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Bareilly News: डेंगू फैल रहा, रोकथाम में स्वास्थ्य विभाग हो रहा फेल
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बरेली। तेजी से फैल रहे डेंगू को रोकने में स्वास्थ्य विभाग फेल साबित हो रहा है। जिले में अब तक 287 डेंगू मरीज मिल चुके हैं, लेकिन रोकथाम के इंतजामों (सोर्स रिडक्शन, कन्टेनमेंट एक्टिविटी) के लिए 195 मरीजों के घरों में ही स्वास्थ्य टीमें अभी तक पहुंच सकी हैं। विभिन्न स्थानों पर रह रहे 92 मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की टीम का इंतजार है।
टीमों को इन मरीजों के घर पहुंचकर फॉगिंग, परिजनों के स्वास्थ्य की जांच, आसपास के सौ मीटर के दायरे में आने वाले घरों में लार्वा नाशक कार्रवाई करनी होती है। ताकि लार्वा को नष्ट कराकर मच्छरों का प्रकोप पर अंकुश लगाकर दूसरों को भी सुरक्षित किया जा सके।
रोकथाम के संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से ही गाइडलाइन तय है। डेंगू की पुष्टि के बाद इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) की ओर से मलेरिया विभाग को दैनिक रिपोर्ट भेजी जाती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर शहर में मलेरिया विभाग व नगर निगम रोकथाम के उपायों पर कार्रवाई करता है। वहीं गांवों में मलेरिया विभाग के साथ स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र, नगर निकाय व ग्राम पंचायत की टीमें सोर्स रिडक्शन, कन्टेनमेंट एक्टिविटी, एंटीवेक्टर एक्टिविटी के लिए प्रभावित घरों में पहुंचती हैं। गाइडलाइन के अनुसार मरीज में डेंगू संक्रमण की पुष्टि के 48 घंटे में रोकथाम की ये कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसे नहीं कर पा रहा।
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जिम्मेदार रो रहे जांच रिपोर्ट में देरी और स्टाफ की कमी का रोना
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि कई बार निजी लैब और निजी अस्पताल से मरीजों की सूचना देर से मिलती है। इससे मरीज के यहां स्वास्थ्य विभाग की टीम को समय से भेज पाना मुश्किल होता है। पिछले दिनों सूचना देने में हो रही लेटलतीफी पर चेतावनी भी दी जा चुकी है। वहीं, घर-घर चिकित्सकीय सहायता पहुंचाने वाली टीमों के सदस्य भी सीमित हैं। लिहाजा, हर घर को कवर करने में देरी होती है।
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सीएमओ बोले- अतिसंवेदनशील ब्लॉकों में चल रही कवायद
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक जिले के पांच ब्लॉक मीरगंज, भोजीपुरा, फतेहगंज पश्चिमी, आंवला, शेरगढ़ में सर्वाधिक डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। इन्हें अतिसंवेदनशील घोषित किया गया है। प्राथमिकता पर इन ब्लॉकों में स्वास्थ्य विभाग के साथ स्थानीय प्रशासन और पंचायतों की टीमें सोर्स रिडक्शन, एंटीवेक्टर एक्टिविटी कर रही हैं। अन्य ब्लॉकों में भी डेंगू की रोकथाम के लिए टीमें सक्रिय हैं।
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दो साल पहले भी भारी पड़ी थी सुस्ती
डेंगू, मलेरिया संक्रामक रोग हैं। इसीलिए डेंगू की पुष्टि के बाद तेजी से प्रभावित इलाकों में रोकथाम के प्रयास किए जाने चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो साल पहले भी ढिलाई बरती गई थी। सोर्स रिडक्शन में लापरवाही के चलते केस बढ़े थे। अब इस वर्ष भी बीते सप्ताह भर से हर दिन 15 से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं।
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ऐसे पांव पसार रहा डेंगू
- बुधवार को डेंगू के 24 नए मरीज मिले हैं, जबकि 49 लोगों की रिपोर्ट डेंगू संदिग्ध मिली है।
- जिले में अब तक डेंगू की चपेट में आए 287 मरीज और डेंगू संदिग्ध 475 लोग मिल चुके हैं।
- शहर के 17 वार्डों में 143 और ग्रामीण क्षेत्र के 16 ब्लॉकों में डेंगू के 144 मरीज मिले हैं।
- 2.17 लाख घरों की अब तक हुई जांच में 9715 घरों में लार्वा मिले, जिन्हें नष्ट कराया गया।
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टीमों को इन मरीजों के घर पहुंचकर फॉगिंग, परिजनों के स्वास्थ्य की जांच, आसपास के सौ मीटर के दायरे में आने वाले घरों में लार्वा नाशक कार्रवाई करनी होती है। ताकि लार्वा को नष्ट कराकर मच्छरों का प्रकोप पर अंकुश लगाकर दूसरों को भी सुरक्षित किया जा सके।
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रोकथाम के संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से ही गाइडलाइन तय है। डेंगू की पुष्टि के बाद इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) की ओर से मलेरिया विभाग को दैनिक रिपोर्ट भेजी जाती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर शहर में मलेरिया विभाग व नगर निगम रोकथाम के उपायों पर कार्रवाई करता है। वहीं गांवों में मलेरिया विभाग के साथ स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र, नगर निकाय व ग्राम पंचायत की टीमें सोर्स रिडक्शन, कन्टेनमेंट एक्टिविटी, एंटीवेक्टर एक्टिविटी के लिए प्रभावित घरों में पहुंचती हैं। गाइडलाइन के अनुसार मरीज में डेंगू संक्रमण की पुष्टि के 48 घंटे में रोकथाम की ये कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसे नहीं कर पा रहा।
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जिम्मेदार रो रहे जांच रिपोर्ट में देरी और स्टाफ की कमी का रोना
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि कई बार निजी लैब और निजी अस्पताल से मरीजों की सूचना देर से मिलती है। इससे मरीज के यहां स्वास्थ्य विभाग की टीम को समय से भेज पाना मुश्किल होता है। पिछले दिनों सूचना देने में हो रही लेटलतीफी पर चेतावनी भी दी जा चुकी है। वहीं, घर-घर चिकित्सकीय सहायता पहुंचाने वाली टीमों के सदस्य भी सीमित हैं। लिहाजा, हर घर को कवर करने में देरी होती है।
सीएमओ बोले- अतिसंवेदनशील ब्लॉकों में चल रही कवायद
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक जिले के पांच ब्लॉक मीरगंज, भोजीपुरा, फतेहगंज पश्चिमी, आंवला, शेरगढ़ में सर्वाधिक डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। इन्हें अतिसंवेदनशील घोषित किया गया है। प्राथमिकता पर इन ब्लॉकों में स्वास्थ्य विभाग के साथ स्थानीय प्रशासन और पंचायतों की टीमें सोर्स रिडक्शन, एंटीवेक्टर एक्टिविटी कर रही हैं। अन्य ब्लॉकों में भी डेंगू की रोकथाम के लिए टीमें सक्रिय हैं।
दो साल पहले भी भारी पड़ी थी सुस्ती
डेंगू, मलेरिया संक्रामक रोग हैं। इसीलिए डेंगू की पुष्टि के बाद तेजी से प्रभावित इलाकों में रोकथाम के प्रयास किए जाने चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो साल पहले भी ढिलाई बरती गई थी। सोर्स रिडक्शन में लापरवाही के चलते केस बढ़े थे। अब इस वर्ष भी बीते सप्ताह भर से हर दिन 15 से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं।
ऐसे पांव पसार रहा डेंगू
- बुधवार को डेंगू के 24 नए मरीज मिले हैं, जबकि 49 लोगों की रिपोर्ट डेंगू संदिग्ध मिली है।
- जिले में अब तक डेंगू की चपेट में आए 287 मरीज और डेंगू संदिग्ध 475 लोग मिल चुके हैं।
- शहर के 17 वार्डों में 143 और ग्रामीण क्षेत्र के 16 ब्लॉकों में डेंगू के 144 मरीज मिले हैं।
- 2.17 लाख घरों की अब तक हुई जांच में 9715 घरों में लार्वा मिले, जिन्हें नष्ट कराया गया।