UP: बरेली में उत्तराखंड के वरिष्ठ पीसीएस अफसर के आवास पर ईडी का छापा, घोटाले से जुड़ा है मामला
बरेली में ईडी की टीम ने उत्तराखंड के वरिष्ठ पीसीएस अफसर दिनेश प्रताप सिंह के आवास पर छापा मारा। पांच गाड़ियों से ईडी की टीम आई। आवास के अंदर दोपहर तीन बजे तक जांच जारी रही।
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उत्तराखंड के डोईवाला चीनी मिल के अधिशासी निदेशक वरिष्ठ पीसीएस अफसर दिनेश प्रताप सिंह के बरेली इंटरनेशनल सिटी स्थित आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का छापा पड़ा है। उत्तराखंड के भूमि अधिग्रहण घोटाले मामले में इनके खिलाफ जांच चल रही है। दिनेश प्रताप की पत्नी अलका सिंह कांग्रेस के टिकट पर बिथरी चैनपुर सीट से विधायक प्रत्याशी रही हैं। बृहस्पतिवार को छापा पड़ने की सूचना से अफसर समेत राजनीतिक खेमे में हलचल मच गई।
सुबह करीब नौ बजे ईडी की टीम पांच गाड़ियों से उनके आवास पर पहुंची। घर पर कोई मौजूद नहीं था। टीम ने गेट का ताला तोड़कर प्रवेश किया और मुख्य द्वार का कुंडा भी निकाल दिया। फिर क्रमवार लॉकर को तोड़कर जांच शुरू की। दोपहर तीन बजे तक टीम की जांच जारी रही। अभी तक क्या रहा, इसपर मीडिया से कोई जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया।
पत्नी अलका के चुनाव में कालाधन खपाए जाने की आशंका
पीसीएस अफसर दिनेश प्रताप सिंह की पत्नी अलका सिंह वर्ष 2022 में बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं। इससे पूर्व वह भारतीय जनता पार्टी में थीं। चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। कांग्रेस ने उन्हें चुनावी मैदान में उतरने का अवसर दिया था। आशंका है कि इस चुनाव में अवैध रूप से कमाए गए धन को खपाया गया। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम चुनाव में हुए खर्च का आकलन कर रही है। दस्तावेजों को बारीकी से खंगाला जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, चुनावी खर्च में गड़बड़ी पाई गई तो ईडी अपनी जांच का दायरा बढ़ा सकती है। कुछ सफेदपोशों तक भी जांच की आंच पहुंच सकती है। बताया जा रहा है कि इनकी बेटी अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रही है। इसका वार्षिक खर्च 20 लाख रुपये से अधिक आंका जा रहा है। फिलहाल, बरेली के इंटरनेशनल सिटी में स्थित उनका आवास कई दिन से खाली है। फिलहाल, परिवार से इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। इस संबंध में अलका सिंह का पक्ष जानने की कोशिश की गई, पर उनका फोन स्विचऑफ होने के कारण संपर्क नहीं हो सका।
नवंबर 2017 में गए थे जेल
जानकारी के मुताबिक, दिनेश प्रताप सिंह राष्ट्रीय राजमार्ग-74 भूमि अधिग्रहण घोटाले में मुख्य आरोपी रहे हैं। वर्ष 2011 से 2016 के बीच गदरपुर और आसपास की कृषि भूमि को गैर कृषि दिखाकर मुआवजे में डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक का खेल किया। नवंबर 2017 में एसआईटी ने उनको गिरफ्तार कर जेल भेजा था, हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा हुए। ईडी की टीम अब चल-अचल संपत्तियां खंगाल रही है।