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लखनऊ-दिल्ली हाईवे- सर्दी में नहीं सेट हो सकेगा कोलतार, इसलिए पहले बनेंगे टूटे फ्लाईओवर
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खतरे वाली जगहों पर गड्ढों का भराव भी पहले कराएगा ठेकेदार
मौसम सामान्य होने पर हाईवे के लिए हॉटमिक्स का शुरू होगा काम
बरेली। लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर करीब 10 साल से अटके सीतापुर-बरेली हाईवे (एनएच-30) पर काम शुरू करने के लिए एनएचएआई ने भले ही सात अरब का कांट्रेक्ट लेने वाली कंपनी को अनुमति पत्र दे दिया हो, लेकिन सड़क के इंजीनियरों का कहना है कि इतनी सर्दी में हाईवे बनाने के लिए कोलतार सही से सेट नहीं होगा। इसलिए शुरूआती चरण में अधूरे हाईवे की जगह खस्ताहाल फ्लाईओवर का निर्माण कराया जाएगा। तापमान सामान्य होने के साथ ही हॉटमिक्स रोड बनाई जाएगी। हालांकि टूटते-दरकते हाईवे पर कई जगहों पर खतरनाक खड्ड बन गए हैं, जिससे यहां आए दिन हादसे हो रहे हैं।
साल 2010 में एनएचआई ने करीब 157 किलोमीटर लंबे इस हाईवे का कांट्रेक्ट इरा इंफ्रा स्ट्रक्चर नाम की कंपनी को दिया था, जो पिछले साल फ्लाईओवर और हाईवे का निर्माण अधूरा छोड़कर फरार हो गई, जबकि फरार कंपनी को काम बंद किए हुए चार-पांच साल से ज्यादा होने आ रहे हैं। अधूरा काम और उसकी मरम्मत न होने से इस हाईवे पर जगह-जगह खतरा पैदा हो गया है। दरकते हाईवे, टूटते फ्लाईओवर और खतरनाक खड्ड हो जाने से यहां आए दिन हादसों में मौतें हो रही हैं। एनएचएआई ने वर्ष 2018 में इरा कंपनी से काम छीनकर उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया था। अभी अक्तूूबर में एनएचएआई ने आगरा की राज कारपोरेशन नाम की एक कंपनी को करीब सात अरब का कांट्रेक्ट दिया है। अब उसे बरेली से सीतापुर के बीच अधूरे हाईवे और फ्लाईओवर का निर्माण 15 दिन के अंदर पूरा करके देना है। इसमें दिक्कत यह आ रही है कि इन दिनों कड़ाके की सर्दी शुरू हो गई है। तापमान इतना ज्यादा कम है कि हाईवे बनाने के लिए कोलतार सही से नहीं चिपकेगा। इसलिए प्लानिंग यह बनाई गई है कि जनवरी में पहले टूटे और अधूरे फ्लाईओवर का निर्माण कराया जाए। बाद में मौसम सामान्य होने के बाद हाईवे का निर्माण होगा। खतरे वाली जगहों पर मिट्टी पटान से गहरे गड्ढे भी भरे जाएंगे।
पहले उन जगहों पर मरम्मत कार्य कराई जाएगी, जहां मिट्टी बारिश व अन्य कारणों से ज्यादा कट गई है। एक लेन को मोटर चलने लायक बनाने के बाद दूसरी लेन का निर्माण कराया जाएगा। प्रोजेक्ट को निर्धारित 15 महीने में पूरा कराने के लिए हर महीने प्रगति की समीक्षा की जाएगी। अब किसी भी हालत में इस प्रोजेक्ट को लटकने नहीं दिया जाएगा।
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- अब्दुल वासित, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई
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मौसम सामान्य होने पर हाईवे के लिए हॉटमिक्स का शुरू होगा काम
बरेली। लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर करीब 10 साल से अटके सीतापुर-बरेली हाईवे (एनएच-30) पर काम शुरू करने के लिए एनएचएआई ने भले ही सात अरब का कांट्रेक्ट लेने वाली कंपनी को अनुमति पत्र दे दिया हो, लेकिन सड़क के इंजीनियरों का कहना है कि इतनी सर्दी में हाईवे बनाने के लिए कोलतार सही से सेट नहीं होगा। इसलिए शुरूआती चरण में अधूरे हाईवे की जगह खस्ताहाल फ्लाईओवर का निर्माण कराया जाएगा। तापमान सामान्य होने के साथ ही हॉटमिक्स रोड बनाई जाएगी। हालांकि टूटते-दरकते हाईवे पर कई जगहों पर खतरनाक खड्ड बन गए हैं, जिससे यहां आए दिन हादसे हो रहे हैं।
साल 2010 में एनएचआई ने करीब 157 किलोमीटर लंबे इस हाईवे का कांट्रेक्ट इरा इंफ्रा स्ट्रक्चर नाम की कंपनी को दिया था, जो पिछले साल फ्लाईओवर और हाईवे का निर्माण अधूरा छोड़कर फरार हो गई, जबकि फरार कंपनी को काम बंद किए हुए चार-पांच साल से ज्यादा होने आ रहे हैं। अधूरा काम और उसकी मरम्मत न होने से इस हाईवे पर जगह-जगह खतरा पैदा हो गया है। दरकते हाईवे, टूटते फ्लाईओवर और खतरनाक खड्ड हो जाने से यहां आए दिन हादसों में मौतें हो रही हैं। एनएचएआई ने वर्ष 2018 में इरा कंपनी से काम छीनकर उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया था। अभी अक्तूूबर में एनएचएआई ने आगरा की राज कारपोरेशन नाम की एक कंपनी को करीब सात अरब का कांट्रेक्ट दिया है। अब उसे बरेली से सीतापुर के बीच अधूरे हाईवे और फ्लाईओवर का निर्माण 15 दिन के अंदर पूरा करके देना है। इसमें दिक्कत यह आ रही है कि इन दिनों कड़ाके की सर्दी शुरू हो गई है। तापमान इतना ज्यादा कम है कि हाईवे बनाने के लिए कोलतार सही से नहीं चिपकेगा। इसलिए प्लानिंग यह बनाई गई है कि जनवरी में पहले टूटे और अधूरे फ्लाईओवर का निर्माण कराया जाए। बाद में मौसम सामान्य होने के बाद हाईवे का निर्माण होगा। खतरे वाली जगहों पर मिट्टी पटान से गहरे गड्ढे भी भरे जाएंगे।
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पहले उन जगहों पर मरम्मत कार्य कराई जाएगी, जहां मिट्टी बारिश व अन्य कारणों से ज्यादा कट गई है। एक लेन को मोटर चलने लायक बनाने के बाद दूसरी लेन का निर्माण कराया जाएगा। प्रोजेक्ट को निर्धारित 15 महीने में पूरा कराने के लिए हर महीने प्रगति की समीक्षा की जाएगी। अब किसी भी हालत में इस प्रोजेक्ट को लटकने नहीं दिया जाएगा।
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- अब्दुल वासित, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई