{"_id":"5a8337674f1c1b514a8b9218","slug":"devotees-gears-up-for-celebrating-mahashivratri","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर के हर कोने में विराजे भोले करते सबकी रक्षा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर के हर कोने में विराजे भोले करते सबकी रक्षा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 14 Feb 2018 12:37 AM IST
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बरेली शहर के चारों तरफ भगवान शिव स्वयं भू या स्थापित शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। शहर के लोगों की मान्यता है कि भगवान शिव हमारी और पूरे शहर की रक्षा करते हैं। हर एक मंदिर की मान्यता और उसका अपना इतिहास है।
श्री धोपेश्वर नाथ मंदिर:धुम्र ऋषि ने किया था तप
कैंट स्थित श्री धोपेश्वर नाथ मंदिर पांडव कालीन है। यहां स्वयं भू शिवलिंग है। इसलिए इसकी दूर-दूर तक मान्यता है। आचार्य घनश्याम जोशी ने बताया कि द्रौपदी के गुरु धुम्र ऋषि ने यहां तप किया था। तब भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन दिए थे। तब उस समय से इसका नाम धुम्रेश्वर नाथ पड़ा, जो आज श्री धोपेश्वर नाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह धोपा मैय्या के नाम से जाना जाता है। भादों के अंतिम दो बृहस्पतिवार को ग्रामीण धोपा मैय्या की पूजा करने आते हैं। प्रसाद चढ़ाते हैं। इसके बाद खोखा मैय्या और रायसती देवी को सूखा प्रसाद चढ़ाते हैं। बताया, यहां सरोवर में स्नान का बहुत महत्व है। इसमें स्नान करने से लोगों के चर्म रोग दूर हो जाते हैं।
श्री तपेश्वर नाथ मंदिर 300 साल पहले तपो भूमि थी
सुभाष नगर स्थित बाबा तपेश्वर नाथ मंदिर करीब तीन सौ वर्ष पुराना है। पुजारी विशन चंद्र शर्मा ने बताया कि द्वापर युग में तपोभूमि थी। करीब करीब तीन साल से ज्यादा पहले यहां मुनीश्वर दास ने तपस्या की थी। उस समय स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुए थे। इसी से सिद्ध मंदिर माना जाता है। मान्यता है कि यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। मनोइच्छा पूर्ण होने पर यहां महाशिवरात्रि के दिन झंडियां विशेष रूप से चढ़ाई जाती है। जुलूस और शोभायात्रा निकाली जाती है। यहां बड़ा मेला लगता है। इसके अलावा सावन और जन्माष्टमी में भी मेला लगता है। दूर-दूर से भक्त आकर शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाकर अपनी मनौती मांगते हैं।
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श्री मणिनाथ नाथ मंदिर दूधाधारी मणिनाथ के रूप में भोले
शहर की घनी आबादी के बीच स्थित बाबा मणिनाथ मंदिर करीब दो सौ साल से ज्यादा पुराना है। महंत धर्मेंद्र गिरि ने बताया कि यहां स्वयं भू शिवलिंग है। जबकि गौरी शंकर प्राण प्रतिष्ठित हैं। सिद्ध बाबा मोहनगिरि थे उनके पास मणिधारी सर्प था। उस समय यहां संतों की जमात लगती थी। संत अपनी-अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते थे। उन्हीं में आए हुए एक संत बाबा मोहनगिरि से बोले, मुझे दूध चाहिए, यह कहते हुए उन्होंने तोमी दे दी, शिष्यों ने बताया कि दूध देने के बाद भी तोमी नहीं भर रही है। इस पर उन्होंने कहा निर्माणाधीन कुएं से ले लो तो वहां दूध उफनता मिला। उसी में शिवलिंग निकला। तब इनका नाम दूधाधारी मणिनाथ नाम पड़ा। जो आज मढ़ीनाथ के रूप में जाना जाता है। बताया, यह सिद्ध स्थल है बाबा ने यहां भी की इच्छा पूरी की है।
