{"_id":"506defdffbeb84111ef32913d7fe5077","slug":"dog-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इकलौते बेटे को कुत्तों ने नोचकर मार डाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इकलौते बेटे को कुत्तों ने नोचकर मार डाला
बरेली
Updated Mon, 23 Feb 2015 01:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आदमखोर हुए कुत्तों के झुंड ने भाटिया फार्म के पास एक और बच्चे को नोचकर मार डाला। खेतों पर चारा काटने गया 12 साल का यह बच्चा अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। कुत्तों ने उसके एक साथी को भी घायल कर दिया। खबर मिलने पर लाठी-डंडे लेकर पहुंचे गांव वालों ने शव को नोच रहे कुत्तों को बमुश्किल खदेड़ा और शव को गांव लाए। बच्चे की दर्दनाक मौत से पूरा गांव गम में डूब गया, लेकिन सूचना दिए जाने के बावजूद न तो एसडीएम या तहसीलदार गांव पहुंचे न उनका कोई मातहत। गांव के लोग इसको लेकर काफी गुस्से में थे।
इस इलाके में आदमखोर कुत्तों का कुछ ही दिनों के अंतराल में पांचवां शिकार बना अशोक नवायल गांव के भैरव प्रसाद का इकलौता बेटा था। भैरव उत्तराखंड सीमा पर बसे गांव जुगनू नागर के भाटिया फार्म पर ट्रैक्टर ड्राइवर की नौकरी करते हैं। दो दिन पहले भैरव प्रसाद गन्ना छिलवाने के लिए अपने गांव आ गए थे। उनकी पत्नी भगवान देई और बेटा भाटिया फार्म पर ही रुक गए थे। रविवार को दोपहर के वक्त अशोक अपने हमउम्र दोस्त प्रद्युम्न और दीपक के साथ खेत पर चारा काटने निकल गया। तीनों बच्चे चारा काट रहे थे तभी किच्छा नदी की तलहटी से निकले आवारा कुत्तों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। अचानक इस हमले से घबराया अशोक नीचे गिरा तो सारे कुत्ते उसी पर टूट पड़े। प्रद्युम्न और दीपक ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन कुत्तों ने दीपक को भी घायल कर दिया। कुत्तों पर बस नहीं चला तो दोनों दौड़कर गांव पहुंचे और लोगों को खबर दी। गांव के लोग लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे और कुत्तों को खदेड़ा, लेकिन तब तक अशोक की मौत हो चुकी है। कुत्तों ने उसकी गर्दन, जांघ, सीना, हाथ-पैर और गाल का काफी हिस्सा नोचकर खा चुके थे।
अशोक का शव भाटिया फार्म लाया गया जिसके बाद गांव के ही शशांक भाटिया ने एसडीएम बहेड़ी को फोन पर घटना की सूचना दी, लेकिन फिर भी देर शाम तक कोई अफसर या कर्मचारी गांव नहीं पहुंचा। देर शाम गांव के लोग अशोक के शव को उसके पैतृक गांव नवायल ले गए।
विज्ञापन
इंसेट-
गश खाकर गिर पड़े मां-बाप
इकलौते बेटे का शव देखकर भगवान देई और भैरव प्रसाद गश खाकर गिर पड़े। अशोक पंतपुरा के एक स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ता था और उसकी गिनती मेधावी छात्रों में थी। पिता भैरव प्रसाद को उसकी मौत की खबर मिली तो वह नवायल गांव से दौड़कर भाटिया फार्म पहुंचे। बेटे का शव देखकर वह वहीं चक्कर खाकर गिर पड़े। पत्नी भगवान देई पहले से बेसुध पड़ी थीं। गांव वालों ने बमुश्किल दोनों को संभाला। अशोक की मौत पर उसके मां-बाप ही नहीं, पूरा गांव गम और गुस्से में डूबा हुआ था।
...मगर प्रशासन तो पत्थरदिल बना हुआ है
एसडीएम का रटारटाया जवाब- बैठक करेंगे
