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Bareilly News: घर-घर पले कुत्ते, नगर निगम में पंजीकरण सिर्फ 125 का

Wed, 13 Nov 2024 03:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2024 03:13 AM IST
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Dogs raised in every home, registration of only 125 in Municipal Corporation
बरेली। शहर के विभिन्न इलाकों में घर-घर कुत्ते पल रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक इनकी संख्या हजारों में है। बड़ी संख्या में खतरनाक व्यवहार की वजह से प्रतिबंधित सूची में शामिल कुत्ते भी लोगों ने पाल रखे हैं। शहर में लोग इन्हें खुलेआम घूमते भी दिखाई देते हैं, लेकिन नगर निगम में पंजीकृत कुल पालतू कुत्तों की संख्या मात्र 125 है। बाकी कुत्तों का पंजीकरण कराने या प्रतिबंधित नस्ल पालने पर सख्ती से रोक लगाने के लिए कोई अभियान नहीं चला।
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इसी का नतीजा है कि एक दिन पहले सोमवार को डिग्री कॉलेज के चेयरमैन के बेटे व शिवज्ञान शिक्षा समिति के चेयरमैन आदित्य शंकर को उनके ही पालतू कुत्ते पिटबुल ने हमला कर घायल कर दिया। नगर निगम की सक्रियता पर सवाल उठे तो अब अभियान चलाकर ऐसे कुत्ता स्वामियों को चिह्नित करने की बात कही जा रही है, जिन्होंने पंजीकरण नहीं कराया है।
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नगर निगम के कई अधिकारी मानते भी हैं कि शहर में कुत्तों के शौकीनों ने पिटबुल, जर्मन शेफर्ड, पॉमेलियन, लेब्राडोर, बीगल, डाबरमैन, बुलडॉग, जैक रसेल, पग जैसे विदेशी प्रजाति के कुत्तों को पाल रखा है। कुत्ता मालिकों को रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर जब्तीकरण की कार्रवाई की चेतावनी पहले ही जारी की जा चुकी है, लेकिन सख्ती नहीं की गई।
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इनसेट
न चालान हो रहा और न शुल्क बढ़ाया
अभी नगर निगम में पालतू कुत्ते का रजिस्ट्रेशन कराने की फीस 10 रुपये है। बोर्ड की बैठक में इस शुल्क को बढ़ाने का प्रस्ताव पास हो चुका है, जिसके तहत छोटे कुत्तों की 500 रुपये और बड़े कुत्तों की एक हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस की जानी है। फिर भी ये नई दरें लागू नहीं हुई हैं। इसके अलावा अवैध रूप से कुत्ता पालने वालों के खिलाफ चालान की कोई कार्रवाई भी नहीं की गई है।

पड़ोसी की सहमति है जरूरी
नियमों के अनुसार कुत्ता पालने का पंजीकरण कराने के लिए पड़ोसी की सहमति भी जरूरी है। सार्वजनिक जगहों पर बिना मजल के कुत्ता घुमाने पर पाबंदी है। विशेषज्ञों के अनुसार पंजीकरण इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इससे जरूरी एंटी रैबीज इंजेक्शन सुनिश्चित हो पाता है। इसके अलावा पालतू पशुओं से होने वाली गंदगी की निगरानी भी हो जाती है।

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शहर में 53 इलाकों में खूंखार कुत्तों की गैंग
शहर के 80 वार्डों में से 53 में खुंखार कुत्तों की गैंग मौजूद है। यह आकलन भी नगर निगम और पशु पालन विभाग का है। इनमें सबसे अधिक पॉश और शहर के आउटर इलाके शामिल हैं। लिस्ट में सबसे ऊपर राजेंद्र नगर और डीडीपुरम का नाम है। यहां पर खतरनाक कुत्ते पले हुए हैं। सवाल यह है कि नगर निगम और पशु पालन विभाग के पास इतनी जानकारी है तो अभियान क्यों नहीं चलाया जाता?


ये नस्ल हैं वर्जित



रोटविलर, पिटबुल टेरियर, वुल्फ, टोसा ईनू, अमेरिकन स्टेफोर्ड, फिला ब्रासी लीरो, डोगो अर्जेंटीनों, अमेरिकन बुलडॉग, बोरवेल, कांगल, मध्य एशियाई शेफर्ड, कोकोशियान शेफर्ड, दक्षिण रुसी शेफर्ड, टार्न जैक, सरप्लानिनेक, जापानी टोसा व अकिता, मस्टिफ, टेरियर्स, रोडेशियन, रीजबैक, कैनारियों, अकबाश कुत्ता, मास्को गार्ड, कैन कोरो।

वर्जन...
पालतू कुत्तों के आंकड़े वार्डवार मांगे गए हैं। टीमें गठित की गई हैं। जल्द ही इसको लेकर अभियान चलाया जाएगा। प्रतिबंधित कुत्ते मिलने पर चालान होगा। वहीं जिनके रजिस्ट्रेशन नहीं होंगे उनके रजिस्ट्रेशन कराए जाएंगे। इससे कुत्तों की गणना ठीक से हो सकेगी।
डॉ. आदित्य तिवारी, पशु चिकित्सक व कल्याण अधिकारी
संवाद
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