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सूची छिपा रहे ताकि सच दबा रहे
बरेली
Updated Tue, 10 Feb 2015 12:40 AM IST
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नगर निगम शहर में करदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए करीब छह महीने से आउटसोर्सिंग के जरिये घरों का सर्वे करा रहा है। यह सर्वे कर रहे कर्मचारियों पर हर महीने दो लाख से ज्यादा का बजट खर्च किया जा रहा है। नगर निगम के मुताबिक छह महीने पहले तक पंजीकृत करदाताओं की संख्या 85 हजार थी जो अब सर्वे के बाद करीब 15 हजार बढ़ी बताई जा रही है। हालांकि वास्तविक रूप से नए करदाता कितने बढ़े हैं,, इसका ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। बता दें कि पिछले वित्तीय वर्ष में नगर निगम ने 26 हजार करदाताओं से 28 करोड़ से ज्यादा की टैक्स वसूली की थी। चालू वित्तीय वर्ष में कॉमर्शियल टैक्स की वसूली में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कुछ गड़बड़ियों की जांच के बाद पिछले दिनों मुख्य कर निर्धारण अधिकारी राकेश कुमार सोनकर को निलंबित भी किया जा चुका है।
नगर निगम की कार्यकारिणी की सात फरवरी को हुई बैठक में अफसरों ने मौखिक रूप से शहर में कामर्शियल करदाताओं की संख्या 44 सौ बताई थी लेकिन जब लिखित ब्योरा मांगा गया तो उसे अगली बोर्ड की बैठक तक के लिए टाल दिया गया। सूत्रों के मुताबिक कॉमर्शियल टैक्स की वसूली में सर्वे एजेंसी के कर्मचारियों की मदद से जमकर खेल किया गया। अब मेयर और पार्षदों के बार-बार मांगने के बावजूद कॉमर्शियल टैक्स की सूची सार्वजनिक नहीं की जा रही है। नगर निगम के जिम्मेदार अफसर कॉमर्शियल करदाताओं की नाम और पता सहित सूची देने से कतरा रहे हैं।
कॉमर्शियल प्रॉपर्टी के टैक्स में करीब 90 प्रतिशत हेरफेर है। बोर्ड, कार्यकारिणी या मेयर कोई उठाईगीर नहीं हैं जो उन्हें कॉमर्शियल करदाताओं की सूची नहीं दी जा रही। जनप्रतिनिधियों का भी सम्मान नहीं है। -राजेश अग्रवाल, नेता सपा पार्षद दल
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टैक्स वसूली में बड़ा घपला है, इसीलिए सूची नहीं दी जा रही। महापौर को बोर्ड की बैठक बुलाकर केवल टैक्स घपले पर चर्चा करनी चाहिए क्योंकि अप्रैल से करदाताओं पर 12 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज लगने वाला है। -विकास शर्मा, नेता भाजपा पार्षद दल
नया-नया चार्ज मिला है। कर्मचारियों को करदाताओं का ब्योरा तैयार करने को कहा है। उच्चाधिकारियों के आदेश पर उसे बोर्ड या कार्यकारिणी सदस्यों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। -विकास सेन, सहायक नगर आयुक्त
कामर्शियल टैक्स की सूची देने के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिखा था। अभी तक तो सूची मिली नहीं है। -डॉ. आईएस तोमर, मेयर
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नगर निगम की कार्यकारिणी की सात फरवरी को हुई बैठक में अफसरों ने मौखिक रूप से शहर में कामर्शियल करदाताओं की संख्या 44 सौ बताई थी लेकिन जब लिखित ब्योरा मांगा गया तो उसे अगली बोर्ड की बैठक तक के लिए टाल दिया गया। सूत्रों के मुताबिक कॉमर्शियल टैक्स की वसूली में सर्वे एजेंसी के कर्मचारियों की मदद से जमकर खेल किया गया। अब मेयर और पार्षदों के बार-बार मांगने के बावजूद कॉमर्शियल टैक्स की सूची सार्वजनिक नहीं की जा रही है। नगर निगम के जिम्मेदार अफसर कॉमर्शियल करदाताओं की नाम और पता सहित सूची देने से कतरा रहे हैं।
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कॉमर्शियल प्रॉपर्टी के टैक्स में करीब 90 प्रतिशत हेरफेर है। बोर्ड, कार्यकारिणी या मेयर कोई उठाईगीर नहीं हैं जो उन्हें कॉमर्शियल करदाताओं की सूची नहीं दी जा रही। जनप्रतिनिधियों का भी सम्मान नहीं है। -राजेश अग्रवाल, नेता सपा पार्षद दल
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टैक्स वसूली में बड़ा घपला है, इसीलिए सूची नहीं दी जा रही। महापौर को बोर्ड की बैठक बुलाकर केवल टैक्स घपले पर चर्चा करनी चाहिए क्योंकि अप्रैल से करदाताओं पर 12 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज लगने वाला है। -विकास शर्मा, नेता भाजपा पार्षद दल
नया-नया चार्ज मिला है। कर्मचारियों को करदाताओं का ब्योरा तैयार करने को कहा है। उच्चाधिकारियों के आदेश पर उसे बोर्ड या कार्यकारिणी सदस्यों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। -विकास सेन, सहायक नगर आयुक्त
कामर्शियल टैक्स की सूची देने के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिखा था। अभी तक तो सूची मिली नहीं है। -डॉ. आईएस तोमर, मेयर