बहेड़ी के इलाके में आदमखोर कुत्ते कुछ ही दिनों में पांच बच्चों की जान ले चुके हैं लेकिन अफसरों की संवेदनाएं हैं कि जागने का नाम ही नहीं ले रही हैं। और किसी बच्चे की जान न जाए, इसकी जिम्मेदारी न वन विभाग अपने सिर ले रहा है न नगर पालिका। कुत्तों को मासूम बच्चों की जान लेने से कैसे रोका जाए, यह प्रशासन को तय करना है लेकिन एसडीएम बहेड़ी का हर बच्चे की मौत पर रटारटाया जवाब होता है कि जल्द बैठक कर रणनीति बनाई जाएगी। बता दें कि वन विभाग, नगर पालिका और रिछा नगर पंचायत की ओर से पिछले दिनों सप्ताह भर आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया गया था लेकिन इस अभियान को कुछ पालतू कुत्ते पकड़ने के बाद बंद कर दिया गया। अब जबकि आदमखोर कुत्ते लगातार बच्चों पर हमला कर रहे हैं, प्रशासन चुप्पी साधकर बैठ गया है।
वर्जन-
आवारा कुत्ते पकडने का काम वन विभाग का नही है। ये आवारा कुत्ते ही हैं जो मासूमों पर हमले कर उन्हें मार रहे हैं। पहले इनके जंगली कुत्ते होने की बात कही गई थी। डीएम और डीएफओ के आदेश पर कुत्तों को पकड़ने के लिए टीम लगा दी थी। लेकिन अब वन विभाग इसमें कुछ नही कर सकता। यह काम प्रशासन का है। -आरबी सिंह रेंजर वन विभाग बहेड़ी
वर्जन-
मासूम बच्चे की आवारा कुत्तों के नोचने से मौत होने की सूचना मिली, बड़ा दुख हुआ। गांव वालों से बार-बार कहा जा चुका है कि आवारा कुत्तों को वे खुद मार डालें। वन विभाग के साथ बैठक कर दोबारा आवारा कुत्तों को पकड़ने की रणनीति बनाई जायेगी। -रामेश्वर नाथ तिवारी एसडीएम बहेड़ी
---
जिला अस्पताल में पर्याप्त एआरवी है। हर मरीज को लगाई भी जा रही है। ऐसा कुछ नहीं है कि कुत्तों के काटे गए पांच लोगों के आने पर ही वैक्सीन लगेगी। हमारे लिए मरीज की जान महत्वपूर्ण है न कि वैक्सीन। ऐसी कोई शिकायत भी नहीं मिली है। -डॉ. डीपी शर्मा, सीएमएस जिला अस्पताल
यह गांव के ही कुत्ते हैं जो जानवरों का मांस या नदी से निकले शव खाकर तंदुरुस्त हो गए हैं। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत वन विभाग इस मामले में कुछ नहीं कर सकता। नगर या ग्राम पंचायत ही कुछ कार्रवाई कर सकती हैं। जंगली कुत्ते (ढोल) बरेली क्षेत्र में नहीं पाए जाते। अगर जंगली कुत्ते होते तो वन विभाग एक्शन लेता। - एमपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक रुहेलखंड जोन
यह प्रकरण संवेदनशील और गंभीर है। बहेड़ी में इस समस्या के निदान के लिए आवारा कुत्तों को पकड़वाने का सघन अभियान चलेगा। स्थानीय निकाय, वन विभाग और प्रशासनिक टीमें इसमें संयुक्त तौर पर जुटेंगी। -गौरव दयाल, डीएम
विज्ञापन
इस इलाके में आदमखोर कुत्तों का कुछ ही दिनों के अंतराल में पांचवां शिकार बना अशोक नवायल गांव के भैरव प्रसाद का इकलौता बेटा था। भैरव उत्तराखंड सीमा पर बसे गांव जुगनू नागर के भाटिया फार्म पर ट्रैक्टर ड्राइवर की नौकरी करते हैं। दो दिन पहले भैरव प्रसाद गन्ना छिलवाने के लिए अपने गांव आ गए थे। उनकी पत्नी भगवान देई और बेटा भाटिया फार्म पर ही रुक गए थे। रविवार को दोपहर के वक्त अशोक अपने हमउम्र दोस्त प्रद्युम्न और दीपक के साथ खेत पर चारा काटने निकल गया। तीनों बच्चे चारा काट रहे थे तभी किच्छा नदी की तलहटी से निकले आवारा कुत्तों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। अचानक इस हमले से घबराया अशोक नीचे गिरा तो सारे कुत्ते उसी पर टूट पड़े। प्रद्युम्न और दीपक ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन कुत्तों ने दीपक को भी घायल कर दिया। कुत्तों पर बस नहीं चला तो दोनों दौड़कर गांव पहुंचे और लोगों को खबर दी। गांव के लोग लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे और कुत्तों को खदेड़ा, लेकिन तब तक अशोक की मौत हो चुकी है। कुत्तों ने उसकी गर्दन, जांघ, सीना, हाथ-पैर और गाल का काफी हिस्सा नोचकर खा चुके थे।
विज्ञापन
