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विश्वविद्यालय के प्रोफेसर से बीमा नवीनीकरण के नाम पर साइबर ठगी
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- फोटो : सोशल मीडिया
फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहे ठग ने खुद को बताया था बीमा कंपनी का मैनेजर
पश्चिम बंगाल के बैंक अकाउंट में रुपये ट्रांसफर कराकर बंद कर लिया फोन
बरेली। फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहे साइबर ठग ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. शैलेश कुमार चौरसिया को चूना लगा दिया। खुद को बीमा कंपनी का मैनेजर बताकर पॉलिसी नवीनीकरण कराने के नाम पर प्रोफेसर से कोलकाता के अमित सिंह के बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर कराए और मोबाइल बंद कर लिया। उसके खिलाफ थाना बारादरी में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रोफेसर कॉलोनी में रहने वाले डॉ. शैलेष कुमार चौरसिया मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं। डॉ. शैलेष ने बताया कि आठ अगस्त को उनकी कार का बीमा खत्म हो गया था। नौ अगस्त को एक व्यक्ति ने उन्हें फोन करके खुद को बीमा कंपनी का मैनेजर बताया। फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करते हुए कहा कि आपकी कार का बीमा खत्म हो गया है। ऑनलाइन नवीनीकरण करा लीजिए। उन्हें उस पर शक हुआ तो उसने बीमा की नामिनी समेत अन्य जानकारी भी बता दी लेकिन उन्होंने फिर भी भरोसा नहीं किया।
डॉ. शैलेश ने बताया कि ठग ने उन्हें भरोसे में लेने के लिए अपना इंप्लाई कोड और बीमा कंपनी के हेड ऑफिस की जानकारी दी। फिर उन्हें कंपनी के लेटर हेड पर बीमा नवीनीकरण का एस्टीमेट बनाकर भेज दिया। उसी पर एक बैंक खाते की जानकारी भी दी गई थी। इससे वह भरोसे में आ गए और उन्होंने उस खाते में नौ हजार 530 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद ठग ने उन्हें दस मिनट में नवीनीकरण होने का आश्वासन दिया और कुछ समय बाद फोन बंद कर लिया। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने फौरन ही बैंक में शिकायत की और अपनी यूपीआई की आईडी ब्लॉक कराई।
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साइबर सेल की जांच में सामने आया नाम
मामले की शिकायत लेकर वह साइबर सेल पहुंचे और जांच कराई तो जिस अकाउंट में रुपये ट्रांसफर हुए थे, वह पश्चिम बंगाल में कोलकाता रोड के बिशप लिफ्राय, एलआर सरानी के अमित सिंह के नाम पर निकला। मगर साइबर सेल ने रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई। इसके बाद वह थाना बारादरी पहुंचे और उसके खिलाफ तहरीर दी तो रिपोर्ट दर्ज कर ली गई।
अनजान व्यक्ति के खाते में न ट्रांसफर करें रुपये
साइबर ठगी होने पर सबसे पहले टोल फ्री नंबर 155260 पर शिकायत करनी चाहिए। हमें याद रखना चाहिए कि बीमा कंपनी कभी भी किसी व्यक्ति के खाते में रुपये नहीं मांगती है। यहां तक कि वे अपने अधिकृत एजेंट के खाते में भी रुपये ट्रांसफर नहीं कराते। इसलिए किसी भी काम के लिए भुगतान करते समय व्यक्तिगत खाते में रुपये न भेजें। - अनुज अग्रवाल, साइबर एक्सपर्ट
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पश्चिम बंगाल के बैंक अकाउंट में रुपये ट्रांसफर कराकर बंद कर लिया फोन
बरेली। फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहे साइबर ठग ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. शैलेश कुमार चौरसिया को चूना लगा दिया। खुद को बीमा कंपनी का मैनेजर बताकर पॉलिसी नवीनीकरण कराने के नाम पर प्रोफेसर से कोलकाता के अमित सिंह के बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर कराए और मोबाइल बंद कर लिया। उसके खिलाफ थाना बारादरी में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रोफेसर कॉलोनी में रहने वाले डॉ. शैलेष कुमार चौरसिया मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं। डॉ. शैलेष ने बताया कि आठ अगस्त को उनकी कार का बीमा खत्म हो गया था। नौ अगस्त को एक व्यक्ति ने उन्हें फोन करके खुद को बीमा कंपनी का मैनेजर बताया। फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करते हुए कहा कि आपकी कार का बीमा खत्म हो गया है। ऑनलाइन नवीनीकरण करा लीजिए। उन्हें उस पर शक हुआ तो उसने बीमा की नामिनी समेत अन्य जानकारी भी बता दी लेकिन उन्होंने फिर भी भरोसा नहीं किया।
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डॉ. शैलेश ने बताया कि ठग ने उन्हें भरोसे में लेने के लिए अपना इंप्लाई कोड और बीमा कंपनी के हेड ऑफिस की जानकारी दी। फिर उन्हें कंपनी के लेटर हेड पर बीमा नवीनीकरण का एस्टीमेट बनाकर भेज दिया। उसी पर एक बैंक खाते की जानकारी भी दी गई थी। इससे वह भरोसे में आ गए और उन्होंने उस खाते में नौ हजार 530 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद ठग ने उन्हें दस मिनट में नवीनीकरण होने का आश्वासन दिया और कुछ समय बाद फोन बंद कर लिया। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने फौरन ही बैंक में शिकायत की और अपनी यूपीआई की आईडी ब्लॉक कराई।
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साइबर सेल की जांच में सामने आया नाम
मामले की शिकायत लेकर वह साइबर सेल पहुंचे और जांच कराई तो जिस अकाउंट में रुपये ट्रांसफर हुए थे, वह पश्चिम बंगाल में कोलकाता रोड के बिशप लिफ्राय, एलआर सरानी के अमित सिंह के नाम पर निकला। मगर साइबर सेल ने रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई। इसके बाद वह थाना बारादरी पहुंचे और उसके खिलाफ तहरीर दी तो रिपोर्ट दर्ज कर ली गई।
अनजान व्यक्ति के खाते में न ट्रांसफर करें रुपये
साइबर ठगी होने पर सबसे पहले टोल फ्री नंबर 155260 पर शिकायत करनी चाहिए। हमें याद रखना चाहिए कि बीमा कंपनी कभी भी किसी व्यक्ति के खाते में रुपये नहीं मांगती है। यहां तक कि वे अपने अधिकृत एजेंट के खाते में भी रुपये ट्रांसफर नहीं कराते। इसलिए किसी भी काम के लिए भुगतान करते समय व्यक्तिगत खाते में रुपये न भेजें। - अनुज अग्रवाल, साइबर एक्सपर्ट