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Bareilly News: बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग

Fri, 20 Feb 2026 02:40 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Fri, 20 Feb 2026 02:40 AM IST
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Demand to make Bareilly College a central university
बरेली। बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग एक बार फिर उठी है। इस बार एमएलसी बहोरन लाल मौर्य ने आवाज उठाई है। इससे पहले बजट सत्र के दौरान भी उन्होंने यह मांग उठाई गई थी। इसका संज्ञान लेते हुए शासन की ओर से उच्च शिक्षा विभाग व बरेली कॉलेज को पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी गई है। इसके लिए महाविद्यालय में कर्मचारियों व शिक्षकों की संख्या सहित संसाधनों आदि की जानकारी जुटाई जा रही है। कॉलेज के ऐतिहासिक महत्व के बारे में भी जानकारी मांगी गई है।
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एमएलसी बहोरन लाल ने बताया कि दिल्ली व लखनऊ के बीचोंबीच स्थित बरेली में केंद्रीय विश्वविद्यालय होना आवश्यक है। बजट सत्र के दौरान भी इसे उठाया था। इसके अलावा बरेली में एम्स, बरेली से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट की बहाली, बिलवा कृषि फॉर्म दोहना टोल प्लाजा के पास कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना, सेमीखेड़ा स्थित सहकारी चीनी मिल की पेराई क्षमता में वृद्धि और भोजीपुरा में अभयपुर से रिठौरा के बीच सात किलोमीटर के क्षेत्र को विकसित किया जाना बरेली के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री के स्तर से एम्स के लिए केंद्र को एक पत्र भी भेजा गया था।
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महाविद्यालय ने तय किया 189 वर्षों का सफर
बरेली कॉलेज की स्थापना वर्ष 1837 में हुई थी। शुरुआती वर्ष में मात्र 57 विद्यार्थियों के साथ एक स्कूल के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी। 1857 की क्रांति के बाद 1859 में कॉलेज की पुनर्स्थापना हुई। वर्ष 1877 में आर्थिक संकट के बाद कॉलेज बंद हुआ, फिर प्राचार्य पंडित छेदालाल के प्रयासों से जयपुर के राजा जगत सिंह की अध्यक्षता में फिर इसका संचालन शुरू हुआ। इसकी सेंट्रल कमेटी बनी। शुरुआती संबद्धता आगरा विश्वविद्यालय से रही। फिर कानपुर विश्वविद्यालय और वर्तमान में रुहेलखंड विश्वविद्यालय से इसकी संबद्धता है। 1904-05 के दौरान शिक्षा अधिनियम के तहत बरेली कॉलेज को अलग भूमि की आवश्यकता पड़ी, तब रामपुर के नवाब ने 110 एकड़ जमीन दान में दी थी। वर्ष 1947 में छात्र कृपानंदन ने यहां पहले ही तिरंगा फहरा दिया था। वर्ष 1906 में बना आजाद छात्रावास स्वतंत्रता सेनानियों का ठिकाना रहा था। यहां से भारत छोड़ो आंदोलन व आजाद हिंद फौज के लिए छात्रों की भीड़ जुटाई गई थी। देश के चौथे उपराष्ट्रपति गोपाल स्वरूप पाठक बरेली कॉलेज से पढ़े हुए थे। वर्तमान में बरेली कॉलेज में 14 हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
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