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जांच में दोषी मिला प्रधान, होगी रिकवरी
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पैसा
- फोटो : amar ujala
बरेली। सख्त कार्रवाई और चेतावनी के बाद भी गांव के विकास के लिए जारी बजट की बंदरबाट खत्म नहीं हो रही है। हाल ही में हुई जांच में एक ग्राम प्रधान द्वारा रिकॉर्ड में हेराफेरी कर करीब 54 लाख रुपये के बजट हड़पने की पुष्टि हुई है। डीएम ने नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों पर रोक लगाने की चेतावनी दी है।
मीरगंज की ग्राम पंचायत सिंधौली के शिशुपाल गंगवार, होरी लाल गंगवार, बेचे लाल मौर्य, मोहन और अन्य ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान के खिलाफ 2015-19 तक निर्माण और विकास कार्यों के नाम पर लाखों के बजट गबन का आरोप लगाया था। डीएम को सौंपे शिकायती पत्र पर सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता को जांच सौंपी गई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक प्रधान ने 80 हैंडपंप लगाने का दावा किया, लेकिन मौके पर 56 हैंडपंप ही मिले। सफाई अभियान पर 142600 रुपये का व्यय दिखाया है, लेकिन सफाई के बाबत सिर्फ कागजी कार्रवाई ही मिली। शौचालय निर्माण में भी तमाम लाभार्थियों को बजट जारी नहीं होने की पुष्टि हुई। नियमविरुद्ध तरीके से 125 स्ट्रीट लाइट लगाने में भी खेल करने, स्ट्रीट लाइट मरम्मत, हैंडपंप मरम्मत के नाम पर मनमाने तरीके से बजट के दुरुपयोग समेत अन्य निर्माण कार्यों में बड़े पैमान पर धांधली की पुष्टि की गई है। रिपोर्ट में ग्राम प्रधान रेशमा बी और तत्कालीन सचिव रोहित कुमार को शासकीय धन के दुरुपयोग का दोषी पाया गया है। इन पर वर्ष 2016 से लेकर 2019 तक 5466944 रुपये के गबन की आशंका जताई है। रिपोर्ट में गबन की गई धनराशि का निज हित में प्रयोग करने की बात कही गई है। संबंधित जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम नितीश कुमार ने प्रधान रेशमा बी और सचिव रोहित कुमार से जवाब तलब किया है। साथ ही, तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर अंतिम जांच के निर्देश दिए हैं।
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मीरगंज की ग्राम पंचायत सिंधौली के शिशुपाल गंगवार, होरी लाल गंगवार, बेचे लाल मौर्य, मोहन और अन्य ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान के खिलाफ 2015-19 तक निर्माण और विकास कार्यों के नाम पर लाखों के बजट गबन का आरोप लगाया था। डीएम को सौंपे शिकायती पत्र पर सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता को जांच सौंपी गई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक प्रधान ने 80 हैंडपंप लगाने का दावा किया, लेकिन मौके पर 56 हैंडपंप ही मिले। सफाई अभियान पर 142600 रुपये का व्यय दिखाया है, लेकिन सफाई के बाबत सिर्फ कागजी कार्रवाई ही मिली। शौचालय निर्माण में भी तमाम लाभार्थियों को बजट जारी नहीं होने की पुष्टि हुई। नियमविरुद्ध तरीके से 125 स्ट्रीट लाइट लगाने में भी खेल करने, स्ट्रीट लाइट मरम्मत, हैंडपंप मरम्मत के नाम पर मनमाने तरीके से बजट के दुरुपयोग समेत अन्य निर्माण कार्यों में बड़े पैमान पर धांधली की पुष्टि की गई है। रिपोर्ट में ग्राम प्रधान रेशमा बी और तत्कालीन सचिव रोहित कुमार को शासकीय धन के दुरुपयोग का दोषी पाया गया है। इन पर वर्ष 2016 से लेकर 2019 तक 5466944 रुपये के गबन की आशंका जताई है। रिपोर्ट में गबन की गई धनराशि का निज हित में प्रयोग करने की बात कही गई है। संबंधित जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम नितीश कुमार ने प्रधान रेशमा बी और सचिव रोहित कुमार से जवाब तलब किया है। साथ ही, तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर अंतिम जांच के निर्देश दिए हैं।
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