Bareilly News: बरेली बार एसोसिएशन के सचिव बने दीपक पांडेय, गौरव राठौर को 20 वोटों से हराया
बरेली बार एसोसिएशन के सचिव पद पर दीपक पांडेय निर्वाचित हुए हैं। उपचुनाव में दीपक ने गौरव राठौर को 20 वोटों से हरा दिया। बुधवार को नतीजे घोषित होने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
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बरेली बार एसोसिएशन के सचिव पद पर हुए उपचुनाव में दीपक पांडेय ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी गौरव राठौर को कांटे के मुकाबले में 20 वोट से हराकर जीत दर्ज की है। दीपक पांडेय को 427 और गौरव राठौर को 407 वोट मिले। 333 वोट के साथ अंगन सिंह तीसरे स्थान पर रहे।
दीपक पांडेय बरेली बार एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष हैं। वहीं, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य पद पर दीप्ती सक्सेना चुनाव जीती हैं। दीप्ती सक्सेना को 1248 और उनके निकटतम प्रतिद्वंदी लोकनाथ को 625 वोट मिले।
जून के पहले सप्ताह में बार सचिव वीपी ध्यानी के निधन के बाद से यह पद रिक्त था। सचिव पद पर हुए उप चुनाव के लिए मंगलवार को मतदान कराया गया। बार एसोसिएशन सभागार में छह बूथों पर पंजीकृत कुल 2,377 अधिवक्ताओं में से 1,908 ने वोट डाला।
13 प्रत्याशी थे मैदान में
बुधवार को दोपहर 12 बजे से मतगणना कराई गई। सचिव पद पर 13 प्रत्याशी मैदान में थे। छह राउंड में हुई मतगणना में दीपक पांडेय ने पहले राउंड में बढ़त बना ली। दूसरे व तीसरे राउंड में वह अंगन सिंह और गौरव राठौर से मामूली पिछड़े। चौथे राउंड से दीपक पांडेय लगातार आगे रहे। दीपक पांडेय को 427, गौरव राठौर को 407 और अंगन सिंह को 333 वोट मिले। पूरे दमखम से चुनाव मैदान में उतरे और कई संगठनों के समर्थन का दावा करने वाले अंतरिक्ष सक्सेना 220 वोट के साथ चौथे स्थान पर खिसक गए।
इसके अलावा प्रदीप कुमार को 187 और विनोद सिंह को 100 वोट मिले। एकमात्र महिला प्रत्याशी नजमा परवीन के हिस्से में 62 वोट आए। प्रदीप कुमार सक्सेना को 55, दीनदयाल पांडेय को 52, सुनील वर्मा को 45, राकेश श्रीवास्तव को 20, शशिकांत तिवारी को 21 और जितेंद्र गुप्ता को महज 11 वोट मिले। मतगणना के दौरान विभिन्न कारणों से 48 वोट निरस्त कर दिए गए। पहले और दूसरे राउंड में छह-छह, तीसरे राउंड में चार, चौथे राउंड में आठ, पांचवें राउंड में 18 और छह राउंड की मतगणना में छह वोट निरस्त किए गए।
नए सचिव के सामने गुटबाजी खत्म करना चुनौती
उपचुनाव में बरेली बार एसोसिएशन के सचिव चुने गए दीपक पांडेय के सामने बार में चल रही गुटबाजी खत्म करना चुनौती से कम नहीं होगा। वीपी ध्यानी के कार्यकाल के समय से ही गुटबाजी चल रही है। बार में चार गुट हैं। एक गुट सचिव के साथ था जबकि दूसरा विरोध में। दो अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं के गुट भी हैं। लंबे समय से सभी एक दूसरे की टांग खिंचाई में लगे हुए हैं।
अप्रैल और मई में गुटबाजी पूरी तरह से सतह पर आ गई थी। इसके बाद एक गुट ने तत्कालीन सचिव वीपी ध्यानी के खिलाफ कई दिन धरना भी दिया था। बार सचिव के खिलाफ एक गुट को उकसाने का आरोप भी कुछ पदाधिकारियों पर लगा, लेकिन वह आरोपों से किनारा करते रहे।