फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Darul Ifta gave a fatwa against demanding dowry

बरेली : दारुल इफ्ता ने दिया फतवा, कहा- हराम-ओ-लानत का काम है दहेज मांगना 

Sun, 04 Jul 2021 02:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 04 Jul 2021 02:51 AM IST
सार

  • इस्लाम में रिश्वत माना गया है दहेज को  
  • फतवे में कहा गया है कि इस्लाम में दहेज नाम का कोई लफ्ज ही नहीं है 

विज्ञापन
Darul Ifta gave a fatwa against demanding dowry
demo pic... - फोटो : iStock

विस्तार

दहेज को लेकर यूं तो कई बार दरगाहों, खानकाहों और उलमा की ओर से अपील जारी की जा चुकी है। इसमें दहेज के लेन-देन को मना करते हुए कहा गया कि मुस्लिम शादी को आसान बनाएं, ताकि लड़की पक्ष पर ज्यादा बोझ न पड़े। चार पांच दिन पहले इस मुद्दे पर जमीयतुर्रजा दारुल इफ्ता में सवाल डाला गया। इस पर दारुल इफ्ता की और से फतवा जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि इस्लाम में दहेज नाम का कोई लफ्ज ही नहीं है। 

विज्ञापन


 फतवे में कहा गया है कि निकाह के एवज में मांग कर कुछ लेना रिश्वत है और हराम-ओ-लानत का काम है। सरकार रसूले पाक ने कहा है कि रिश्वत लेने और देने वाले दोनों ही जहन्नुमी और दोनों पर अल्लाह की लानत है। आगे लिखा गया है कि निकाह के बदले जो कुछ लिया जाता है उसी को मुआशरे (समाज) में दहेज से ताबीर करते हैं। रिश्वत का लौटाना वाजिब है, क्योंकि रिश्वत में दिए माल का कोई मालिक नहीं होता। 
विज्ञापन


इस फतवे में इब्ने हजम उनदुलूसी की किताब ‘अल मोहल्ली’ के हवाले से कहा गया है कि औरत को दहेज लाने पर मजबूर करना जायज नहीं है। अगर कोई अपनी खुशी से बेतलब कुछ दे तो जायज है, मगर नुमाइश हरगिज मुनासिब नहीं। तमाम दुश्वारियां इसी की पैदावार हैं। दिखावा अल्लाह और रसूल को सख्त नापसंद है। मुसलमानों पर लाजिम है कि इस वबा से खुद को और समाज को महफूज रखें। इसके अलावा खड़े होकर खाने को खाना मना है और खाने की बरबादी सख्त शानी हराम है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


यह फतवा जमीयतुर्रजा के मुफ्ती हमजला अहमद बिलाल अनवर रजवी पलामवी ने जारी किया है। इसकी तस्दीक नौमहला मस्जिद के इमाम मुफ्ती अब्दुल बाकी ने की है। इस संबंध में जन सेवा टीम के अध्यक्ष पम्मी खान वारसी ने ऑनलाइन सवाल डाला था। इसमें पूछा गया कि मुआशरे में दहेज का चलन बढ़ता जा रहा है। इससे गरीब लड़कियों की शादियां होने में दिक्कतें आ रही हैं। क्या मजहबे इस्लाम में दहेज नाम का कोई लफ्ज है। दहेज लेना और देना जायज है या नाजायज। इस्लाम में इसके लिए क्या हुक्म है। इसके अलावा शादियों में खड़े होकर खाना खाने पर भी सवाल किया गया था। फतवा ऑनलाइन ही दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed