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‘भारी पड़ा है मुझको महफू रह के जीना..’
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बरेली। संस्कृति आर्ट्स की ओर से शनिवार को स्व. महेंद्र सिंह बांगा के तृतीय स्मृति दिवस पर रोटरी भवन में सम्मान समारोह और मुशायरा हुआ। अध्यक्ष और मशहूर शायरा सिया सचदेव और सचिव गर्व बांगा ने पंजाबी महासभा के अध्यक्ष और समाजसेवी संजय आनंद को महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान से नवाजकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद मुशायरे में शायरों ने रचनाएं सुनाकर समां बांध दिया।
मुशायरा में ककराला से आए नूर ककरालवी ने ‘दिल जब एहसास की सरहद से गुजर जाता है’, शारिक कैफी ने ‘मौत ने सारी रात हमारी नब्ज टटोली’, शायरा सिया सचदेव ने ‘जमाना लाख समझता हो अहमियत मेरी, मेरी नजर में नहीं कोई हैसियत मेरी’ नगीना सुनील साहिल ने ‘हम अपनी प्यास की शिद्दत को जानते ही नहीं’, लखनऊ र्से आइं कवियत्री संध्या सिंह ने ‘भारी पड़ा है मुझको महफू रह के जीना, हर्फ दब गए हैं मेरी जिल्द के वजन से’ समेत अन्य ने अपनी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
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मुशायरा में ककराला से आए नूर ककरालवी ने ‘दिल जब एहसास की सरहद से गुजर जाता है’, शारिक कैफी ने ‘मौत ने सारी रात हमारी नब्ज टटोली’, शायरा सिया सचदेव ने ‘जमाना लाख समझता हो अहमियत मेरी, मेरी नजर में नहीं कोई हैसियत मेरी’ नगीना सुनील साहिल ने ‘हम अपनी प्यास की शिद्दत को जानते ही नहीं’, लखनऊ र्से आइं कवियत्री संध्या सिंह ने ‘भारी पड़ा है मुझको महफू रह के जीना, हर्फ दब गए हैं मेरी जिल्द के वजन से’ समेत अन्य ने अपनी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
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