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Bareilly News: डीपीआरओ बताएं, परसरामपुर के प्रधान रफीक हैं या शफीक
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बरेली/नवाबगंज। भदपुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत परसरामपुर का प्रधान कौन? जैसे-जैसे इसकी जांच आगे बढ़ रही है, मामला उलझता जा रहा है। अब एसडीएम ने डीपीआरओ को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। बीडीओ भदपुरा पहले से ही इस मामले की जांच कर रहे हैं। वहीं, भूमि संरक्षण अधिकारी व डीआरडीए के सहायक अभियंता ग्राम पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं को खंगाल रहे हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग की रिपोर्ट में प्रधान के रूप में शफीक का नाम दर्ज है। प्रधानी का चुनाव भी शफीक ही लड़ा था। इसके कुछ साक्ष्य भी मिले हैं। प्रधानी के चुनाव में शफीक ने जो परचा भरा था, उस पर प्रस्तावक के तौर पर अपने बेटे मोहम्मद शोएब का नाम लिखवाया था, लेकिन जीत का प्रमाणपत्र रफीक के नाम से जारी हुआ था। रफीक के नाम से ही बैंक में खाता खोला गया। यानी, चुनाव संपन्न होने तक शफीक का नाम था, लेकिन उसके बाद रफीक का नाम आ गया।
शफीक के बेटे को बना दिया पंचायत सहायक
शफीक का बेटा पंचायत सहायक है। अगर शफीक प्रधान हैं तो उसका बेटा पंचायत सहायक कैसे बन सकता है? नियम तो यह है कि प्रधान के परिवार का कोई भी सदस्य पंचायत सहायक या रोजगार सेवक तक नहीं बन सकता। इस मामले में पंचायत सहायक पर भी गाज गिर सकती है।
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चुनाव संपन्न होने तक शफीक का नाम है और चुनाव के बाद रफीक का नाम आ गया। इसमें यही जांच होनी है कि ये नाम किसने, कैसे और क्यों बदले? जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डीपीआरओ से भी रिपोर्ट मांगी गई है। - अजय कुमार उपाध्याय, एसडीएम नवाबगंज
संवाद
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एक अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग की रिपोर्ट में प्रधान के रूप में शफीक का नाम दर्ज है। प्रधानी का चुनाव भी शफीक ही लड़ा था। इसके कुछ साक्ष्य भी मिले हैं। प्रधानी के चुनाव में शफीक ने जो परचा भरा था, उस पर प्रस्तावक के तौर पर अपने बेटे मोहम्मद शोएब का नाम लिखवाया था, लेकिन जीत का प्रमाणपत्र रफीक के नाम से जारी हुआ था। रफीक के नाम से ही बैंक में खाता खोला गया। यानी, चुनाव संपन्न होने तक शफीक का नाम था, लेकिन उसके बाद रफीक का नाम आ गया।
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शफीक के बेटे को बना दिया पंचायत सहायक
शफीक का बेटा पंचायत सहायक है। अगर शफीक प्रधान हैं तो उसका बेटा पंचायत सहायक कैसे बन सकता है? नियम तो यह है कि प्रधान के परिवार का कोई भी सदस्य पंचायत सहायक या रोजगार सेवक तक नहीं बन सकता। इस मामले में पंचायत सहायक पर भी गाज गिर सकती है।
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चुनाव संपन्न होने तक शफीक का नाम है और चुनाव के बाद रफीक का नाम आ गया। इसमें यही जांच होनी है कि ये नाम किसने, कैसे और क्यों बदले? जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डीपीआरओ से भी रिपोर्ट मांगी गई है। - अजय कुमार उपाध्याय, एसडीएम नवाबगंज
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