{"_id":"5f0cc18e8ebc3e63b779ffb1","slug":"drug-demand-and-prices-increase-eating-food-out-of-reach-now-number-to-go-to-hospital-bareilly-news-bly4125810144","type":"story","status":"publish","title_hn":"दवा की मांग और दाम बढ़ेः ढील मिलते ही बाहर का खाना भाया, अब अस्पताल जाने का नंबर आया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दवा की मांग और दाम बढ़ेः ढील मिलते ही बाहर का खाना भाया, अब अस्पताल जाने का नंबर आया
विज्ञापन
medicine
- फोटो : medicine
अनलॉक शुरू होते ही रेस्टोरेंट्स पर लौटी रौनक, डाक्टरों के चक्कर लगा रहे लोग
विज्ञापन
ताकत बढ़ाने, जुकाम, सर्दी, बुखार की दवाओं की मांग में भारी बढ़ोत्तरी
मौका पाते ही कंपनियों ने भी दाम बढ़ाए, कारोबार 30 प्रतिशत तक उछला
बरेली। पिछले माह से अनलॉक प्रक्रिया शुरू हुई तो मानो लोगों ने कोरोना को खत्म ही मान लिया। सोशल डिस्टेंसिंग तो तोड़ी ही बेझिझक घर से बाहर का खाना भी खाने लगे। रेस्टोरेंट्स पर रौनक लौटने लगी और सड़क किनारे लगी चांट - पकौड़ी की दुकानों से भी लोगों ने परहेज बंद कर दिया। इससे रेस्टोरेंट और फास्ट फूड कारोबार तो पटरी पर आने लगा लेकिन लोगों की सेहत भी जवाब देने लगी है। अनलॉक शुरू होने के बाद डाक्टरों के पास जाने वाले मरीजों की तादाद में भी इजाफा हुआ है। खांसी, जुकाम और बुखार के मामलों में इजाफा हुआ है। इसकी वजह से दवाओं की बिक्री में भी करीब 30 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। मौका देख दवा कंपनियों ने भी दाम बढ़ा दिए हैं।
अप्रैल और मई मे पूर्ण लॉकडाउन होने से लोग दफ्तर और कारखानों में नहीं जा रहे थे। घर बैठे शुद्ध खाना और ताजा हवा मिल रही थी। जैसे ही जून माह में अनलॉक शुरू हुआ तो घरों में खुद को कैद महसूस कर रहे लोग टेस्ट बदलने के लिए रेस्टोरेंट्स का रुख करने लगे। कोरोना के खतरे को दरकिनार कर लोगों ने रेस्टोरेंट्स और सड़कों के किनारे बने चांट - पकौड़ी के सेंटरों पर खाना पीना शुरू कर दिया। इस बीच बारिश और मौसम बदलने का असर भी लोगों पर पड़ने लगा। इससे लोगोों को बुखार, जुकाम, सर्दी, खांसी, शुगर, बीपी जैसे बीमारियां घेरने लगी हैं। ऐसे में लोगों को डाक्टरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
दवा कारोबार में 30 प्रतिशत तक बृद्धि
पिछले माह जून में हुए कारोबार के परिणाम आना शुरू हो गए हैं। जुलाई में आए परिणाम चौंकाने वाले हैं। इसमें तीस प्रतिशत से ज्यादा दवाओं की बिक्री बढ़ गयी है। सबसे ज्यादा पैरासिटामॉल और एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री में उछाल आया है। कारोबारी इसे अच्छा उछाल मान रहे हैं। वहीं डॉक्टरों के यहां भी मरीज लगातार बढ़ना शुरू हुए हैं। लगभग सभी डॉक्टरों की ओपीडी में मरीजो की गिनती अप्रैल और मई से दोगुनी से ज्यादा तक हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कंपनियों ने बढ़ा दिए दाम
कई प्रमुख दवा निर्माता कंपनियों ने मांग बढ़ने के साथ 20-25 प्रतिशत दामों में बढ़ोत्तरी कर दी है। दवाओं के नए स्टाक में एमआरपी बढ़कर आने लगी है। जिनके पास पुराना स्टाक है वे भी नए दामों में बेंचने लगे हैं।
