाएगा। - नीता अहिरवार, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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तीन साल की मासूम से 12 मई को अपने ही ताऊ की हैवानियत का शिकार हुई थी। लहूलुहान बच्ची को गंभीर हालत में महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्ची की मां के मुताबिक महिला अस्पताल में उनकी बेटी 12 से 23 मई तक यानी दस दिन भर्ती रही। बच्ची के पूरी तरह ठीक होने से पहले ही अस्पताल स्टाफ ने उसे घर ले जाने को कह दिया। कुछ ही दिन बाद बच्ची की हालत फिर बिगड़ने लगी। 20 जून को उसकी हालत ज्यादा खराब हुई तो उसे बरेली लाकर सतीपुर चौराहे के पास एक अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस अस्पताल में पांच दिन इलाज के बाद डॉक्टरों ने उनके पति को 40 हजार रुपये का बिल थमा दिया और बच्ची को भी ले जाने को कह दिया।
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बच्ची की मां ने प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवार को बताया उनके पति के पास इतना पैसा नहीं था, इसलिए मजबूरी में उन्हें अपनी 15 बीघा जमीन गिरवी रखनी पड़ी। तब कहीं अस्पताल का बिल चुकाया और बच्ची को दोबारा घर ले गए। दो-तीन दिन पहले बच्ची की हालत फिर बिगड़ने लगी। अब उसके इलाज के लिए पैसा भी नहीं था। इसी वजह से बच्ची की मां उसे कंधे पर लेकर बुधवार को कलक्ट्रेट में जिला प्रोबेशन अधिकारी के पास पहुंची और उन्हें आपबीती बताई। मां की गोद में यूरिनल बैग लगाए बच्ची दर्द से कराह रही थी। बच्ची की हालत देख प्रोबेशन अधिकारी ने महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा से बात कर उनसे बच्ची को एडमिट करने का आग्रह किया। बाद में इसके लिए लिखित पत्र भी महिला अस्पताल भिजवा दिया।
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सीएमएस बोलीं- घरवालों की गलती से हुआ होगा इन्फेक्शन
दुष्कर्म पीड़ित बच्ची के ठीक न हो पाने के लिए महिला सीएमएस डॉ. अलका शर्मा उसके घरवालों की ही गलती बता रही हैं। उनका कहना है कि इस बच्ची की ठीकठाक देखभाल हुई थी। उसे ब्लड चढ़ाने के साथ जरूरी दवाएं भी दी गईं थीं। हो सकता है कि बच्ची के घरवालों ने दवा का ठीक इस्तेमाल न किया हो। उन्होंने बताया कि प्रोबेशन अधिकारी से सूचना मिलने के बाद बच्ची को फिर एडमिट कर उसका इलाज किया जाएगा।
मैंने इस संबंध में महिला अस्पताल की सीएमएस से बात की है। पीड़ित बच्ची को उसकी मां लेकर दफ्तर आई थी। बच्ची का समुचित इलाज कराया जाएगा। - नीता अहिरवार, जिला प्रोबेशन अधिकारी