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पहनावे से आपत्ति नहीं मगर धर्म की की मर्यादा रखना सबकी जिम्मेदारी
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बरेली। श्री बांके बिहारी मंदिर में महिलाओं के जींस-टॉप और स्कर्ट पहनकर आने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बढ़ते विरोध के बाद अब पदाधिकारियों ने अपना फैसला वापस ले लिया है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि महिलाओं के पहनावे पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन धर्म की मर्यादा बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कुछ श्रद्धालुओं के सामान्य नियमों को लेकर अफवाहें फैलाने की भी बात कही।
श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए श्री बांके बिहारी कल्याण समिति की ओर लागू किए गए नए नियमों पर चार दिनों से हंगामा मचा हुआ है। शुक्रवार की शाम को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने समिति के फैसले के खिलाफ खुलकर विरोध किया था। इन लोगों ने समिति के महिलाओं के जींस-टॉप या स्कर्ट पहनकर आने के साथ मंदिर में दीपक जलाने, भगवान को पुष्प अर्पित करने जैसी तमाम क्रियाओं पर रोक लगाने पर आपत्ति करते हुए पदाधिकारियों पर बच्चों और उनके माता-पिता से अभद्रता करने के आरोप लगाए थे। इसके साथ समिति को भंग कर नई समिति बनाने की मांग की थी।
इतना ही कहा था कि मर्यादित वस्त्र पहनकर आएं
समिति के सचिव दिनेश तनेजा का कहना है कि धर्म स्थल की मान मर्यादा बनाए रखना सिर्फ समिति के प्रयास से ही संभव नहीं है, इसके लिए श्रद्धालुओं की भी भागेदारी होनी चाहिए। कहा, श्रद्धालुओं के लिए कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया है लेकिन श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे मंदिर परिसर में मर्यादित वस्त्र पहनकर आएं। मंदिर परिसर की भव्यता और उसे साफ सुथरा रखने में सभी का सहयोग चाहिए। कहा, समिति के खिलाफ महिलाओं के आरोप मनगढ़ंत हैं। हमले की साजिश किए जाने के आरोप निराधार बताए हैं।
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समिति के लोग करा सकते हैं हमला
मंदिर प्रबंध समिति के नए नियमों के विरोध में आवाज मुखर करने वाली महिला टीना गोयल का आरोप है कि समिति के पदाधिकारी उस पर हमले कर सकते हैं। कहा, शुक्रवार की रात मंदिर परिसर में हुए प्रदर्शन के बाद समिति के कुछ पदाधिक ारी भी पीछे से पहुंचे थे। उन्होंने कुछ श्रद्धालुओं को धर्म का भय दिखाते हुए अपने पक्ष में लिया और विरोध करने वालों से जबरन बहस कर मारपीट करने को प्रेरित किया है। बताया कि समिति के लोगों की इस बात का जिक्र परिजनों से किया तो उन्होंने पुलिस को तहरीर देने का सुझाव दिया है।
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श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए श्री बांके बिहारी कल्याण समिति की ओर लागू किए गए नए नियमों पर चार दिनों से हंगामा मचा हुआ है। शुक्रवार की शाम को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने समिति के फैसले के खिलाफ खुलकर विरोध किया था। इन लोगों ने समिति के महिलाओं के जींस-टॉप या स्कर्ट पहनकर आने के साथ मंदिर में दीपक जलाने, भगवान को पुष्प अर्पित करने जैसी तमाम क्रियाओं पर रोक लगाने पर आपत्ति करते हुए पदाधिकारियों पर बच्चों और उनके माता-पिता से अभद्रता करने के आरोप लगाए थे। इसके साथ समिति को भंग कर नई समिति बनाने की मांग की थी।
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इतना ही कहा था कि मर्यादित वस्त्र पहनकर आएं
समिति के सचिव दिनेश तनेजा का कहना है कि धर्म स्थल की मान मर्यादा बनाए रखना सिर्फ समिति के प्रयास से ही संभव नहीं है, इसके लिए श्रद्धालुओं की भी भागेदारी होनी चाहिए। कहा, श्रद्धालुओं के लिए कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया है लेकिन श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे मंदिर परिसर में मर्यादित वस्त्र पहनकर आएं। मंदिर परिसर की भव्यता और उसे साफ सुथरा रखने में सभी का सहयोग चाहिए। कहा, समिति के खिलाफ महिलाओं के आरोप मनगढ़ंत हैं। हमले की साजिश किए जाने के आरोप निराधार बताए हैं।
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समिति के लोग करा सकते हैं हमला
मंदिर प्रबंध समिति के नए नियमों के विरोध में आवाज मुखर करने वाली महिला टीना गोयल का आरोप है कि समिति के पदाधिकारी उस पर हमले कर सकते हैं। कहा, शुक्रवार की रात मंदिर परिसर में हुए प्रदर्शन के बाद समिति के कुछ पदाधिक ारी भी पीछे से पहुंचे थे। उन्होंने कुछ श्रद्धालुओं को धर्म का भय दिखाते हुए अपने पक्ष में लिया और विरोध करने वालों से जबरन बहस कर मारपीट करने को प्रेरित किया है। बताया कि समिति के लोगों की इस बात का जिक्र परिजनों से किया तो उन्होंने पुलिस को तहरीर देने का सुझाव दिया है।