अशोक का शव भाटिया फार्म लाया गया जिसके बाद गांव के ही शशांक भाटिया ने एसडीएम बहेड़ी को फोन पर घटना की सूचना दी, लेकिन फिर भी देर शाम तक कोई अफसर या कर्मचारी गांव नहीं पहुंचा। देर शाम गांव के लोग अशोक के शव को उसके पैतृक गांव नवायल ले गए।
विज्ञापन
इंसेट-
गश खाकर गिर पड़े मां-बाप
इकलौते बेटे का शव देखकर भगवान देई और भैरव प्रसाद गश खाकर गिर पड़े। अशोक पंतपुरा के एक स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ता था और उसकी गिनती मेधावी छात्रों में थी। पिता भैरव प्रसाद को उसकी मौत की खबर मिली तो वह नवायल गांव से दौड़कर भाटिया फार्म पहुंचे। बेटे का शव देखकर वह वहीं चक्कर खाकर गिर पड़े। पत्नी भगवान देई पहले से बेसुध पड़ी थीं। गांव वालों ने बमुश्किल दोनों को संभाला। अशोक की मौत पर उसके मां-बाप ही नहीं, पूरा गांव गम और गुस्से में डूबा हुआ था।
...मगर प्रशासन तो पत्थरदिल बना हुआ है
एसडीएम का रटारटाया जवाब- बैठक करेंगे
बहेड़ी के इलाके में आदमखोर कुत्ते कुछ ही दिनों में पांच बच्चों की जान ले चुके हैं लेकिन अफसरों की संवेदनाएं हैं कि जागने का नाम ही नहीं ले रही हैं। और किसी बच्चे की जान न जाए, इसकी जिम्मेदारी न वन विभाग अपने सिर ले रहा है न नगर पालिका। कुत्तों को मासूम बच्चों की जान लेने से कैसे रोका जाए, यह प्रशासन को तय करना है लेकिन एसडीएम बहेड़ी का हर बच्चे की मौत पर रटारटाया जवाब होता है कि जल्द बैठक कर रणनीति बनाई जाएगी। बता दें कि वन विभाग, नगर पालिका और रिछा नगर पंचायत की ओर से पिछले दिनों सप्ताह भर आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया गया था लेकिन इस अभियान को कुछ पालतू कुत्ते पकड़ने के बाद बंद कर दिया गया। अब जबकि आदमखोर कुत्ते लगातार बच्चों पर हमला कर रहे हैं, प्रशासन चुप्पी साधकर बैठ गया है।
वर्जन-
आवारा कुत्ते पकडने का काम वन विभाग का नही है। ये आवारा कुत्ते ही हैं जो मासूमों पर हमले कर उन्हें मार रहे हैं। पहले इनके जंगली कुत्ते होने की बात कही गई थी। डीएम और डीएफओ के आदेश पर कुत्तों को पकड़ने के लिए टीम लगा दी थी। लेकिन अब वन विभाग इसमें कुछ नही कर सकता। यह काम प्रशासन का है। -आरबी सिंह रेंजर वन विभाग बहेड़ी
वर्जन-
मासूम बच्चे की आवारा कुत्तों के नोचने से मौत होने की सूचना मिली, बड़ा दुख हुआ। गांव वालों से बार-बार कहा जा चुका है कि आवारा कुत्तों को वे खुद मार डालें। वन विभाग के साथ बैठक कर दोबारा आवारा कुत्तों को पकड़ने की रणनीति बनाई जायेगी। -रामेश्वर नाथ तिवारी एसडीएम बहेड़ी
---
जिला अस्पताल में पर्याप्त एआरवी है। हर मरीज को लगाई भी जा रही है। ऐसा कुछ नहीं है कि कुत्तों के काटे गए पांच लोगों के आने पर ही वैक्सीन लगेगी। हमारे लिए मरीज की जान महत्वपूर्ण है न कि वैक्सीन। ऐसी कोई शिकायत भी नहीं मिली है। -डॉ. डीपी शर्मा, सीएमएस जिला अस्पताल
यह गांव के ही कुत्ते हैं जो जानवरों का मांस या नदी से निकले शव खाकर तंदुरुस्त हो गए हैं। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत वन विभाग इस मामले में कुछ नहीं कर सकता। नगर या ग्राम पंचायत ही कुछ कार्रवाई कर सकती हैं। जंगली कुत्ते (ढोल) बरेली क्षेत्र में नहीं पाए जाते। अगर जंगली कुत्ते होते तो वन विभाग एक्शन लेता। - एमपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक रुहेलखंड जोन
यह प्रकरण संवेदनशील और गंभीर है। बहेड़ी में इस समस्या के निदान के लिए आवारा कुत्तों को पकड़वाने का सघन अभियान चलेगा। स्थानीय निकाय, वन विभाग और प्रशासनिक टीमें इसमें संयुक्त तौर पर जुटेंगी। -गौरव दयाल, डीएम