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Bareilly News: बहगुल नदी पर पुल न होने से 70 गांवों की आबादी को किनारा नहीं

Thu, 06 Mar 2025 02:29 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 06 Mar 2025 02:29 AM IST
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Due to lack of bridge on Bahgul river, the population of 70 villages has no shore
बरेली। हसनगंज के रहने वाले पृथ्वीराज के बच्चे की बुधवार को तबीयत बिगड़ गई। फरीदपुर विकास खंड में टिसुआ और हसनगंज के बीच बहगुल नदी पर कोई पुल नहीं है। टिुसआ जाने के लिए उनके पास दो ही रास्ते थे। एक तो वह अपनी बाइक से 40 किलोमीटर घूमकर जाते या नाव पर सवार होकर खतरा मोल लेते हुए उस पार पहुंचते। समय कम था, इसलिए उन्होंने नाव से जाना ही ठीक समझा। बाइक को नाव में लादने के साथ ही बच्चे और पत्नी के साथ खुद भी सवार हो गए। इसके बाद उन्होंने पतवार भी संभाली। यह मामला तो महज एक उदाहरण है।
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नदी के इस पार बसे न जाने कितने लोगों को रोजाना इस तरह की समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। बता दें, नदी के इस पर बसे 70 गांवों की करीब डेढ़ लाख की आबादी पुल न होने से परेशान है। पिछले वित्तीय वर्ष में सेतु निगम ने आठ पुलों के साथ ही एक आरओबी का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए 231 करोड़ रुपये मांगे थे, लेकिन यह प्रस्ताव अभी हवा में ही तैर रहा है। बुधवार को पड़ताल की गई तो पता लगा कि शासन से मंजूरी में देरी होने की वजह से लोग जोखिम झेल रहे है।
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मीरगंज में फतेहगंज पश्चिमी व दिवना के बीच दिजोड़ा नदी, नवाबगंज के भदपुरा क्षेत्र में नकटपुर और नहरखेड़ा के बीच पनधोली नदी और फरीदपुर के पास नगरिया कला सेहरापुख्ता के बीच रामगंगा नदी पर सेतु न होने की वजह से लोग दिक्कत झेल रहे हैं। इसी तरह से बरेली के गौसगंज तराई-कपरिया मार्ग पर नकटिया नदी पर सेतु, खुदागंज फरीदपुर मार्ग पर चठिया गोसाई व बकैनिया के बीच बहगुल नदी, मीरगंज में रेतीपुर-परचवां के बीच भाखड़ा नदी पर पुल नहीं है। मंजूरी न मिलने की वजह से जुगाड़ के पुल और नाव से लोग नदी पार कर रहे हैं। वहीं मीरगंज में भिटौरा-बहेड़ी मार्ग पर रेलवे क्रॉसिंग 371 बी पर आरओबी न बनने की वजह से लोग जाम झेल रहे हैं।
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बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की दवाई के लिए जुगाड़ का पुल ही सहारा



मीरगंज में सिधोली-नरखेड़ा मार्ग पर भाखड़ा नदी पर सेतु नहीं है। भाखड़ा नदी के जुगाड़ के पुल को पार करके जाते हैं तो नरखेड़ा से मीरगंज पांच किलोमीटर है, लेकिन जोखिम से बचना है तो मिर्जापुर, धनेटा होते हुए मीरगंज के लिए 25 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ेगा। इसमें धन और समय दोनों की बर्बादी है। इसलिए नरखेड़ा समेत बीस से अधिक गांवों के लोग दस साल से पुल की मांग कर रहे है। मामला विधानसभा तक उठा चुका है, लेकिन पुल धरातल पर नहीं उतरा। ग्राम प्रधान छत्रपाल ने बताया कि वह तो चालीस साल से समस्या झेल रहे है। नदी में पानी बढ़ता है तो नाव चलती है। वैसे लकड़ी का पुल बनाते है। पुल पर बैठने वाले चौकीदार को बाइक वाले दस रुपये देते है जो लोग पैदल आते जाते हैं वे भी पुल पर बैठने वाले को अनाज का दान देते हैं। यह गांव वालों की अपनी व्यवस्था है। इससे बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की दवाई में दिक्कत नहीं होती। ब्यूरो



लोगों की बात



न पुल है न रास्ता। खतरे भरा सफर हमारी मजबूरी है। उम्मीद है कि अब जनता की सुनवाई होगी। -अशोक कुमार, हसनगंज



आठ स्थानों पर पुल की मांग है। एक लाख से अधिक प्रभावित होते हैं। कब मांग पूरी होगी। हमारा यही सवाल है। कौशलेंद्र, खाता गौटिया


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मेेरे क्षेत्र के जो पुल नहीं बन पाए हैं उनके लिए मैंने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग से बातचीत की। अब मैं सेतु निगम के एमडी से भी बात करूंगा। पूछा जाएगा कि देरी क्यों हो रही है। - डॉ. डीसी वर्मा, विधायक, मीरगंज



पुल की मांग को लेकर शासन जाकर पता करेंगे कि मंजूरी कहां अटकी है, ताकि देरी न होने पाए। मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। - डॉ. श्यामबिहारी लाल, फरीदपुर के विधायक
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