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ओमिक्रॉन की दहशत बढ़ा रही अवसाद... चिड़चिड़ापन करा रहा फसाद

Fri, 10 Dec 2021 02:10 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 10 Dec 2021 02:10 AM IST
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Depression is increasing the panic of Omicron ... causing irritability
demo photo - फोटो : एएनआई
पहले से डिप्रेशन के शिकार मरीजों को बढ़ रही दिक्कत, दिमाग में बैठ रहा डर
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बरेली। कोविड की दो लहरें लोग झेल चुके हैं। शहर में भी तमाम मौतें र्हुइं और लोगों ने आंखों के सामने ही अपनों को खो दिया। इससे वे अवसाद के शिकार हो गए। अस्पताल में इलाज के लिए लाइन में भी लगे हैं। अब ओमीक्रॉन के आने की आशंका से लोग परेशान है। डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। चिड़चिड़ापन इस कदर बढ़ने लगा है कि लोग मामूली बात पर भी आक्रामक होने लगे हैं। खासकर यह वे लोग हैं, जिन्हें दूसरी लहर में कोविड हुआ और वह लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे हैं। अवसाद का शिकार हो रहे लोगों में व्यापारी, नौकरीपेशा के साथ ही वे लोग भी हैं, जिन्होेंने दूसरी लहर में परिजन को खोया है। मनोचिकित्सक के पास ऐसे कई मामले आने शुरू हो गए हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. हेमा खन्ना ने कहा कि एक साल पहले कोरोना के खौफ और लाकडाउन ने भागदौड़ भरी जिंदगी की रफ्तार एकदम थाम सी दी थी। इस दौरान मनोरोग के मामले सबसे अधिक सामने आए। इस बीमारी ने बहुत पैर पसारे। अब ओमीक्रान की चर्चा भी हर तरफ दिख रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कुछ केस मिलना शुरू हो गए हैं तो एक बार फिर लोगों में घबराहट बढ़ रही है। खासकर यह वह लोग हैं, जिन्हाेेंने दूसरी लहर में अपनी नौकरी गंवाई है या परिजन को खोया है। व्यापार चौपट हुआ है और अब किसी तरह से सबकुछ संभाल लिया है। ऐसे में यह लोग ओमीक्रान की आशंका और बीत चुकी दूसरी लहर के तत्कालीन हालातों को अपने मन पटल पर बनाकर परेशान हो रहे हैं। ऐसे में जरूरत है लोगों को समय के साथ संतुलन बनाए रखने की। परिजन आपस में एक-दूसरे को अधिक से अधिक समय दें।
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उन्होंने कहा कि यदि परिवार में किसी सदस्य के व्यवहार में अचानक बदलाव आ रहा है तो उसे हल्के में न लें। नींद नहीं आना, बेवजह शक करना, खाना-पीना छोड़ देना या हमेशा थका सा महसूस करना और सदमें में आ जाना तो यह सामान्य लक्षण नहीं है। ऐसा होने पर चिकित्सक की सलाह लें। उन्हाेंने यह भी कहा कि वैश्विक महामारी बन चुकी कोरोना को अपने दिलो-दिमाग पर बिल्कुल हावी न होने दें। इस डर को दिमाग से दूर कर अपनों के साथ खुशनुमा माहौल में वक्त बिताएं, इससे एनजाइटी से आप दूर रहेंगे।
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मन परेशान तो ऐसे बिताएं समय
- टाइम टेबल बता बनाकर समय बिताएं।
- पसंदीदा पुस्तकें पढ़ें।
- खाना बनाने का शौक है तो खाली समय में किचन में वक्त दें।
- सुबह व्यायाम करें, योगा करें।
- पसंदीदा फि ल्में देखें, धार्मिक पुस्तकें पढ़ें।

केस- 1
नौकरी जाने का सता रहा डर
इज्जतनगर क्षेत्र निवासी एक युवक निजी कंपनी में कार्यरत है। उसने बताया कि वह कोविड की दूसरी लहर आने के दौरान दिल्ली में एक प्लास्टिक कंपनी में अच्छे पद व अच्छे वेतन पर कार्यरत था। सबकुछ अच्छा चल रहा था और दूसरी लहर में कई लोगों की छंटनी हुई तो उसकी नौकरी भी चली गई। उस कठिन समय में करीब तीन माह तक वह बिना नौकरी के घर बैठा रहा। परिवार चलाना मुश्किल हो गया और उसके बाद उसने बरेली में ही एक निजी कंपनी में काम शुरू किया है। एक-दो महीने पहले ही सबकुछ संभला है और ऐसे में अब ओमीक्रॉन आया और हालात उसी तरह के हो गए तो उसके परिवार के सामने आर्थिक संकट आ जाएगा।


केस- 2
पहले ही मौत के मुंह से बाहर आया, अब नहीं झेल सकता
शहर के राजेंद्र नगर निवासी एक व्यक्ति शिक्षक हैं। कोविड के दौरान उनकी हालत काफी बिगड़ गई थी और शहर के एक निजी अस्पताल में वह करीब दस दिनों तक भर्ती रहे थे। कुछ करीबी शिक्षकों को भी उन्होंने दूसरी लहर में खोया था। कहते हैं कि वह खुद मौत के मुंह से लौटे थे और अब अगर कहीं दूसरी लहर जैसे हालात बने तो क्या होगा। उन्हें कोविड हुआ और वह ठीक भी हो गए लेकिन अभी तक वह थकावट महसूस करते हैं। ओमीक्रान से उन्हें दोबारा दिक्कत न हो, इसका डर उनके मन में हमेशा बना रहता है।
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