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पुराने नोट थे अस्पताल में 27 घंटे पड़ा रहा शव
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Thu, 24 Nov 2016 12:51 AM IST
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The bodies were lying in the hospital 27 hours old notes
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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500 और एक हजार के नोट बंद होने की वजह से शाहजहांपुर के पुवायां के एक बैंक गार्ड का शव 27 घंटे तक अस्पताल में ही पड़ा रहा। मृतक का बेटा इधर से उधर रुपये के इंतजाम के लिए भटकता रहा। बाद में रिश्तेदार के एटीएम कार्ड से पेमेंट किया गया तब जाकर शव परिवार वालों को सौंपा गया। हालत ये है कि मंगलवार को 12.40 पर मौत के बाद बुधवार शाम तक शव का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया जा सका। मृतक के बेटे का कहना है कि पेमेंट के चक्कर में अस्पताल ने शव नहीं दिया जब कि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस बारे में परिवार वालों ने संपर्क ही नहीं किया वरना वे मानवता के नाते समय पर शव उन्हें दे देते।
पुवायां के कुंवरपुर निवासी 62 साल के हरीराम मुरादपुर गांव में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में गार्ड थे। 11 नवंबर को रात में बैंक बंद होने के बाद हरीराम पैदल ही गांव को चल दिए। जसवंत कृषि माल के पास बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी। उन्हें मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 22 नवंबर की रात 12:40 बजे उनकी मौत हो गई। हरीराम के बेटे संजय ने बताया कि अस्पताल वालों ने इलाज के पैसे जमा कराने को कहा, लेकिन उनके पास नई करेंसी नहीं थी। 500 और हजार के नोट अस्पताल ने लिए नहीं। संजय दिन पर भटकते रहे। बुधवार को एक रिश्तेदार के एटीएम कार्ड से अस्पताल को करीब 24 हजार रुपए दिए गए। तब 27 घंटे बाद शव मिला। संजय ने बताया कि उनसे स्वाइपिंग चार्ज अस्पताल ने अतिरिक्त भी लिया।
पुलिस ने पंचनामा तक नहीं भरा
मृतक के बेटे विजय ने बताया कि बुधवार अपराह्न तीन बजे के बाद शव मिला तो पुलिस ने पंचनामा तक नहीं भरा। इसके बाद वे डीएम के पास गए जहां से उन्हें एडीएम सिटी के पास भेजा। यहां अनुमति मिलने के बाद कोतवाली गए तब पंचनामा भरा गया लेकिन शाम होने के चलते पोस्टमार्टम नहीं हुआ।
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गलत आरोप है। मौत के बाद उनके घर वाले मिलने ही नहीं आए और गायब हो गए। अगर संपर्क करते तो उनका शव दे दिया जाता। जब ये पैसे लेकर आए तब संपर्क किया। इस समय लोग परेशान हैं इसलिए हम भी सहयोग कर रहे हैं।
अमिताभ, प्रशासनिक अधिकारी, मिशन अस्पताल
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पुवायां के कुंवरपुर निवासी 62 साल के हरीराम मुरादपुर गांव में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में गार्ड थे। 11 नवंबर को रात में बैंक बंद होने के बाद हरीराम पैदल ही गांव को चल दिए। जसवंत कृषि माल के पास बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी। उन्हें मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 22 नवंबर की रात 12:40 बजे उनकी मौत हो गई। हरीराम के बेटे संजय ने बताया कि अस्पताल वालों ने इलाज के पैसे जमा कराने को कहा, लेकिन उनके पास नई करेंसी नहीं थी। 500 और हजार के नोट अस्पताल ने लिए नहीं। संजय दिन पर भटकते रहे। बुधवार को एक रिश्तेदार के एटीएम कार्ड से अस्पताल को करीब 24 हजार रुपए दिए गए। तब 27 घंटे बाद शव मिला। संजय ने बताया कि उनसे स्वाइपिंग चार्ज अस्पताल ने अतिरिक्त भी लिया।
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पुलिस ने पंचनामा तक नहीं भरा
मृतक के बेटे विजय ने बताया कि बुधवार अपराह्न तीन बजे के बाद शव मिला तो पुलिस ने पंचनामा तक नहीं भरा। इसके बाद वे डीएम के पास गए जहां से उन्हें एडीएम सिटी के पास भेजा। यहां अनुमति मिलने के बाद कोतवाली गए तब पंचनामा भरा गया लेकिन शाम होने के चलते पोस्टमार्टम नहीं हुआ।
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गलत आरोप है। मौत के बाद उनके घर वाले मिलने ही नहीं आए और गायब हो गए। अगर संपर्क करते तो उनका शव दे दिया जाता। जब ये पैसे लेकर आए तब संपर्क किया। इस समय लोग परेशान हैं इसलिए हम भी सहयोग कर रहे हैं।
अमिताभ, प्रशासनिक अधिकारी, मिशन अस्पताल