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है तमन्ना मरूं देश हित, कफन जो मिले बस तिरंगा मिले
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जंगबहादुरगंज। युवा कर्मयज्ञ समिति के तत्वावधान में ग्राम ढखियारूप रश में चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ के संत सम्मेलन में कवि सम्मेलन हुआ। कवियों ने काव्यपाठ किया। वहीं कवि जगजीवन मिश्र ने सरस्वती वंदना गाकर काव्य पाठ का शुभारंभ किया।
कवि अरविंद कुमार ने पढ़ा कि रावण से राम युद्ध आज हार क्या गए, लक्ष्मण तेरे किरदार में ये कौन आ गया। बदायूं से आए ओज के उर्मिलेश सौमित्र ने स्वर कुछ यूं जोड़ा कि कीर्तिमान स्वाभिमान वाले प्रतिमान लिए बलिदान जिंदाबाद रहेगा सदैव ही, कल भी था जिंदाबाद आज भी है जिंदाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद रहेगा सदैव ही। जगजीवन मिश्र ने पढ़ा कि यार मां जैसा हो वारि गंगा मिले, ना मिले लूट और ना ही दंगा मिले। हास्य की रसदार विशेष शर्मा ने पढ़ा कि है तमन्ना मरूं तो मरूं देश हित, कफ़न जो मिले बस तिरंगा मिले। जिस पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाई। सुनील बाजपेयी ने कुछ यूं पढ़ा कि बात करती नही खरी हो तुम, द्वेष छल दंभ से भरी हो तुम, जा रही हो तो फिर चली जाओ, कौन सा हूर की परी हो तुम। इस दौरान संचालन कर रहे श्रीकांत सिंह ने कहा कि अब बच्चे बड़े हुए हैं कुछ मोदी स्टाइल में, मैं हुआ नोटबंदी सा तुम लगती हो जीएसटी। कार्यक्रम के बाद स्वदेश शुक्ल ने सभी कवियों का स्वागत सम्मान शाल पहनाकर किया।
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कवि अरविंद कुमार ने पढ़ा कि रावण से राम युद्ध आज हार क्या गए, लक्ष्मण तेरे किरदार में ये कौन आ गया। बदायूं से आए ओज के उर्मिलेश सौमित्र ने स्वर कुछ यूं जोड़ा कि कीर्तिमान स्वाभिमान वाले प्रतिमान लिए बलिदान जिंदाबाद रहेगा सदैव ही, कल भी था जिंदाबाद आज भी है जिंदाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद रहेगा सदैव ही। जगजीवन मिश्र ने पढ़ा कि यार मां जैसा हो वारि गंगा मिले, ना मिले लूट और ना ही दंगा मिले। हास्य की रसदार विशेष शर्मा ने पढ़ा कि है तमन्ना मरूं तो मरूं देश हित, कफ़न जो मिले बस तिरंगा मिले। जिस पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाई। सुनील बाजपेयी ने कुछ यूं पढ़ा कि बात करती नही खरी हो तुम, द्वेष छल दंभ से भरी हो तुम, जा रही हो तो फिर चली जाओ, कौन सा हूर की परी हो तुम। इस दौरान संचालन कर रहे श्रीकांत सिंह ने कहा कि अब बच्चे बड़े हुए हैं कुछ मोदी स्टाइल में, मैं हुआ नोटबंदी सा तुम लगती हो जीएसटी। कार्यक्रम के बाद स्वदेश शुक्ल ने सभी कवियों का स्वागत सम्मान शाल पहनाकर किया।
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