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हुलासनगरा प्रोजेक्ट को फिर झटका- जाम से जल्द नहीं मिल पाएगी निजात
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ओवरब्रिज निर्माण में लगातार हो रही देरी, अब टेंडर प्रक्रिया निरस्त
दो फर्में ही शामिल हुईं टेंडर में, उसमें भी एक के कागज अधूरे
बरेली। दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर फतेहगंज पश्चिमी के पास हुलासनगरा रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज के प्रोजेक्ट को फिर झटका लगा है। एनएचएआई ने कुछ दिन पहले टेक्निकल टेंडर कराए तो इसमें केवल दो फर्म ही शामिल हुई हैं। उसमें से एक फर्म के कागज पूरे न होने से उसे प्रक्रिया बाहर कर दिया है। उसमें बाद एक ही फर्म के रहने पर टेंडर प्रक्रिया को फिर से निरस्त करना पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर के लिए कम से कम दो फर्मों को रहना तो जरूरी ही है।
बरेली-शाहजहांपुर के बीच हुलासनगरा रेलवे क्रासिंग पर आए दिन जबरदस्त जाम लगता है। इससे लखनऊ से बरेली होते हुए दिल्ली आने-जाने वालों को परेशानी होने के साथ उनका काफी समय भी बर्बाद हो जाता है। पहले यह प्रोजेक्ट 2200 करोड़ के बरेली-सीतापुर फोरलेन के प्रोजेक्ट में ही शामिल था, लेकिन कांट्रेक्ट लेने वाली इरा इंफ्रा स्ट्रक्चर कंपनी के बीच में ही काम छोड़कर भाग जाने से ओवरब्रिज का निर्माण नहीं हो सका। कमिश्नर रणवीर प्रसाद की पैरवी के बाद एनएचएआई ने हुलासनगरा क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को भेजा था। हाल में मंत्रालय ने 45.23 करोड़ की लागत से 1000 मीटर लंबे इस ओवरब्रिज को बनाने की अनुमति दे दी। एनएचएआई ने इसके टेंडर के लिए 24 अक्तूबर, फिर 30 अक्तूबर के बाद तीसरी बार सात नवंबर की तारीख तय की थी। इसके बाद नवंबर और दिसंबर में कई बार टेंडर के लिए तारीख तय की लेकिन टेंडर नहीं हो सके। कुछ दिन पहले टेंडर प्रक्रिया हुई तो उसमें केवल दो फर्मों ने ही हिस्सा लिया था। इसमें एक फर्म के कागज ही सही नहीं मिलने से उसे अवैध घोषित कर दिया गया। टेंडर में एक ही फर्म रह जाने से पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। अब फिर से टेंडर कराने होंगे।
‘टेंडर में दो फर्मों को रहना जरूरी था, लेकिन एक फर्म के कागज सही नहीं पाए जाने से उसे बाहर कर दिया गया। एक ही फर्म बचने से टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ा है। जल्द ही फिर टेक्निकल टेंडर डाले जाएंगे।’
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- आकांक्ष, डिप्टी जीएम, एनएचएआई
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दो फर्में ही शामिल हुईं टेंडर में, उसमें भी एक के कागज अधूरे
बरेली। दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर फतेहगंज पश्चिमी के पास हुलासनगरा रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज के प्रोजेक्ट को फिर झटका लगा है। एनएचएआई ने कुछ दिन पहले टेक्निकल टेंडर कराए तो इसमें केवल दो फर्म ही शामिल हुई हैं। उसमें से एक फर्म के कागज पूरे न होने से उसे प्रक्रिया बाहर कर दिया है। उसमें बाद एक ही फर्म के रहने पर टेंडर प्रक्रिया को फिर से निरस्त करना पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर के लिए कम से कम दो फर्मों को रहना तो जरूरी ही है।
बरेली-शाहजहांपुर के बीच हुलासनगरा रेलवे क्रासिंग पर आए दिन जबरदस्त जाम लगता है। इससे लखनऊ से बरेली होते हुए दिल्ली आने-जाने वालों को परेशानी होने के साथ उनका काफी समय भी बर्बाद हो जाता है। पहले यह प्रोजेक्ट 2200 करोड़ के बरेली-सीतापुर फोरलेन के प्रोजेक्ट में ही शामिल था, लेकिन कांट्रेक्ट लेने वाली इरा इंफ्रा स्ट्रक्चर कंपनी के बीच में ही काम छोड़कर भाग जाने से ओवरब्रिज का निर्माण नहीं हो सका। कमिश्नर रणवीर प्रसाद की पैरवी के बाद एनएचएआई ने हुलासनगरा क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को भेजा था। हाल में मंत्रालय ने 45.23 करोड़ की लागत से 1000 मीटर लंबे इस ओवरब्रिज को बनाने की अनुमति दे दी। एनएचएआई ने इसके टेंडर के लिए 24 अक्तूबर, फिर 30 अक्तूबर के बाद तीसरी बार सात नवंबर की तारीख तय की थी। इसके बाद नवंबर और दिसंबर में कई बार टेंडर के लिए तारीख तय की लेकिन टेंडर नहीं हो सके। कुछ दिन पहले टेंडर प्रक्रिया हुई तो उसमें केवल दो फर्मों ने ही हिस्सा लिया था। इसमें एक फर्म के कागज ही सही नहीं मिलने से उसे अवैध घोषित कर दिया गया। टेंडर में एक ही फर्म रह जाने से पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। अब फिर से टेंडर कराने होंगे।
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‘टेंडर में दो फर्मों को रहना जरूरी था, लेकिन एक फर्म के कागज सही नहीं पाए जाने से उसे बाहर कर दिया गया। एक ही फर्म बचने से टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ा है। जल्द ही फिर टेक्निकल टेंडर डाले जाएंगे।’
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- आकांक्ष, डिप्टी जीएम, एनएचएआई