साधू-बाबा यहां अलख जगाते थे
प्राचीन और शहर के बीचोबीच स्थित बाबा अलखनाथ मंदिर के बारे में मान्यता है कि वह हजारों वर्ष पुराना है। यहां भी स्वयं भू शिवलिंग हैं। मंदिर के महंत कालूगिरि ने बताया कि यहां शिवलिंग प्रकट हुए थे। बताया कभी यहां बाबा और साधु अलख (धर्म का प्रचार और पूजा) जगाते थे। कई निजाम बदले, मुस्लिम शासक भी हुए मगर यहां बराबर पूजा होती रही। साधुओं को सम्मान भी मिला। बताया करीब तीन सौ साल पहले बाबा दधिगिरि महाराज ने यहां तप किया था। बताया मंदिर 84 बीघा में है। बाग बगीचा के अलावा नदी और उसका घाट था। मगर आज कब्जा होने से अब कुछ नहीं है। बताया, यहां तमाम साधु संतों की समाधि भी है।
तीन वट वृक्षों के नीचे उभरा था शिवलिंग
बरेली। शहर में स्थित बाबा त्रिवटी नाथ का मंदिर का अलग इतिहास है। करीब छह सौ वर्ष पहले तीन वट वृक्षों के नीचे भगवान शिव का अद्भुत शिवलिंग उभरा था। इसलिए इसे त्रिवटी नाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। पुजारी रविंद्र शर्मा ने बताया कि एक चरवाह था, जिसे सोते हुए सोते हुए आभास हुआ था कि यहां शिवलिंग उभरा है। देखा तो स्वयं भू शिवलिंग के दर्शन हुए। 1474 से यह मंदिर सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। धीरे-धीरे मंदिर का सौंदर्यकरण होता गया और आज विभिन्न विग्रहों की स्थापना के साथ विशाल मंदिर के रूप में विराजमान है।
द्रोपदी ने यहां वन में किया शिव पूजन
पुराना शहर के हिस्से से लगा हुआ वर्तमान में जोगीनावादा स्थित बाबा वनखंडी नाथ मंदिर द्वापर युग का माना जाता है। देवी द्रोपदी ने यहां भगवान शिव का पूजन किया था। इसके अलावा अज्ञातवास में पांडव इसी क्षेत्र में रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की थी। राजा खान बहादुर के सेनापति शोभाराम के रथ को यहां एक पत्थर से ठोकर लगी थी, तब उन्होंने गुस्से में कहा पत्थर हटाकर फेंक दो। मगर पत्थर काफी प्रयास के बाद भी नहीं हटा, तो उन्होंने क्षमा मांगी। तब उन्होंने यहां स्वयंभू शिवलिंग का शिवालय बनवाया। बताया यहां शिवगंगा साथ हैं। शिवलिंग कभी सूखते नहीं। इन्हें प्राचीन नाथ नरेश भी कहते हैं।
पशुपति नाथ मंदिर: 108 शिवलिंग है यहां
बाईपास रोड स्थित बाबा पशुपतिनाथ मंदिर स्थापित मंदिर है। करीब 17-18 साल पहले मंदिर का निर्माण कराया था। यहां की खास बात हैं कि मंदिर के चारों तरफ सरोवर है। मुख्य मंदिर के चारों ओर 108 शिवलिंग है। मुख्य शिवलिंग का जलाभिषेक करने के बाद 108 शिवलिंगों की पूजा का फल स्वयं प्राप्त हो जाता है। इससे यहां की विशेष मान्यता है। मंदिर के द्वार के सामने बड़े आकार के नंदी जी प्रतिमा भी लोगों को आकर्षित करती है।
बम-बम भोले के उद्घोष के साथ निकली परिक्रमा यात्रा
शहर के सातों नाथ का किया जलाभिषेक
श्री नाथ नगरी सेवा समिति की ओर से महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए नाथ नगरी परिक्रमा यात्रा निकाली गई।
बड़ा बाजार कन्हैया टोला स्थित शिव मंदिर से शुरू हुई परिक्रमा यात्रा में पंडित केसरी नंदन कौशिक ने नंदी ध्वज पूजन किया। इसके बाद महंत ओमप्रकाश दास,पूर्व मेयर कुंवर सुभाष पटेल, राधा कमल सारस्वत, पंकज तिवारी, अंकुर सक्सेना, श्रवण गुप्ता सहित शिवभक्त अपने दो पहिया वाहनों पर सवार होकर बड़ा बाजार, कुतुबखाना, कोहाड़ापीर होते हुए टीबरीनाथ मंदिर पहुंची। यहां जलाभिषेक किया। इसके बाद बारी बारी से वनखंडी नाथ, पशुपति नाथ, धोपेश्वर नाथ, तपेश्वर नाथ, मणिनाथ होते हुए बाबा अलखनाथ मंदिर पर पहुंचकर सातवां जलाभिषेक किया। इसे दौरान बीच रास्ते में कई जगह यात्रा का स्वागत किया। मंत्री संतोष गंगवार, गुलशन आनंद, नगर विधायक डा. अरुण कुमार, आयुष सक्सेना आदि ने स्वागत किया। अक्षय सक्सेना, सचिन मेहरा, ज्ञान प्रकाश रस्तोगी, रामकुमार श्रीवास्तव, सुनील कश्यप आदि ने सहयोग किया।
शिवालय सज कर तैयार, महाशिवरात्रि आज
महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में शहर के सभी प्रमुख शिवालय सजकर तैयार हैं। फूलों और बिजली की झालरों से मंदिरों की सजावट की गई है। भगवान शिव जलाभिषेक करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोई दिक्कत न हो इसके लिए मंदिरों में व्यवस्था भी बनाई गई है।
महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में शहर के करीब सौ छोटे बड़े मंदिरों में जलाभिषेक होगा। श्री अलखनाथ मंदिर, श्री धोपेश्वरनाथ, श्री तपेश्वर नाथ, मणिनाथ, त्रिवटी नाथ, वनखंडी नाथ और पशुपतिनाथ सहित सभी मंदिरों में तैयारियां पूरी हों चुकी हैं। मंदिरों को बिजली की झालर और फूलों से सजाया जा रहा है। अलखनाथ मंदिर में मुख्य मंदिर को फूलों से सजाया गया है। अंदर द्वार से बाहर गेट तक झालर और बिजली की सजावट है। इसी तरह से अन्य नाथ मंदिरों में सजावट हुई है। बुधवार को इन सभी मंदिरों पर मेले जैसी रौनक रहेगी। इस दौरान बच्चों के लिए झूले आदि भी लग चुके हैं। मंदिरों और प्रशासन की तरफ से पूरी व्यवस्था मुस्तैद है।
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श्री धोपेश्वर नाथ मंदिर:धुम्र ऋषि ने किया था तप
कैंट स्थित श्री धोपेश्वर नाथ मंदिर पांडव कालीन है। यहां स्वयं भू शिवलिंग है। इसलिए इसकी दूर-दूर तक मान्यता है। आचार्य घनश्याम जोशी ने बताया कि द्रौपदी के गुरु धुम्र ऋषि ने यहां तप किया था। तब भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन दिए थे। तब उस समय से इसका नाम धुम्रेश्वर नाथ पड़ा, जो आज श्री धोपेश्वर नाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह धोपा मैय्या के नाम से जाना जाता है। भादों के अंतिम दो बृहस्पतिवार को ग्रामीण धोपा मैय्या की पूजा करने आते हैं। प्रसाद चढ़ाते हैं। इसके बाद खोखा मैय्या और रायसती देवी को सूखा प्रसाद चढ़ाते हैं। बताया, यहां सरोवर में स्नान का बहुत महत्व है। इसमें स्नान करने से लोगों के चर्म रोग दूर हो जाते हैं।
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श्री तपेश्वर नाथ मंदिर 300 साल पहले तपो भूमि थी
सुभाष नगर स्थित बाबा तपेश्वर नाथ मंदिर करीब तीन सौ वर्ष पुराना है। पुजारी विशन चंद्र शर्मा ने बताया कि द्वापर युग में तपोभूमि थी। करीब करीब तीन साल से ज्यादा पहले यहां मुनीश्वर दास ने तपस्या की थी। उस समय स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुए थे। इसी से सिद्ध मंदिर माना जाता है। मान्यता है कि यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। मनोइच्छा पूर्ण होने पर यहां महाशिवरात्रि के दिन झंडियां विशेष रूप से चढ़ाई जाती है। जुलूस और शोभायात्रा निकाली जाती है। यहां बड़ा मेला लगता है। इसके अलावा सावन और जन्माष्टमी में भी मेला लगता है। दूर-दूर से भक्त आकर शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाकर अपनी मनौती मांगते हैं।
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श्री मणिनाथ नाथ मंदिर दूधाधारी मणिनाथ के रूप में भोले
शहर की घनी आबादी के बीच स्थित बाबा मणिनाथ मंदिर करीब दो सौ साल से ज्यादा पुराना है। महंत धर्मेंद्र गिरि ने बताया कि यहां स्वयं भू शिवलिंग है। जबकि गौरी शंकर प्राण प्रतिष्ठित हैं। सिद्ध बाबा मोहनगिरि थे उनके पास मणिधारी सर्प था। उस समय यहां संतों की जमात लगती थी। संत अपनी-अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते थे। उन्हीं में आए हुए एक संत बाबा मोहनगिरि से बोले, मुझे दूध चाहिए, यह कहते हुए उन्होंने तोमी दे दी, शिष्यों ने बताया कि दूध देने के बाद भी तोमी नहीं भर रही है। इस पर उन्होंने कहा निर्माणाधीन कुएं से ले लो तो वहां दूध उफनता मिला। उसी में शिवलिंग निकला। तब इनका नाम दूधाधारी मणिनाथ नाम पड़ा। जो आज मढ़ीनाथ के रूप में जाना जाता है। बताया, यह सिद्ध स्थल है बाबा ने यहां भी की इच्छा पूरी की है।
साधू-बाबा यहां अलख जगाते थे
प्राचीन और शहर के बीचोबीच स्थित बाबा अलखनाथ मंदिर के बारे में मान्यता है कि वह हजारों वर्ष पुराना है। यहां भी स्वयं भू शिवलिंग हैं। मंदिर के महंत कालूगिरि ने बताया कि यहां शिवलिंग प्रकट हुए थे। बताया कभी यहां बाबा और साधु अलख (धर्म का प्रचार और पूजा) जगाते थे। कई निजाम बदले, मुस्लिम शासक भी हुए मगर यहां बराबर पूजा होती रही। साधुओं को सम्मान भी मिला। बताया करीब तीन सौ साल पहले बाबा दधिगिरि महाराज ने यहां तप किया था। बताया मंदिर 84 बीघा में है। बाग बगीचा के अलावा नदी और उसका घाट था। मगर आज कब्जा होने से अब कुछ नहीं है। बताया, यहां तमाम साधु संतों की समाधि भी है।
तीन वट वृक्षों के नीचे उभरा था शिवलिंग
बरेली। शहर में स्थित बाबा त्रिवटी नाथ का मंदिर का अलग इतिहास है। करीब छह सौ वर्ष पहले तीन वट वृक्षों के नीचे भगवान शिव का अद्भुत शिवलिंग उभरा था। इसलिए इसे त्रिवटी नाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। पुजारी रविंद्र शर्मा ने बताया कि एक चरवाह था, जिसे सोते हुए सोते हुए आभास हुआ था कि यहां शिवलिंग उभरा है। देखा तो स्वयं भू शिवलिंग के दर्शन हुए। 1474 से यह मंदिर सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। धीरे-धीरे मंदिर का सौंदर्यकरण होता गया और आज विभिन्न विग्रहों की स्थापना के साथ विशाल मंदिर के रूप में विराजमान है।
द्रोपदी ने यहां वन में किया शिव पूजन
पुराना शहर के हिस्से से लगा हुआ वर्तमान में जोगीनावादा स्थित बाबा वनखंडी नाथ मंदिर द्वापर युग का माना जाता है। देवी द्रोपदी ने यहां भगवान शिव का पूजन किया था। इसके अलावा अज्ञातवास में पांडव इसी क्षेत्र में रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की थी। राजा खान बहादुर के सेनापति शोभाराम के रथ को यहां एक पत्थर से ठोकर लगी थी, तब उन्होंने गुस्से में कहा पत्थर हटाकर फेंक दो। मगर पत्थर काफी प्रयास के बाद भी नहीं हटा, तो उन्होंने क्षमा मांगी। तब उन्होंने यहां स्वयंभू शिवलिंग का शिवालय बनवाया। बताया यहां शिवगंगा साथ हैं। शिवलिंग कभी सूखते नहीं। इन्हें प्राचीन नाथ नरेश भी कहते हैं।
पशुपति नाथ मंदिर: 108 शिवलिंग है यहां
बाईपास रोड स्थित बाबा पशुपतिनाथ मंदिर स्थापित मंदिर है। करीब 17-18 साल पहले मंदिर का निर्माण कराया था। यहां की खास बात हैं कि मंदिर के चारों तरफ सरोवर है। मुख्य मंदिर के चारों ओर 108 शिवलिंग है। मुख्य शिवलिंग का जलाभिषेक करने के बाद 108 शिवलिंगों की पूजा का फल स्वयं प्राप्त हो जाता है। इससे यहां की विशेष मान्यता है। मंदिर के द्वार के सामने बड़े आकार के नंदी जी प्रतिमा भी लोगों को आकर्षित करती है।
बम-बम भोले के उद्घोष के साथ निकली परिक्रमा यात्रा
शहर के सातों नाथ का किया जलाभिषेक
श्री नाथ नगरी सेवा समिति की ओर से महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए नाथ नगरी परिक्रमा यात्रा निकाली गई।
बड़ा बाजार कन्हैया टोला स्थित शिव मंदिर से शुरू हुई परिक्रमा यात्रा में पंडित केसरी नंदन कौशिक ने नंदी ध्वज पूजन किया। इसके बाद महंत ओमप्रकाश दास,पूर्व मेयर कुंवर सुभाष पटेल, राधा कमल सारस्वत, पंकज तिवारी, अंकुर सक्सेना, श्रवण गुप्ता सहित शिवभक्त अपने दो पहिया वाहनों पर सवार होकर बड़ा बाजार, कुतुबखाना, कोहाड़ापीर होते हुए टीबरीनाथ मंदिर पहुंची। यहां जलाभिषेक किया। इसके बाद बारी बारी से वनखंडी नाथ, पशुपति नाथ, धोपेश्वर नाथ, तपेश्वर नाथ, मणिनाथ होते हुए बाबा अलखनाथ मंदिर पर पहुंचकर सातवां जलाभिषेक किया। इसे दौरान बीच रास्ते में कई जगह यात्रा का स्वागत किया। मंत्री संतोष गंगवार, गुलशन आनंद, नगर विधायक डा. अरुण कुमार, आयुष सक्सेना आदि ने स्वागत किया। अक्षय सक्सेना, सचिन मेहरा, ज्ञान प्रकाश रस्तोगी, रामकुमार श्रीवास्तव, सुनील कश्यप आदि ने सहयोग किया।
शिवालय सज कर तैयार, महाशिवरात्रि आज
महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में शहर के सभी प्रमुख शिवालय सजकर तैयार हैं। फूलों और बिजली की झालरों से मंदिरों की सजावट की गई है। भगवान शिव जलाभिषेक करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोई दिक्कत न हो इसके लिए मंदिरों में व्यवस्था भी बनाई गई है।
महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में शहर के करीब सौ छोटे बड़े मंदिरों में जलाभिषेक होगा। श्री अलखनाथ मंदिर, श्री धोपेश्वरनाथ, श्री तपेश्वर नाथ, मणिनाथ, त्रिवटी नाथ, वनखंडी नाथ और पशुपतिनाथ सहित सभी मंदिरों में तैयारियां पूरी हों चुकी हैं। मंदिरों को बिजली की झालर और फूलों से सजाया जा रहा है। अलखनाथ मंदिर में मुख्य मंदिर को फूलों से सजाया गया है। अंदर द्वार से बाहर गेट तक झालर और बिजली की सजावट है। इसी तरह से अन्य नाथ मंदिरों में सजावट हुई है। बुधवार को इन सभी मंदिरों पर मेले जैसी रौनक रहेगी। इस दौरान बच्चों के लिए झूले आदि भी लग चुके हैं। मंदिरों और प्रशासन की तरफ से पूरी व्यवस्था मुस्तैद है।