दवाओं की मांग और दामों में तीस प्रतिशत तक वृद्धि आयी है। मांग अभी रिटेल और निचले स्तर पर है। इसलिए थोक कारोबार में इसका ज्यादा असर नहीं दिख रहा है लेकिन जून माह के परिणाम थोक बाजार में भी आने लगे हैं। इससे लगता है कि थोक बाजार में भी रिटेल जैसी मांग में उछाल आएगा। पैरासिटामॉल, कफ सीरप की मांग ज्यादा हो गई है। इसलिए कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए हैं। - सतीश सेठी, महामंत्री बरेली मंडल केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन
विज्ञापन
ताकत बढ़ाने, जुकाम, सर्दी, बुखार की दवाओं की मांग में भारी बढ़ोत्तरी
मौका पाते ही कंपनियों ने भी दाम बढ़ाए, कारोबार 30 प्रतिशत तक उछला बरेली। पिछले माह से अनलॉक प्रक्रिया शुरू हुई तो मानो लोगों ने कोरोना को खत्म ही मान लिया। सोशल डिस्टेंसिंग तो तोड़ी ही बेझिझक घर से बाहर का खाना भी खाने लगे। रेस्टोरेंट्स पर रौनक लौटने लगी और सड़क किनारे लगी चांट - पकौड़ी की दुकानों से भी लोगों ने परहेज बंद कर दिया। इससे रेस्टोरेंट और फास्ट फूड कारोबार तो पटरी पर आने लगा लेकिन लोगों की सेहत भी जवाब देने लगी है। अनलॉक शुरू होने के बाद डाक्टरों के पास जाने वाले मरीजों की तादाद में भी इजाफा हुआ है। खांसी, जुकाम और बुखार के मामलों में इजाफा हुआ है। इसकी वजह से दवाओं की बिक्री में भी करीब 30 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। मौका देख दवा कंपनियों ने भी दाम बढ़ा दिए हैं।
अप्रैल और मई मे पूर्ण लॉकडाउन होने से लोग दफ्तर और कारखानों में नहीं जा रहे थे। घर बैठे शुद्ध खाना और ताजा हवा मिल रही थी। जैसे ही जून माह में अनलॉक शुरू हुआ तो घरों में खुद को कैद महसूस कर रहे लोग टेस्ट बदलने के लिए रेस्टोरेंट्स का रुख करने लगे। कोरोना के खतरे को दरकिनार कर लोगों ने रेस्टोरेंट्स और सड़कों के किनारे बने चांट - पकौड़ी के सेंटरों पर खाना पीना शुरू कर दिया। इस बीच बारिश और मौसम बदलने का असर भी लोगों पर पड़ने लगा। इससे लोगोों को बुखार, जुकाम, सर्दी, खांसी, शुगर, बीपी जैसे बीमारियां घेरने लगी हैं। ऐसे में लोगों को डाक्टरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
दवा कारोबार में 30 प्रतिशत तक बृद्धि
पिछले माह जून में हुए कारोबार के परिणाम आना शुरू हो गए हैं। जुलाई में आए परिणाम चौंकाने वाले हैं। इसमें तीस प्रतिशत से ज्यादा दवाओं की बिक्री बढ़ गयी है। सबसे ज्यादा पैरासिटामॉल और एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री में उछाल आया है। कारोबारी इसे अच्छा उछाल मान रहे हैं। वहीं डॉक्टरों के यहां भी मरीज लगातार बढ़ना शुरू हुए हैं। लगभग सभी डॉक्टरों की ओपीडी में मरीजो की गिनती अप्रैल और मई से दोगुनी से ज्यादा तक हो गई है।
विज्ञापन
कंपनियों ने बढ़ा दिए दाम
कई प्रमुख दवा निर्माता कंपनियों ने मांग बढ़ने के साथ 20-25 प्रतिशत दामों में बढ़ोत्तरी कर दी है। दवाओं के नए स्टाक में एमआरपी बढ़कर आने लगी है। जिनके पास पुराना स्टाक है वे भी नए दामों में बेंचने लगे हैं।दवाओं की मांग और दामों में तीस प्रतिशत तक वृद्धि आयी है। मांग अभी रिटेल और निचले स्तर पर है। इसलिए थोक कारोबार में इसका ज्यादा असर नहीं दिख रहा है लेकिन जून माह के परिणाम थोक बाजार में भी आने लगे हैं। इससे लगता है कि थोक बाजार में भी रिटेल जैसी मांग में उछाल आएगा। पैरासिटामॉल, कफ सीरप की मांग ज्यादा हो गई है। इसलिए कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए हैं। - सतीश सेठी, महामंत्री बरेली मंडल केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन